13 Jan 2017 
लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं

लोहड़ी

की हार्दिक शुभकामनाएं

श्री गुरु राम दास जी - साखियाँ (18)

भाई आदम को पुत्र का वरदान

भाई आदम जिला फिरोजपुर गाँव बिन्जू का रहने वाला था| वह पीरो-फकीरों की खूब सेवा करता परन्तु उसकी मुराद कही पूरी न हुई| उसके घर में पुत्र पैदा न हुआ| एक दिन उसे गुरु का सिख मिला| आदम ने उसे श्रधा सहित पानी पिलाया और प्रार्थना की कि मेरे घर…

एक तपस्वी का भ्रम दूर करना

श्री गुरु रामदास जी प्रभु प्यार में सदैव मगन रहते| अनेकों ही सिख आप जी से नामदान लेकर गुरु-२ जपते थे| गुरु सिखी कि ऐसी रीति देख कर एक इर्शालु तपस्वी आपके पास आया| गुरु जी ने उसे सत्कार देकर अपने पास बिठाया और पूछा! आओ तपस्वी जी किस तरह…

सिद्धों से चर्चा

एक बार सिद्ध योगियों का समूह भ्रमण करता गुरु के चक्क दर्शन करने के लिए आया| आदेश आदेश करते गुरु जी के पास आकर बैठ गया|

पिंगले और रजनी का प्रसंग

दुनीचंद क्षत्री जो कि पट्टी नगर में रहता था उसकी पांच बेटियां थी| सबसे छोटी प्रभु पर भरोसा करने वाली थी| एक दिन दुनीचंद ने अपनी बेटियों से पूछा कि आप किसका दिया हुआ खाती व पहनती हो| रजनी के बिना सबने यही कहा कि पिताजी हम आपका दिया ही…

भाई हिन्दाल को वरदान

भाई हिन्दाल गुरु घर में बड़ी श्रधा के साथ आता मांडने की सेवा करता था| अचानक ही गुरूजी लंगर में आए| उस समय भाई हिन्दाल जी आटा मांडने की सेवा कर रहें थे|

श्री रामदास जी का गायत्री मन्त्र पढ़ना

श्री गुरु अमरदास जी ने अकबर बादशाह के बुलावे पर बाबा बुड्ढा जी व बुद्धिमान सिक्खों के साथ सलाह करके श्री रामदास जी को लाहौर जाने के लिए कहा|

सिद्धों को सही योग की दिशा देनी

एक बार योगियों का समूह गुरु जी के दर्शन के लिए गुरु के चक्क आया| वह आदेस-आदेस करके गुरु जी के पास बैठ गए| वे गुरु जी की परीक्षा लेने लग गए|

श्री जेठा जी का श्री गुरु अमरदास के प्रति निष्काम प्रेम

बाऊली का निर्माण कार्य चल रहा था| इसकी कार सेवा में बहुत सिक्ख सेवक काम में लग गए| इन्हीं के साथ श्री (गुरु) रामदास जी भी टोकरी उठा कर मिट्टी ढोते रहते|

सेवा का महत्व

एक दिन सत्संग दीवान की समाप्ति के पश्चात सिक्ख इकट्ठे होकर गुरु जी के पास आए| वे कहने लगे कि महाराज! हमारा जन्म किस प्रकार सफल हो सकता है, कोई उपदेश दें|

गुरु के चक्क व गुरु के महल

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी ने श्री (गुरु) रामदास जी को अपने पास बिठाया और कहने लगे - हे सुपुत्र! अब आप रामदास परिवार वाले हो गए हो|

श्री रामदास जी का अपना घट तोड़ कर धर्मशाला बनानी

श्री गुरु रामदास ने आषाढ़ संवत् १६३४ को अमृत सरोवर की खुदाई का कार्य जोर-शोर से आरम्भ करा दिया| श्री गुरु अमरदास जी ने यह समझाया था कि यहां अमृत सरोवर तीर्थ प्रगट होगा| दुनीचन्द को अपने पिंगले जवाई के जब आरोग्य होने की खबर मिली| वह बड़े सत्कर के…

मईया व नईया खुल्लर को उपदेश

एक दिन गुरु साहिब जी का दीवान सजा था| गुरु जी स्वयं भी उसमें विराजमान थे| सभी गुरु जी से अपनी शंकाओं का निवारण कर रहे थे|

श्री गुरु रामदास जी का भेंट देना

अकबर बादशाह लाहौर से वापिस आ रहे थे| वापिस आते हुए दिल्ली को जाते हुए गोइंदवाल पड़ाव किया| अकबर बादशाह यह देखकर दंग रह गए कि गुरु जी का अटूट लंगर चल रहा है|

महानन्द व बिधी चन्द को उपदेश

एक दिन भाई महानंद व बिधी चन्द गुरु जी के पास आए| उस समय गुरु साहिब के दोनों समय कथा कीर्तन और उपदेश के दीवान लगते थे|

श्री गुरु रामदास जी की दास भावना

एक दिन श्री चन्द जी गुरु रामदास जी के पास आए| ये श्री गुरु नानक साहिब के बड़े सुपुत्र थे| वे गुरु जी की महिमा सुनकर अपने गोदड़िए के कंधे पर गुरु के चक आए|

अमृत तीर्थ की जिम्मेदारी

एक दिन श्री रामदास जी को गुरु अमरदास जी ने अपने पास बिठा लिया व बताया कि सतयुग में इक्ष्वाकु जी, जो अयोध्या के पहले राजे थे उन्होंने इस स्थान पर यज्ञ कराया था|

उद्धार का रास्ता बताना

गुरु साहिब की हजूरी में दीवान लगा था| सभी सिक्ख वहीं उपस्थित थे| तभी धरमदास, डूगरदास, दीपा, जेठा, संसार व बालू तीर्थ ने गुरु जी से प्रार्थना की कि महाराज! हमारा उद्धार किस प्रकार सम्भव है? गुरु जी कहने लगे कि पहले अपने मन का अहंम भाव त्यागो|

सिक्खों को उपदेश देना

एक दिन गुरु जी का दीवान लगा था| सारी सिक्ख संगत बैठकर गुरु जी का उपदेश सुन रही थी|
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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