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श्री गुरु रामदास जी का भेंट देना – साखी श्री गुरु राम दास जी

श्री गुरु रामदास जी का भेंट देना

अकबर बादशाह लाहौर से वापिस आ रहे थे| वापिस आते हुए दिल्ली को जाते हुए गोइंदवाल पड़ाव किया| अकबर बादशाह यह देखकर दंग रह गए कि गुरु जी का अटूट लंगर चल रहा है|

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यह अटूट लंगर बिना किसी जात-पात व भेदभाव के बगैर चल रहा है| यह देखकर उनकी हैरानी की सीमा न रही| वे आश्चर्य में थे कि ऐसी सांझीवालता जहां ऊंच-नीच सभी एक पंक्ति में बैठकर भोजन खाते है| अकबर यह देखकर प्रसन्न हो गए| उन्होंने गुरु के लंगर के लिए झबाल के 12 गांवों की जागीर का पता लिख दिया| श्री गुरु अमरदास जी ने यह अपनी सुपुत्री बीबी भानी व श्री (गुरु) रामदास की सेवा पर प्रसन्न होकर उनको दे दिया और इस का मामला इकट्ठा करने के लिए भाई-बुड्डा जी को सौंप दिया|

 

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