जेठा जी को लाहौर भेजना

श्री गुरु अमरदास जी ने अकबर बादशाह के बुलावे पर बाबा बुड्ढा जी व बुद्धिमान सिक्खों के साथ सलाह करके श्री रामदास जी को लाहौर जाने के लिए कहा|

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हवन कुंड के स्थान पर अमृत तीर्थ

एक दिन श्री रामदास जी को गुरु अमरदास जी ने अपने पास बिठा लिया व बताया कि सतयुग में इक्ष्वाकु जी, जो अयोध्या के पहले राजे थे उन्होंने इस स्थान पर यज्ञ कराया था|

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अकबर की श्री गुरु अमरदास जी को भेंट

अकबर बादशाह लाहौर से वापिस आ रहे थे| वापिस आते हुए दिल्ली को जाते हुए गोइंदवाल पड़ाव किया| अकबर बादशाह यह देखकर दंग रह गए कि गुरु जी का अटूट लंगर चल रहा है|

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श्री जेठा जी को आदेश

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी ने श्री (गुरु) रामदास जी को अपने पास बिठाया और कहने लगे - हे सुपुत्र! अब आप रामदास परिवार वाले हो गए हो|

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बीबी भानी को वरदान देना

श्री गुरु अमरदास जी की सुपुत्री बीबी भानी जी अपने पिता की बहुत सेवा करती थी| प्रात:काल उठकर गर्म पानी करना व फिर पिताजी को स्नान कराना|

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श्री रामदास जी को वरदान

बाऊली का निर्माण कार्य चल रहा था| इसकी कार सेवा में बहुत सिक्ख सेवक काम में लग गए| इन्हीं के साथ श्री (गुरु) रामदास जी भी टोकरी उठा कर मिट्टी ढोते रहते|

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सिक्खों को उपदेश

एक दिन डल्ले गांव के सिक्ख एकत्रित होकर गुरु जी के पास आ गए| उन्हें पता चला की गुरु जी वापिस गोइंदवाल जाने को तैयार है वे इकट्ठे होकर दर्शन के लिए आ गए|

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ब्राह्मण को उपदेश

एक दिन श्री गुरु नानक देव जी के पास एक ब्राह्मण जिनका नाम पांधा बूला था, हाजिर हुआ| उसने गुरु जी से प्रार्थना की कि महाराज! मुझे ब्राह्मण जानकार मुझ से कोई भी सेवा नहीं कराता|

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मुक्ति का रहस्य

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी के पास खान छुरा बेगी पासी नंद सूदना झंडा आदि कुछ सिक्ख इकट्ठे होकर गुरु जी के पास पहुंचे|

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गुरु जी का डल्ले गांव में उपदेश

गुरु जी अपने आसन पर विराजमान थे| कुछ सिक्ख गुरु जी के दर्शन करने के लिए पहुंचे|

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नाम-सिमरण का उपदेश

डल्ला गांव के कुछ सिक्ख गुरु जी के पास आए| उनमें से उगरसैन, दीपा व रामू गौरी गुरु जी के पास आकर बैठ गए|

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भाई मल्ल को उपदेश देना

एक बार एक सिक्ख जिसका नाम भाई मल्ल था| वह गुरु जी के पास आया| उसने गुरु जी से पूछा, महाराज! मेरा मन भटकन में रहता है|

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पृथी मल को निहाल करना

एक बार कुछ सिक्ख गुरु जी को बड़े प्रेमपूर्वक गाँव में ले गए| वहां पृथी मल्ल आप जी के दर्शन करने के लिए पहुंचे|

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श्री गुरु अमरदास जी का बाऊली का निर्माण कराना

श्री गुरु अमरदास जी संगतो के लिए बाऊली बनाना चाहते थे| एक दिन आपने भाई पारों से कहने लगे कि संगतों के स्नान के लिए बाऊली बनानी है|

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श्री गुरु अमरदास जी का हुक्मनामा जारी करना

एक दिन श्री गुरु अमरदास जी के समक्ष भाई पारो ने प्रार्थना की कि महाराज! आप जी के दर्शन करने के लिए संगत दूर-दूर से आती है|

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श्री गुरु अमर दास जी - जीवन परिचय

श्री गुरु अमरदास जी (Shri Guru Amardas Ji) तेज भाज भल्ले क्षत्री के घर माता सुलखणी जी के उदर से वैशाख सुदी १४ संवत १५३६ को गाँव बासरके परगना झबाल में में पैदा हुए| 

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श्री गुरु अमर दास जी - गुरु गद्दी मिलना

श्री गुरु अंगद देव जी (Shri Guru Angad Dev Ji) के पास आकर जब कुछ दिन बीत गए तो आप ने भाई बुड्डा जी से आज्ञा लेकर और सिक्खों की तरह गुरुघर की सेवा में लग गए| आप सुबह उठकर गुरु जी के लिए जल की गागरे लाकर स्नान कराते| फिर कपड़े धोकर एकांत में बैठकर गुरु जी का ध्यान करते|

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श्री गुरु अमर दास जी ज्योति - ज्योत समाना

अपने अंतिम समय को नजदीक अनुभव करके श्री गुरु अमरदास जी (Shri Guru Amardas Ji) ने गुरुगद्दी का तिलक श्री रामदास जी (Shri Guru Ramdas Ji) को देकर सब संगत को आप जी ने उनके चरणी लगाया| इसके पश्चात् परिवार व सिखों को हुक्म मानने का उपदेश दिया जो बाबा सुन्दर जी, बाबा नन्द के पोत्र ने इसका वर्णन करके श्री गुरु अर्जुन देव जी को सुनाया-

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मृत राजकुमार को जीवित करना

एक दिन बल्लू आदि सिखो ने गुरु जी से बिनती की महाराज! अनेक जातियों के लोग यहाँ दर्शन करने आतें हैं पर उनके रहने के लिए कोई खुला स्थान नहीं है, इसलिए कोई खुला माकन बनाना चाहिए|

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सावण मल के अहंकार को तोड़ना

गुरु अमरदास जी ने सावण मल को लकड़ी की जरूरत पूरी होने के पश्चात गोइंदवाल वापिस बुलाया| परन्तु सावण मल मन ही मन सोचने लगा अगर मैं चला गया तो गुरु जी मुझसे वह रुमाल ले लेंगे जिससे मृत राजकुमार जीवित हुआ था| इससे मेरी कोई मान्यता नहीं रहेगी| सारी शक्ति वापिस चली जायेगी|

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