छिपकली बहनों का मिलन - श्री साईं कथा व लीला

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एक समय की बात है कि साईं बाबा मस्जिद में बैठे हुए अपने भक्तों से वार्तालाप कर रहे थे| उसी समय एक छिपकली ने आवाज की, जो सबने सुनी और छिपकली की आवाज का अर्थ अच्छे या बुरे सकुन से होता है| उत्सुकतावश उस समय वहां बैठे एक भक्त ने बाबा से पूछा - "बाबा यह छिपकली क्यों आवाज कर रही है? इसका क्या मतलब है? इसका बोलना शुभ है या अशुभ?"

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बाबा ने कहा - 'अरे, आज इसकी बहन औरंगाबाद से आ रही है, उसी खुशी में यह बोल रही है|" उस भक्त से सोचा - 'यह तो छोटा-सा जीव है| इसकी कौन-सी बहन और भाई? कहां इसका घर-बार? शायद बाबा ने ऐसा मजाक में कह दिया होगा|' वह भक्त बाबा के कथन का रहस्य न समझ सका और चुपचाप बैठा रहा|

उसी समय औरंगाबाद से एक व्यक्ति घोड़े पर सवार होकर बाबा के दर्शन करने आया| बाबा उस समय नहाने गये हुए थे| इसलिए उसने सोचा कि जब तक बाबा आते हैं तब तक मैं बाजार से घोड़े के लिए चने खरीद कर ले आता हूं| ऐसा सोचकर उसने चने लाने का जो थैला कंधे पर रखा हुआ था, धूल झाड़ने के उद्देश्य से झटका तो उसमें से एक छिपकली निकली - और फिर देखते-देखते वह तेजी से दीवार पर चढ़ते हुए पहली वाली छिपकली के पास पहुंच गयी| फिर दोनों खुशी-खुशी लिपटकर दीवार पर इधर-उधर घूमती हुई नाचने लगीं| यह देखकर सब लोग आश्चर्यचकित रह गये| यह कहना बाबा की सर्वव्यापकता का सूचक था| वरना कहां शिरडी और कहां औरंगाबाद!

दासगणु की वेशभूषा चोलकर को शक्कर की चाय पिलाओ साठे पर बाबा की कृपा माँ! मेरे गुरु ने तो मुझे केवल प्यार करना ही सिखाया है

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