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श्री गुरु अंगद देव जी का छड़ी देना – साखी श्री गुरु अंगद देव जी

श्री गुरु अंगद देव जी का छड़ी देना

एक दिन गोंदे क्षत्रि ने गुरु जी के पास आकर प्रार्थना की, कि सच्चे पातशाह! मेरा गांव जो कि व्यास नदी के किनारे स्थित है, वहां भूतों का निवास है जिसके कारण वह गांव बस नहीं रहा|

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कृपा करके आप वहां आकर बसे| मैं आपके लिए सुन्दर मकान बनवा दूंगा और हर प्रकार से सेवा भी करूंगा| गुरु जी ने पहले अपने बड़े सुपुत्र दासु फिर छोटे पुत्र दातु को वहां निवास के लिए भेजा| दोनों पुत्रों ने मना कर दिया तो गुरु जी ने श्री अमरदास को कहा कि आप गोंदे के साथ चले जाएं व इनकी मदद करें| गुरु की आज्ञा मानकर गुरु अमरदास जी झट से तैयार हो गए|

तब गुरु जी ने जाते हुए एक छड़ी श्री अमरदास जी को दी और कहा कि जब आप इस छड़ी को हवा में हिलाओगे तो इसको दूर से ही देखते ही भूत-प्रेत गांव छोड़कर भाग जाएंगे| इस तरह जब अमरदास जी गोंदे के साथ हाथ में छड़ी लेकर जा रहे थे तो हाथ में छड़ी हिलती देख सब भूत-प्रेत नगर खाली करके भाग गए|

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