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पंडित रामशंकर यजमानी करके दूसरे गाँव से अपने घर कि ओर लौट रहे थे| वे बहुत प्रसन्न थे क्योंकि दक्षिणा में उन्हें बकरी मिली थी| पंडित रामशंकर की ख्याति आसपास के गाँवों में फैली हुई थी|

एक बार की बात है| काशी (वाराणसी) की घटना है| एक बार स्वामी विवेकानंद काशी की एक तंग गली से गुजर रहे थे कि बंदरों के एक समूह ने उनका सामान छीन लिया| बंदर गुर्रायें तो स्वामी जी घबरा गए| वह कुछ चिल्लाकर पीछे हटने लगे कि बंदर उन पर टूट पड़े, उनके कपड़े फाड़ दिए| स्वामी जी भागने लगे तो बंदर किलकारियाँ मारते उनका पीछा करने लगे|

जन्म:
हनुमान जी का जन्म त्रेता युग मे अंजना(एक नारी वानर) के पुत्र के रूप मे हुआ था। अंजना असल मे पुन्जिकस्थला नाम की एक अप्सरा थीं, मगर एक शाप के कारण उन्हें नारी वानर के रूप मे धरती पे जन्म लेना पडा। उस शाप का प्रभाव शिव के अन्श को जन्म देने के बाद ही समाप्त होना था।