पूर्ण सिक्ख के लक्षण व सिक्खी धारण योग्य बातें

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श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने वचन किया कि हे सिक्खो! जिस का जीवन धर्म के लिए है और अपना आचरण गुर-मर्यादा के अनुसार रखता है, वही पूरण सिक्ख है|

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गुरु जी आगे कहने लगे कि सिक्ख अपनी कमाई में से गुरु के निमित दशवंध दे| सिक्खी की रहत में रहे, स्नान और ध्यान स्मरण में लग कर समय व्यतीत करे| परायी स्त्री व पराये धन का त्याग करे| गुरुबाणी का पाठ करे, गुरु पर विश्वास रखे|

सिक्ख के धारण योग्य बातें:

१. सिक्ख भ्रम न करे|

२. सम्बन्धी के मरने पर रोना पीटना न करे|

३. नीच चंडाल को और वैश्या स्त्री को कर्ज न दे| खोटे पुरुष के साथ कभी प्रीति ना करे|

४. वाहिगुरू की ओर से विमुख होकर आंहे न भरे|

५. गुरूद्वारे जाते समय नाख्नों तक सारे पैर धोकर अंदर जाए|

६. रोटी खाने के बाद पेट ना बजाये|

७. चलते-चलते खाना व टट्टी पेशाब न करे|

८. अन्न खा कर उसकी निंदा ना करे|

९. बदचलण पुरुष व स्त्री से प्रीति न करे|

१०. धर्म पुस्तकों को पढकर व सुन कर अपना अंहकार दूर करे|

११. जीवन की जुमेवारियो को धैर्य से निभाए|

१२. खोटा हठ, खोटा भोजन में अपना बडप्पन न करे|

१३. खाता-पीता मन को प्रभू की याद में लगाये|

जो सिक्ख अपने व्यवहार तथा खाने-पीने को शुद्ध रखता है, उसका घर धन से भरपूर रहता है| 

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