🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏

अध्याय 161

महाभारत संस्कृत - उद्योगपर्व

1 [स] उलूकस्य वचः शरुत्वा कुन्तीपुत्रॊ युधिष्ठिरः
सेनां निर्यापयाम आस धृष्टद्युम्नपुरॊगमाम

2 पदातिनीं नागवतीं रथिनीम अश्ववृन्दिनीम
चतुर्विध बलां भीमाम अकम्प्यां पृथिवीम इव

3 भीमसेनादिभिर गुप्तां सार्जुनैश च महारथैः
धृष्टद्युम्न वशां दुर्गां सागरस्तिमितॊपमाम

4 तस्यास तव अग्रे महेष्वासः पाञ्चाल्यॊ युद्धदुर्मदः
दरॊण परेप्सुर अनीकानि धृष्टद्युम्नः परकर्षति

5 यथाबलं यथॊत्साहं रथिनः समुपादिशत
अर्जुनं सूतपुत्राय भीमं दुर्यॊधनाय च

6 अश्वत्थाम्ने च नकुलं शैब्यं च कृतवर्मणे
सैन्धवाय च वार्ष्णेयं युयुधानम उपादिशत

7 शिखण्डिनं च भीष्माय परमुखे समकल्पयत
सहदेवं शकुनये चेकितानं शलाय च

8 धृष्टकेतुं च शल्याय गौतमायॊत्तमौजसम
दरौपदेयांश च पञ्चभ्यस तरिगर्तेभ्यः समादिशत

9 वृषसेनाय सौभद्रं शेषाणां च महीक्षिताम
समर्थं तं हि मेने वै पार्थाद अभ्यधिकं रणे

10 एवं विभज्य यॊधांस तान पृथक च सह चैव ह
जवाला वर्णॊ महेष्वासॊ दरॊणम अंशम अकल्पयत

11 धृष्टद्युम्नॊ महेष्वासः सेनापतिपतिस ततः
विधिवद वयूढ्य मेधावी युद्धाय धृतमानसः

12 यथादिष्टान्य अनीकानि पाण्डवानाम अयॊजयत
जयाय पाण्डुपुत्राणां यत्तस तस्थौ रणाजिरे

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

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