13 Jan 2017 
लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं

लोहड़ी

की हार्दिक शुभकामनाएं

श्री गुरु नानक देव जी - ज्योति ज्योत समाना

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गुरु गद्दी की सारी बातचीत भाई बुड्डा जी आदि निकटवर्ती सिखो को समझाकर गुरु नानक देव जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) ने बैकुंठ जाने की तैयारी कर ली| ऐसा सुनकर दूर दूर से सिख आपके अन्तिम दर्शन करने ले लिए आ गए| गुरु जी अपनी धर्मशाला में बैठे थे और कीर्तन हो रहा था|

श्री गुरु नानक देव जी - ज्योति ज्योत समाना सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

इस समय माता सुलखनी जी भी दीन मन होकर गुरु जी के पास आ बैठी| गुरु जी ने दोनों साहिबजादों को भी बुलाया| पर वे थोड़ा समय बैठकर वहाँ से चल दिए|

असूज सुदी दसवी संवत् 1539 को संगत के सामने गुरु जी चादर तानकर लेट गए और संगत को धैर्य देते हुए कहने लगे-आप सभी सत्यनाम का जाप करो| जाप कर रही संगत ने जब कुछ समय बाद देखा तब गुरु जी अपना शरीर छोडकर बैकुंठ में जा चुके थे| आपका अन्तिम संस्कार करने के लिए हिन्दू कहे कि हमारा गुरु है हमने संस्कार करना है| मुस्लमान कहे कि हमारा पीर है हमने दफ़न करना है| इस प्रकार झगडा करते जब दोनों धर्मों के लोगों ने चादर उठाकर देखा तो आपका शरीर अलोप था| केवल चादर ही वहाँ रह गई| इस चादर को लेकर आधा हिन्दुओं ने संस्कार कर दिया और आधा मुसलमानों ने कबर में दफ़न कर दिया|


कुल आयु व गुरु गद्दी का समय
(Shri Guru Nanak Dev Ji Total Age and Ascension to Heaven)


गुरु नानक देव जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) शरीर त्याग कर के संसार में 70 साल 5 महीने 7 दिन पातशाही करके असूज सुदी 10 संवत् 1539 करतारपुर में ज्योति ज्योत समाए| 

श्री गुरु नानक देव जी - जीवन परिचय गाय, भैंसे चारनी व खेत हरा करना खेती करनी खेती का नष्ट होना व गुरु जी का वैराग्य धारण करना

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