🙏 जीवन में कुछ पाना है तो झुकना होगा, कुएं में उतरने वाली बाल्टी झुकती है, तब ही पानी लेकर आती है| 🙏

अध्याय 171

महाभारत संस्कृत - उद्योगपर्व

1 भीष्म उवाच
ततॊ ऽहं भरतश्रेष्ठ मातरं वीरमातरम
अभिगम्यॊपसंगृह्य दाशेयीम इदम अब्रुवम

2 इमाः काशिपतेः कन्या मया निर्जित्य पार्थिवान
विचित्रवीर्यस्य कृते वीर्यशुल्का उपार्जिताः

3 ततॊ मूर्धन्य उपाघ्राय पर्यश्रुनयना नृप
आह सत्यवती हृष्टा दिष्ट्या पुत्र जितं तवया

4 सत्यवत्यास तव अनुमते विवाहे समुपस्थिते
उवाच वाक्यं सव्रीडा जयेष्ठा काशिपतेः सुता

5 भीष्म तवम असि धर्मज्ञः सर्वशास्त्रविशारदः
शरुत्वा च धर्म्यं वचनं मह्यं कर्तुम इहार्हसि

6 मया शाल्वपतिः पूर्वं मनसाभिवृतॊ वरः
तेन चास्मि वृता पूर्वं रहस्य अविदिते पितुः

7 कथं माम अन्यकामां तवं राजञ शास्त्रम अधीत्य वै
वासयेथा गृहे भीष्म कौरवः सन विशेषतः

8 एतद बुद्ध्या विनिश्चित्य मनसा भरतर्षभ
यत कषमं ते महाबाहॊ तद इहारब्धुम अर्हसि

9 स मां परतीक्षते वयक्तं शाल्वराजॊ विशां पते
कृपां कुरु महाबाहॊ मयि धर्मभृतां वर
तवं हि सत्यव्रतॊ वीर पृथिव्याम इति नः शरुतम

NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏