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“Yudhishthira said, ‘In this world, O Bharata, acts good and bad attachthemselves to man for the purpose of producing fruits for enjoyment orendurance. Is man, however, to be regarded as their doer or is he not tobe regarded so? Doubt fills my mind with respect to this question. Idesire to hear this in detail from thee, O grandsire!’

एक बार अवंतिपुर में साधु कोटिकर्ण आए। उन दिनों उनके नाम की धूम थी। उनका सत्संग पाने दूर-दूर से लोग आते थे। उस नगर में रहने वाली कलावती भी सत्संग में जाती थी। कलावती के पास अपार संपत्ति थी। उसके रात्रि सत्संग की बात जब नगर के चोरों को मालूम हुई तो उन्होंने उसके घर सेंध लगाने की योजना बनाई।

प्राचीन काल में रुक्मांगद नामक एक प्रसिद्ध सार्वभौम नरेश थे| भगवान् विष्णु की आराधना ही उनका जीवन था| वे चराचर-जगत् में अपने आराध्य भगवान् हषीकेश के दर्शन करते तथा पद्मनाभ भगवान् की सेवा की भावना से ही अपने राज्य का संचालन करते थे| वे सभी प्राणियों पर क्षमा भाव रखते थे|