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एकादशी माहात्म्य – एकादशी व्रत पूजन-विधि

एकादशी माहात्म्य

पूजन करने वाले स्त्री-पुरुष स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद रंग की धोती-दुपट्टा-यज्ञोपवीत धारण करें| पूजन प्रारम्भ करने से पहले अपना मुख पूर्व दिशा की ओर करके बैठना चाहिए| पत्नी को दाहिनी ओर बैठाकर गाँठ जुड़वा कर पूजन प्रारम्भ करें| कुशा या आम के पत्तों से अपने ऊपर तथा पूजन-सामग्री पर जल छिड़कें| तीन बार आचमन करें, हाथ धो लें, पवित्री पहनें और मन्त्र पढ़ें| हाथ में अक्षत फूल लेकर भगवान् का और गरुड़ का आह्वान करें| फूल-अक्षत मूर्ति पर चढ़ा दें| इसके बाद हवन प्रारम्भ करें|

पूजन सामग्री – फूलमाला, फूल-गुलाब की पंखुड़ियाँ, दूब, आम के पत्ते, कुशा, तुलसी, रोली, मौली, धूपबत्ती, केसर, कपूर, सिन्दूर, चन्दन, प्रसाद में पेड़ा, बताशा, ऋतुफल, केला, पान, सुपारी, रुई, गंगाजल, अग्निहोत्र भस्म, गोमूत्र, गोबर, घृत, शहद, चीनी, दूध, दही, यज्ञोपवीत, अबीर (गुलाल), अक्षत, अभ्रक, गुलाब जल, धान का लावा, इत्र, शीशा, इलायची, पञ्चमेवा, हल्दी, पीली सरसों, मेहंदी, नारियल, गोला, पंचपल्लव, बंदनवार, कच्चा सूत, मूंग की दाल, उड़द काले, बिल्वपत्र, पंचरत्न, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, पंचरंग एवं सर्वतोभद्र के लिए लाल-सफेद वस्त्र, नवग्रह हेतु चौकी, घण्टा, शंख, कलश, गंगासागर, कटोरी, थाली, बाल्टी, कड़छी, प्रधान प्रतिमा, पंचपात्र, आचमनी, अर्घा, तष्टा, सुवर्ण शलाका, सिंहासन, छत्र, चंवर, अक्षत, जौ, घी, दियासलाई आदि| हवन सामग्री में – यज्ञ पात्र व समिधा आदि लें|

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