श्री गुरु तेग बहादर जी गुरु गद्दी मिलना

  • font size
  • 25766 Views



जब श्री गुरु हरिगोबिंद जी (Shri Guru Hargobind Ji) ने गुरु गद्दी अपने छोटे पोत्र श्री हरि राय जी (Shri Guru Harrai Ji) को दी तथ स्वंय ज्योति-ज्योत समाने का निर्णय कर लिया तो माता नानकी जी ने आपको हाथ जोड़कर विनती की कि महाराज! मेरे पुत्र जो कि संत स्वरुप हैं, उनकी ओर आपने ध्यान नहीं दिया| उनका निर्वाह किस तरह होगा?

श्री गुरु तेग बहादर जी गुरु गद्दी मिलना सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

गुरु हरि गोबिंद जी ने जब अपनी पत्नी की यह बात सुनी तो उन्होंने वचन किया कि आप इस समय अपने पुत्र श्री तेग बहादर जी को लेकर अपने मायके बकाले गाँव चले जाओ| समय पर इन्ही को गुरु गद्दी प्राप्त हो जायेगी|

गुरु जी का वचन मानकर माता नानकी जी श्री (गुरु) तेग बहादर जी को लेकर बकाले आ गई| वहाँ आकर श्री तेग बहादर जी अलग बैठकर भजन सिमरन करते रहते| वह किसी भी काम काज की ओर अपना ध्यान न देते| इस तरह ऐसी तप साधना में आपजी ने 21-22 साल व्यतीत किए| 

आठवें गुरु श्री हरि कृष्ण जी (Shri Guru Har Krishan Ji) ने दिल्ली में ज्योति-ज्योत समाने से पहले पांच पैसे और नारियल थाली में रख कर और उसको माथा टेक कर वचन किया था कि "गुरु बाबा बकाले"| जब यह वचन सारे सिख सेवकों में प्रकट हो गया तो श्री तेग बहादर जी (Shri Guru Tek Bahadar Ji) कोष्ठ में समाधि लगाकर छुप कर बैठ गए| 15 दिनों के बाद जब आपकी समाधि खुली तो माता जी ने कहा कि बेटा! आप संगत में प्रकट होकर दर्शन दो और उनकी मनोकामना पूर्ण करो| पर गुरु जी अपनी लिव जोड़कर बैठे रहे| 

दूसरी ओर धीरमल जी गुरु गद्दी लगाकर बकाले आकर गुरु बनकर बैठ गए| उसने जगह जगह यह प्रचार किया कि मैं ही गुरु हूँ| इनको देखकर और सोढ भी यहाँ डेरा लगाकर बैठ गए| यह आपा धापी देखकर श्रधालु सिख विचलित से होने लगे| 

मखन शाह लुभाना जिला जेहलम गाँव टांडा में रहता था, जो कि देश विदेश में व्यपार का काम करता था| एक बार वह किसी विदेश से जहाज का माल लादकर समुन्द्र के रस्ते देश को आ रहा था| तूफान के कारण जहाज रेतीली जिल्हण में फस गया| कोई चारा ना चलता देखकर उसने गुरु जी से हाथ जोड़कर अरदास की कि सच्चे पातशाह! मैं आपके घर का सेवक हूँ मेरी सहायता करके पार लगाओ| मैं आपके आगे पांच सौ मोहरे भेंट करूँगा|

अपने भगत के हृदय की पुकार सुनकर अन्तर्यामी गुरु ने अपना कंधा देकर मखन शाह का डूबता जहाज पार लगा दिया| और अपने सेवक की प्रार्थना कबूल की| 

जहाज पार लगाकर मखन शाह ने सारा माल बेच दिया| तो वह अपनी मनौत पूरी करने के लिए पंजाब आया| पंजाब आकर उसको पता लगा इस समय गुरु बकाले में निवास करते हें| तब उसने यह विचार किया कि अन्तर्यामी गुरु स्वंय ही मुझसे पांच सौ मोहरे माँगेगे| बकाले जाकर उसने देखा कि वहाँ कई गुरु बैठे हैं| उसने हर एक गद्दी लगाकर बैठे गुरु के आगे दो दो मोहरे रखकर माथा टेका| पर किसी भी गुरु ने पांच सौ मोहरे पूरी ना माँगी| फिर वह सच्चे गुरु को पूछता-पूछता श्री गुरु तेग बहादर जी के पास पहुँच गया| आप जी कोष्ठ में बैठे थे| आपने माता जी से पूछ कर कोष्ठ में जाकर जब दो मोहरे रखकर माथा टेका तो आपने हँस कर कहा - मखन शाह! तू पांच सौ मोहरे गुरु घर की मनौत मानकर अब दो ही मोहरे रखता है| तुम्हें गुरु घर की मनौत पूरी करनी चाहिए|

गुरु जी के यह वचन सुनकर मखन शाह को यकीन आ गया कि यही सच्चे गुरु हैं| उसने पांच सौ मोहरे गुरु जी के आगे भेंट कर दी और खुशी से कोठे पर चढ़कर ऊँची-ऊँची कपड़ा फेरकर कहा, "गुरु लाधो रे, गुरु लाधो रे|"

इस तरह जब सबको पता लग गया कि बकाले वाले बाबा श्री गुरु तेग बहादर जी (Shri Guru Tek Bahadar Ji) हैं तो संगत उमड़-उमड़ कर आपके दर्शन करने के लिए आने लगी| मखन शाह ने अपनी वार्ता सबको सुनाई कि सच्चे गुरु की परख किस तरह हुई है| यह वार्ता सुनकर श्रद्धालु सिख सेवकों ने गुरु जी के आगे भेंट रखकर माथा टेका| 

दूसरे दिन माता जी तथा भाई गढ़ीये से सलाह करके मखन शाह ने चंदोआ और नीचे दरियाँ बिछाई और गुरु जी के दीवान के लिए तैयारी करके गुरु जी को गद्दी लगवाकर बिठा दिया| गुरु जी का दीवान में प्रगट होकर बैठना सुनकर सिख सेवक उमड़-उमड़ कर दर्शन करने को आए| आए हुए सभी श्रदालुओं ने यथा शक्ति भेंट अर्पण की और गुरु जी को माथा टेका| 

धीरमल ने इस तरह संगत की आवाजाई और गुरु जी भेंट अर्पण होते देखकर आदमी भेजकर सारा चढ़ावा जो संगत ने भेंट किया था उठवा लिया| इस समय शीहें मसंद ने गुरु जी को मारने के लिए गोली भी चलाई| परन्तु वह खाली गई और गुरु जी बच गए| 

मखन शाह अपने साथ आदमी लेकर धीरमल के डेरे से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बीड़ के साथ-साथ डेरे से सब कुछ ले आया जो धीरमल के आदमी लूट कर ले गए थे| परन्तु गुरु जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब (Shri Guru Granth Sahib) की बीड़ के अतिरिक्त धीरमल को वापिस करा दिया| इस तरह अपना आदर ना होता देखकर अपना सामान उठवाकर करतारपुर चला गया| 

श्री गुरु तेग बहादर जी - जीवन परिचय श्री गुरु तेग बहादर जी की शहीदी एक पीर का भ्रम निवृत करना खारा कूआँ मीठा करना

Please write your thoughts or suggestions in comment box given below. This will help us to make this portal better.

SpiritualWorld.co.in, Administrator
अपनी आप बीती, आध्यात्मिक या शिक्षाप्रद कहानी को अपने नाम के साथ इस पोर्टल में सम्मलित करने हेतु हमें ई-मेल करें । (Email your story with your name, city, state & country to: This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. ) Submit your story to publish in this portal

Media

 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

Disclaimer

 

इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
Special Thanks to Dr. Rajni Hans, Ms. Karuna Miglani, Ms. Anisha Arora, Mr. Ashish Hans, Ms. Mini Chhabra & Ms. Ginny Chhabra for their contribution in development of this spiritual website. Audio & Video Production: VISIONHUNT (info@visionhunt.in) | Privacy Policy | Media Partner | Wedding Marketplace

Vulnerability Scanner

Connect With Us