13 Jan 2017 
लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं

लोहड़ी

की हार्दिक शुभकामनाएं

श्री गुरु नानक देव जी - जीवन परिचय

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जोर जबरदस्ती और हाक्मोके अत्याचारों से दुखी सृष्टि की पुकार सुनकर अकाल पुरख ने गुरु नानक जी के रूप में जलते हुए संसार  की रक्षा करने के लिए माता तृप्ताजी की कोख से महिता कालू चंद बेदी खत्री के घर राये भोये की तलवंडी (ननकाना साहिब) में कतक सुदी  पूरनमाशी संवत १५२६ को सवा पहर के तड़के अवतार धारण किया|

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गुरु जी (अवतार) का सृष्टि पर प्रभाव 
भाई गुरदास जी
 

सतिगुरु  नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ ||
जिउ कर सूरज निकलिआ  तारे छपे अंधेर पलोआ ||
सिंघ बुके म्रिगावली भन्नी जाई न धीर धरोआ ||
जिथे बाबा पैर धरे पूजा  आसण थापण सोआ ||
सिध आसण सभ जगत दे नानक आदि मते जे कोआ ||
घर घर अंदर धरमसाल होवै  कीरतन सदा  विसोआ ||
बाबे तारे चार चके नौ खंड प्रिथमी सचा ढोआ ||
गुरमुख कलि  विच परगट होआ ||

जब पंडित जी ने महिता कालू से पूछा की दाई से यह पूछो की जनम के समय बच्चे ने कैसी आवाज निकाली थी? तब दौलता दाई ने बताया कि पंडित जी! मेरे हाथों से अनेकों बच्चों ने जनम लिया है,पर मैंने ऐसा बालक आज तक नहीं देखा, और बच्चे तो रोते हुए पैदा होते है पर यह बच्चा तो हँसते हुए पैदा हुआ है| मानों दुपहर का सूरज चड़ गया हो,और पूरा घर  में सुगंध फ़ैल गयी हो| दाई कि बातों से पंडित जी ने यह अनुभव कर लिया कि यह को ई अवतार पैदा हुआ है | गुरु जी को हिंदी, हिसाब  पढ़ने  के लिए  पांधे गोपाल के पास, संस्कृत के लिए पंडित ब्रिज लाल तथा फारसी पढ़ने के लिए मुल्ला कुतबुद्दीन के पास भेजा गया |

गुरु जी ने जन कल्याण व समाज सुधार के लिए चार उदासियाँ की| पहली उदासी पूरब दिशा की तरफ संवत १५५६-१५६५ तक की व दूसरी उदासी दक्षिण दिशा की और संवत १५६७-१५७१ तक की| यहीं तक गुरु जी नहीं रुके, उनकी अगली उदासी उत्तर दिशा की तरफ संवत १५७१ में प्रारम्भ हो ग ई  तथा चौथी उदासी  संवत १५७५ के साथ यह कल्याण यात्रा समाप्त हो गई|  

श्री गुरु नानक देव जी - ज्योति ज्योत समाना खेती करनी खेती का नष्ट होना व गुरु जी का वैराग्य धारण करना राय बुलार की श्री गुरु नानक देव जी के प्रति श्रद्धा

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