ऐतिहासिक गुरूद्वारे (10)

गुरुद्वारा दमदमा साहिब

श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी व बहादुर शाह उस ऐसिहासिक स्थान पर मिले जो दमदमे के नाम से प्रसिद्ध है| बादशाह हुमायु के मकबरे से बाहर खड़े हुए थे| यही गुरु साहिब ने बादशाह को उन फौजदार अफसरों व पहाड़ी राजाओं के नाम दिए, जिन्होंने साहिबजादों के ऊपर अत्याचार किए|…

गुरुद्वारा मोतीबाग साहिब

श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी व 40 सिंह जब चमकौर की गड़ी पहुंचे तो उनकी मुगलों की फौजों व हिन्दू राजाओं से टक्कर हो गई| जिसमें उनके दो सुपुत्र बाबा अजीत सिंह व बाबा जुझार सिंह लड़ते-लड़ते शहादत प्राप्त कर गए| श्री गुरु गोबिन्द सिंह व दो साथी मुगलई फौजों…

गुरुद्वारा मजनूं टिल्ला साहिब

यमुना नदी के किनारे एक टिल्ले के ऊपर एकांत/स्थान पर मुस्लमान फकीर रहता था| घोर तपस्या व अराधना के कारण उसका शरीर कमजोर हो गया| प्रभु के नूर का यह आशिक, इश्क हकीकी की मंजिल का सफर तय करते इतना दुर्बल व व्याकुल हो गया कि उसका नाम मजनू फकीर…

गुरुद्वारा बंगला साहिब

सातवें गुरु श्री हरिराये जी ने जोति-जोत समाने से पहले बालक श्री गुरु हरिकृष्ण जी को गद्दी पर बिठा दिया| राम राये जी अपने छोटे भाई की गद्दी मिलने पर लड़प उठे| उन्होंने औरंगजेब को प्रेरित करके बालक गुरु श्री हरिकृष्ण जी को दिल्ली बुलाने की मांग की ताकि उसकी…

गुरुद्वारा सीस गंज साहिब

'हिन्द की चादर' श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी| बादशाह औरंगजेब के दिमाग में किसी ने यह बिठा दिया कि अगर भारत के धार्मिक केन्द्र के ब्राह्मण मुस्लमान बन गए तो छोटी जातियों के मुस्लमान खुद-ब-खुद मुस्लमान बन जाएंगे|…

गुरुद्वारा माता सुन्दरी जी

माता सुन्दरी जी एंवम माता साहिब देवां जी ने दिल्ली के हालात को देखते हुए यहाँ रहना ठीक न समझा| जयपुर के राजे ने इनके रहने की व्यवस्था मथुरा में कर दी|

गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब

श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी से धरती-अंबर काँप उठे| दुनिया का चप्पा-चप्पा शहादत के आगे नतमस्तक था जिसने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपनी शहीदी दे दी|

गुरुद्वारा नानक प्याऊ साहिब

श्री गुरु नानक देव जी का जब दिल्ली आगमन हुआ तो वह जी.टी. रोड के ऊपर सब्जी मण्डी के बाहर एक बाग में रुके| यह स्थान बाबा जी के चरण पड़ने के कारण तीर्थ स्थान बन गया| यह स्थान अब तक गुरुद्वारा नानक प्याऊ के नाम से प्रसिद्ध है| यहां…

गुरुद्वारा बाला साहिब

श्री गुरु हरिकृष्ण जी का 'दुःख-भंजनी' प्रभाव ऐसा पड़ा कि दिल्ली में लोग एक तूफान की भांति भारी संख्या में पहुंचकर गुरु जी की चरण-शरण प्राप्त करने आते| मुस्लमान उन्हें "बाला पीर" व हिन्द बाला गुरु कहते| शहर में चेचक व हैजे की बिमारी फैल गई|

कुचा दिलवाली सिंघा

जब श्री गुरु गोबिन्द जी ने दक्षिण नांदेड में चौथा तख्त स्थापित करने का फैसला किया तो उन्होंने माता सुन्दरी जी (माता सुन्दर कौर) और माता साहिब देवां (माता साहिब कौर जी) को दिल्ली भेज दिया|
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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