Homeभजन संग्रहश्री राम जी के भजनबिरहणिकौं सिंगार न भावै

बिरहणिकौं सिंगार न भावै

भजन - श्री राम जी - बिरहणिकौं सिंगार न भावै

बिरहणिकौं सिंगार न भावै ।

है कोइ ऐसा राम मिलावै ॥टेक॥

बिसरे अंजन-मंजन, चीरा ।

बिरह-बिथा यह ब्यापै पीरा ॥१॥

नौ-सत थाके सकल सिंगारा ।

है कोइ पीड़ मिटावनहारा ॥२॥

देह-गेह नहिं सुद्धि सरीरा ।

निसदिन चितवत चातक नीरा ॥३॥

दादू ताहि न भावत आना ।

राम बिना भई मृतक समाना ॥४॥

 

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