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अध्याय 41

महाभारत संस्कृत - आश्वमेधिकपर्व

1 [बर] य उत्पन्नॊ महान पूर्वम अहंकारः स उच्यते
अहम इत्य एव संभूतॊ दवितीयः सर्ग उच्यते

2 अहंकारश च भूतादिर वैकारिक इति समृतः
तेजसश चेतना धातुः परजा सर्गः परजापतिः

3 देवानां परभवॊ देवॊ मनसश च तरिलॊककृत
अहम इत्य एव तत सर्वम अभिमन्ता स उच्यते

4 अध्यात्मज्ञाननित्यानां मुनीनां भावितात्मनाम
सवाध्यायक्रतुसिद्धानाम एष लॊकः सनातनः

5 अहंकारेणाहरतॊ गुणान इमान; भूतादिर एवं सृजते स भूतकृत
वैकारिकः सर्वम इदं विचेष्टते; सवतेजसा रज्ड्जयते जगत तथा

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