21 Feb 2017 
महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानंद सरस्वती के जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं|

→ स्वामी दयानन्द सरस्वती

→ चरित्र का निर्माण

श्री गुरु अमर दास जी - साखियाँ (25)

पदम रेखा बताने वाले पंडित को वरदान

हरिद्वार से २०वी तीर्थ यात्रा करके पंडित दुर्गा प्रसाद ने जब गुरु अमरदास जी के पाँव में पदम देखकर कहा था कि आपके शीश पर जल्दी ही छत्र झूलेगा, जब उसने यह सुना कि आप गुरुगद्दी पर आसीन हुए है तो अपना मुँह माँगा वरदान लेने के लिए गुरु अमरदास…

काबुल की एक पति-व्रता माई

बाउली की कार सेवा में भाग लेने के लिए सिख बड़े जोश के साथ दूर दूर से आने लगे| इस तरह काबुल में एक प्रेमी सिख की पति व्रता स्त्री को पता लगा|

भाई जग्गे को निहाल करना

एक दिन भाई जग्गा गुरु जी के दर्शन करने आया| उसने प्राथना कि सच्चे पादशाह जी मुझे एक दिन जोगी ने बताया कि कल्याण तभी हो सकता है अगर घर - बाहर, स्त्री - पुत्र आदि का त्याग किया जाये जो कि बन्धन हैं|

सावण मल के अहंकार को तोड़ना

गुरु अमरदास जी ने सावण मल को लकड़ी की जरूरत पूरी होने के पश्चात गोइंदवाल वापिस बुलाया| परन्तु सावण मल मन ही मन सोचने लगा अगर मैं चला गया तो गुरु जी मुझसे वह रुमाल ले लेंगे जिससे मृत राजकुमार जीवित हुआ था| इससे मेरी कोई मान्यता नहीं रहेगी| सारी…

लंगड़े की टांग ठीक करनी

तलवंडी का रहने वाला एक लंगड़ा क्षत्री सिख गुरु जी के भोजन के लिए बड़ी श्रधा के साथ दही लाता था| एक दिन रास्ते में गाँव के चौधरी ने उसकी बैसाखी छीन ली और मजाक उड़ाने लगा कि रोज दुखी होकर अपने गुरु के लिए दही लेकर जाता है, तेरा…

शेखों को उनके किए हुए फल

मुग़ल बादशाह के समय दिल्ली व लाहौर के रास्ते में व्यास नदी से पार होने के लिए गोईंद्वाल का पत्तन बहुत प्रसिद्ध था| बड़ी-२ सराए शाही सेनओं के लिए यहाँ बनी हुई थी जिसके कारण यह रौनक रहती थी| यह व्यापर पेशा कुछ शेखों के घर भी थे जो कि…

भक्ति के प्रकार

भाई खानू, मईया और गोबिंद गुरु अमरदास जी के पास आए| इन्होने प्रार्थना की हमें भक्ति का उपदेश दो ताकि हमारा कल्याण हो जाये| गुरु जी ने कहा भक्ति तीन प्रकार की होतो है-नवधा, प्रेमा और परा|

रानी का पागलपन दूर करना

सावण मल की प्रेरणा से हरीपुर के राजा व रानी गुरु अमरदास जी के दर्शन करने के लिए गोइंदवाल आए| सावण मल ने माथा टेककर गुरु जी से कहा कि महाराज! हरीपुर के राजा व रानी आपके दर्शन करने के लिए आए हैं|

एक माई का पुत्र जीवित करना

एक विधवा माई जो की गोइंदवाल में रहती थी उसका पुत्र बुखार से मर गया| वह रात्रि से समय ऊँची ऊँची रोने लगी| उसका ऐसा विर्लाप सुनकर गुरु अमरदास जी माई के घर गये और अपने चरण बच्चे के माथे पर धरे| गुरु जी के चरण माथे पर लगते ही…

मृत राजकुमार को जीवित करना

एक दिन बल्लू आदि सिखो ने गुरु जी से बिनती की महाराज! अनेक जातियों के लोग यहाँ दर्शन करने आतें हैं पर उनके रहने के लिए कोई खुला स्थान नहीं है, इसलिए कोई खुला माकन बनाना चाहिए|

बीबी भानी को वरदान देना

श्री गुरु अमरदास जी की सुपुत्री बीबी भानी जी अपने पिता की बहुत सेवा करती थी| प्रात:काल उठकर गर्म पानी करना व फिर पिताजी को स्नान कराना|

मुक्ति का रहस्य

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी के पास खान छुरा बेगी पासी नंद सूदना झंडा आदि कुछ सिक्ख इकट्ठे होकर गुरु जी के पास पहुंचे|

अकबर की श्री गुरु अमरदास जी को भेंट

अकबर बादशाह लाहौर से वापिस आ रहे थे| वापिस आते हुए दिल्ली को जाते हुए गोइंदवाल पड़ाव किया| अकबर बादशाह यह देखकर दंग रह गए कि गुरु जी का अटूट लंगर चल रहा है|

नाम-सिमरण का उपदेश

डल्ला गांव के कुछ सिक्ख गुरु जी के पास आए| उनमें से उगरसैन, दीपा व रामू गौरी गुरु जी के पास आकर बैठ गए|

हवन कुंड के स्थान पर अमृत तीर्थ

एक दिन श्री रामदास जी को गुरु अमरदास जी ने अपने पास बिठा लिया व बताया कि सतयुग में इक्ष्वाकु जी, जो अयोध्या के पहले राजे थे उन्होंने इस स्थान पर यज्ञ कराया था|

जेठा जी को लाहौर भेजना

श्री गुरु अमरदास जी ने अकबर बादशाह के बुलावे पर बाबा बुड्ढा जी व बुद्धिमान सिक्खों के साथ सलाह करके श्री रामदास जी को लाहौर जाने के लिए कहा|

ब्राह्मण को उपदेश

एक दिन श्री गुरु नानक देव जी के पास एक ब्राह्मण जिनका नाम पांधा बूला था, हाजिर हुआ| उसने गुरु जी से प्रार्थना की कि महाराज! मुझे ब्राह्मण जानकार मुझ से कोई भी सेवा नहीं कराता|

श्री गुरु अमरदास जी का हुक्मनामा जारी करना

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी के समक्ष भाई पारो ने प्रार्थना की कि महाराज! आप जी के दर्शन करने के लिए संगत दूर-दूर से आती है|

श्री रामदास जी को वरदान

बाऊली का निर्माण कार्य चल रहा था| इसकी कार सेवा में बहुत सिक्ख सेवक काम में लग गए| इन्हीं के साथ श्री (गुरु) रामदास जी भी टोकरी उठा कर मिट्टी ढोते रहते|

श्री जेठा जी को आदेश

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी ने श्री (गुरु) रामदास जी को अपने पास बिठाया और कहने लगे - हे सुपुत्र! अब आप रामदास परिवार वाले हो गए हो|

पृथी मल को निहाल करना

एक बार कुछ सिक्ख गुरु जी को बड़े प्रेमपूर्वक गाँव में ले गए| वहां पृथी मल्ल आप जी के दर्शन करने के लिए पहुंचे|

श्री गुरु अमरदास जी का बाऊली का निर्माण कराना

श्री गुरु अमरदास जी संगतो के लिए बाऊली बनाना चाहते थे| एक दिन आपने भाई पारों से कहने लगे कि संगतों के स्नान के लिए बाऊली बनानी है|

सिक्खों को उपदेश

एक दिन डल्ले गांव के सिक्ख एकत्रित होकर गुरु जी के पास आ गए| उन्हें पता चला की गुरु जी वापिस गोइंदवाल जाने को तैयार है वे इकट्ठे होकर दर्शन के लिए आ गए|

गुरु जी का डल्ले गांव में उपदेश

गुरु जी अपने आसन पर विराजमान थे| कुछ सिक्ख गुरु जी के दर्शन करने के लिए पहुंचे|

भाई मल्ल को उपदेश देना

एक बार एक सिक्ख जिसका नाम भाई मल्ल था| वह गुरु जी के पास आया| उसने गुरु जी से पूछा, महाराज! मेरा मन भटकन में रहता है|
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

नोट: इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
Special Thanks to Dr. Rajni Hans, Ms. Karuna Miglani, Ms. Anisha Arora, Mr. Ashish Hans, Ms. Mini Chhabra & Ms. Ginny Chhabra for their contribution in development of this spiritual website. Audio & Video Production: VISIONHUNT (info@visionhunt.in) | Privacy Policy | Media Partner

Vulnerability Scanner