70 – भेड़िया | Bhediya | Tilismi Kahaniya | Moral Stories
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि कुछ प्राणियों और उन की सेना ने सितारा के गांव के लोगों पर हमला कर दिया था। करमजीत और बाकी लोग उस की सेना को हरा तो देते हैं लेकिन अंत में सितारा की मां की
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि कुछ प्राणियों और उन की सेना ने सितारा के गांव के लोगों पर हमला कर दिया था। करमजीत और बाकी लोग उस की सेना को हरा तो देते हैं लेकिन अंत में सितारा की मां की
पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि करमजीत की चोटी ठीक हो गई है। वही जब अपना कार्य पूर्ण कर के सभी मित्र वापस लौट रहे होते हैं तो अचानक से सितारा कहीं गायब हो जाता है और वहीं उन सभी को रास्ते में
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा कि नारु नाम के एक व्यक्ति की जादुई टोपी उड़ कर सभी मित्रों के पास आ जाती है। लेकिन उस व्यक्ति को लगता है कि इन सभी ने ही उस की जादुई टोपी चुराई है। इसलिए वह करण
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि कर्ण और उस के सभी मित्र मिल कर करमजीत की चोटी ठीक करने के लिए एक व्यक्ति के पास गए हुए हैं लेकिन वहां पर चोटी ठीक होने के बजाय सब उल्टा ही हो जाता है।
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि करण और उस के बाकी मित्र सितारा की दुनिया में आ गए हैं। जहां पर सितारा का भी एक गांव और परिवार था। वहीं गाँव मे सभी मित्रों ने वीरू नाम के एक सांप को सितारा
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि सब कुछ ठीक हो चुका है। सुनहरी चिड़िया अब राजकुमारी चंदा बन गयी है। राजकुमारी चंदा अपने माता-पिता के साथ अपनी दुनिया में वापस चली गई है और वधिराज भी अपनी दुनिया में वापस चला गया
तो पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि राजकुमारी चंदा का श्राप टूट चुका है और उन्हें अपना मनुष्य रूप वापस प्राप्त हो गया है। लेकिन इतना बड़ा कार्य पूर्ण होने में साहसी करण और उस के मित्र के अलावा अन्य कई लोगों का
पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि उन की मदद करने वाली उस बूढी अम्मा की मौत हो चुकी थी। उस के बाद वहां पर बहुत बड़े-बड़े ओले भी बरसने लगते हैं , परेशानी पैदा करने वाले बड़े बड़े नेत्र जो उन का पीछा
पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि सभी दोस्त एक बूढी अम्मा के घर में रुके हुए थे और इसी दौरान एक नकाबपोश आदमी कर्मजीत पर हमला करता है। वहीं कोई बहरूपिया बूढी अम्मा का रूप ले कर उन सभी मित्रों पर हमला करता
पिछले एपिसोड में आप ने देखा था कि कर्ण और उस के मित्रों की सहायता से शीतल अपनी बहन वंदना का श्राप तुड़वा देती है। यह काम थोड़ा मुश्किल तो था लेकिन सभी की बहादुरी और चतुराई से यह कार्य आसानी से सफल हो गया