श्री गुरु नानक देव जी - साखियाँ (62)

मक्के का काबा फेरना

मक्के में मुसलमानों का एक प्रसिद्ध पूजा स्थान है जिसे काबा कहते है| गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) रात के समय काबे की तरफ विराज गए तब जिओन ने गुस्से में आकर गुरु जी से कहा कि तू कौन काफ़िर है जो खुदा के घर की तरफ पैर…

मलक भागो का ब्रह्म भोज व उसको उपदेश

मलक भागो ने ब्रह्म भोज करके सभ खत्रियों, ब्राह्मणों और साधुओं, फकीरों व नगर वासियों को बुलाया| उसने यह निमंत्रण गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) को भी दिया| पर गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) ने इस भोज में आने को मना कर दिया| बार -२ बुलाने…

मीठा रीठा

जब गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) पूरब दिशा कि तरफ बनारस जा रहे थे तो रास्ते में मरदाने ने कहा महाराज! आप मुझे जंगल पहाडों में ही घुमाए जा रहे हो, मुझे बहुत भूख लगी है| अगर कुछ खाने को मिल जाये तो कुछ खाकर चलने के लायक…

नवाब व काजी के साथ नमाज पढ़ने का कौतक

गुरु जी के बचन, "ना कोई हिंदू न मुसलमान" को जब काजी ने सुना तो उसने गुरु जी से इसका भाव पूछा| गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) ने कहा इस समय अपने धरम के अनुसार चलने वाला ना कोई सच्चा हिंदू है ना ही कोई अपने दीन मजहब…

हसन अब्दाल - वली कंधारी का अहंकार तोड़ना (पंजा साहिब)

गुरु जी होती मरदान और नौशहरे से होते हुआ हसन अब्दाल से बहार पहाड़ी के नीचे आकर बैठ गए| उस पहाड़ी पर एक वली कंधारी रहता था जिसे अपनी करामातो पर बहुत अहंकार था| इसके साथ की पहाड़ी पर ही पानी का एक चश्मा निकलता था| गुरु जी ने उसका…

गाय, भैंसे चारनी व खेत हरा करना

गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) को चुपचाप व बिना किसे काम के घर में लेटे रहते देख महिता जी ने उन्हें किसे काम धंधे में लगाने कि सोची| पिता का कहना मान कर अगले ही दिन गुरु जी गाये भेसों को चराने ले गए| तीन चार दिन तो…

कलयुग से वार्तालाप

गुरु जी मरदाने के साथ बैठकर शब्द कीर्तन कर रहे थे तो अचानक अँधेरी आनी शुरू हो गई, जिसका गुबार पुरे आकाश में फ़ैल गया| इस भयानक अँधेरी में भयानक सूरत नजर आनी शुरू हो गई, जिसका सिर आकाश के साथ व पैर पाताल के साथ के साथ थे| मरदाना…

सच्चा सौदा करना

एक दिन महिता जी ने गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) को 20 रुपए देकर सच्चा सौदा करके लाने को कहा तथा भाई बाले को भी साथ भेज दिया| गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) पिता जी को सति बचन कह कर 20 रूपए लेकर तथा भाई बाले…

साँप का छाया देना

गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) अब रोजाना ही पशुओं को जंगल जूह में ले जाते| एक दिन वैसाख के महीने में दुपहर के समय पशुओं को छाओं के नीचे बिठा कर गुरु जी लेट गए| सूरज के ढलने के साथ वृक्ष कि छाया भी ढलने लगी| आप के…

वृक्ष की छाया खड़ी करनी

एक दिन दुपहर ढलने के समय गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) पेड़ की छाया के नीचे चादर बिछा कर लेट गए| उस वक्त सब वृक्षों की छाया ढल चुकी थी पर जहां गुरु जी (Shri Guru Nanak Dev Ji) लेटे हुए थे उस वृक्ष का परछावां ज्यों का…

मरदाने को जादूगरनी से छुड़वाना

श्री गुरु नानक देव जी आसाम देश के कामरुप क्षेत्र के गौहाटी शहर से बाहर जा बैठे| मरदाने को भूख लगी, कुछ खाने के लिए शहर में चला गया|

लाखों आकाश व लाखों पाताल दिखाने

श्री गुरु नानक देव जी कारूँ से चलकर बगदाद शहर के पूर्व की पहाड़ी के नीचे जा बैठे| यहां का राजा अत्याचारी था|

श्री गुरु नानक देव जी का बाल गुदाई टिल्ले पहुंचना

श्री गुरु नानक देव जी कान-फटे योगियों के डेरे टिल्ला बाल गुंदाई पहुंचे| इस डेरे का प्रधान अपने डेरे आए साधु-संतो व अतिथिगणों की वस्त्र व खाने-पीने से सेवा करते| वह आप बहुत ही साधारण भोजन खाते व वस्त्र पहनते|

गुरु जी का कैलाश पर्वत योगियों से मिलना

श्री गुरु नानक देव जी हेम कुन्ट के रास्ते बदरी नाथ पहुंचे| वे वहां कैलाश पर्वत पर सिद्ध-मण्डली के स्थान मानसरोवर के पास पहुँच गए| वहां गुरु जी को 84 सिद्ध व गोरख नाथ मण्डली मिली| उन्होंने गुरु जी से प्रश्न किया - हे बालक! आपको यहां कौन सी शक्ति…

बाबर का गुरु जी समेत कई लोगों को कैदी बनाना

बाबर ने सैदपुर के इलाके में हमला कर दिया| सैदपुर के पठानों ने इसका डटकर सामना किया| मगर बाबर की फौजों के आगे पठानों की कोई पेश न गई| बाबर ने खूनी होली खेली|

राय बुलार की श्री गुरु नानक देव जी के प्रति श्रद्धा

राए बुलार ने महिता कालू जी को कहा कि आप खुश किस्मत हो आपको घर नानक जैसा पुत्र पैदा हुआ है| इन्हें आज से कटु वचन न कहना| मेरी तरफ से एक सुन्दर पोशाक लेकर जाओ|

मुलतान में जाकर पीर से मिलना

श्री गुरु नानक देव जी शिवरात्रि के मेले से उठकर मुलतान की यात्रा पर निकल पड़े| जब गुरु जी मुलतान पहुंचे तो वहां के पीरों ने बाबा जी को दूध का कटोरा भर कर यह बताने के लिए भेजा कि मुलतान में बहुत से पीर है|

हाथों पर ईंट का जुड़ना

श्री गुरु नानक देव जी मक्के से चलकर मदीने आ गए| इस स्थान पर हजरत मुहम्मद साहिब दफनाएं गए थे| इसलिए यह मुसलमानों का बड़ा पूजनीय स्थान है|

सचखण्ड से निरंकारी उपदेश

गुरु जी नित्य की मर्यादा के अनुसार नदी में स्नान करने गए तो अपने वस्त्र सेवादार को पकड़ा कर नदी में गोते लगाने लगे| वे इस तरह अलोप हुए कि बाहर न आए| सेवादारों ने यह बात नवाब व जीजा जै राम को बताई| उन्होंने गुरु जी को ढूंढने की…

पानी का पश्चिम दिशा में डालना

गुरु जी ने हरिद्वार पहुंचकर देखा कि लोग इश्नान करते हुए नवोदित सूर्य की ओर पानी हाथों से उछाल रहे हैं तो आप ने पश्चिम की ओर मुंह करके दोनों हाथों से पानी उछालना शुरू कर दिया|

हमजा गौंस को नसीयत देनी

श्री गुरु नानक देव जी ने सिआलकोट शहर में आकर बेरी के वृक्ष के नीचे अपना डेरा लगा लिया| इस स्थान के पास ही एक फकीर जिसका नाम हमजा गौंस था, मकबरे के हजूरे में बैठा था| वह यही कहता था कि यह शहर झूठों का है और इस शहर…

जीना झूठ व मरना सच

एक दिन श्री गुरु नानक देव जी ने मरदाने को एक टके का झूठ व सच्च खरीदने के लिए भेजा| मरदाना बहुत दुकानों पर गया पर उसे कहीं से भी सत्य और झूठ न मिला|

सरसा में पीरों के साथ तप करना

श्री गुरु नानक देव जी मुसलमान पीरों के प्रसिद्ध ठिकाने सरसे में पहुंचे| पीरों ने पूछा सन्त जी! तप करना अच्छा है कि नहीं? गुरु जी ने उत्तर दिया अगर मन विकारी है और शरीर के बल करके विकार करता हो तो शरीर को निर्बल करके मन को शुद्ध बनाने…

अयोध्या नगरों में पंडितों से वार्तालाप

गुरु जी ने जैसे ही अयोध्या नगरी में प्रवेश किया, लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई| गुरु जी ने एक पण्डित से पूछा कि हमने सुना है कि अयोध्या नगरी को श्रीराम जी अपने साथ बैकुण्ठ में ले गए थे, फिर यह तो यहीं के यहीं हैं|

कौड़े राक्षस को तारना

श्री गुरु नानक देव जी विध्यांचल के दक्षिणी जंगलों में गए| वहां कौड़ा नाम का राक्षस रहता था जो इन्सानों को तलकर खाता था| कौड़ा राक्षस मरदाने को तल कर खाने लगा था| परन्तु गुरु जी ने वहां समय पर पहुंच कर मरदाने की रक्षा की|

अचल बटाले में गुरु जी का कौतक

सिद्धों का एक स्थान अचल बटाला जहां हर साल शिवरात्रि का मेला लगता है| यहां सिद्ध अपनी करामातें दिखाकर लोगों से अपनी पूजा करवाते है| गुरु जी के मेले में पहुंचते ही सभी लोग गुरु जी के पास इकट्ठे हो गए|

मोदी खाने का दूसरी बार हिसाब होना

श्री गुरु नानक देव जी मोदी खाने को बड़ी उदारता के साथ चला रहे थे| अधिकारियों ने नवाब को चुगली कर दी कि गुरु जी बड़ी लापरवाही व बेपरवाही के साथ मोदी खाना लुटा रहे है, जिसकी वजह से मोदी खाना खाली हो जाएगा|

बनारस में पंडितों से हरि चर्चा

श्री गुरु नानक देव जी बनारस पहुंचे तो गुरु जी की वेश-भूषा-गेरुए रंग वाला करता, ऊपर सफेद चादर, एक पांव में जूती एक पांव में खौंस, सर पर टोपी, गले में माला, माथे पर केसर का तिलक देखकर लोग इकट्ठे हो गए|

कटक शहर में जाना व भैरों के पुजारी से चर्चा करना

गुरु जी कटक शहर में पहुंच कर भैरों मन्दिर के पास आकर बैठ गए| आप अडोल रहे तो पुजारी ने आपको शक्तिशाली मानकर भूल की क्षमा मांगी|

गुरु जी की बाल लीला

गुरु नानक देव जी जब 5 वर्ष के हुए तो उन्होंने बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया| गुरु जी सभी बालकों को इतना प्यार करते थे कि उन्हें खाने व खेलने की वस्तुएँ घर से लाकर बाँट देते|

पानी का चश्मा पैदा करना

भगतू सिक्ख जो कि टिल्ले की पहाड़ी के नीचे बैठा था, उसने गुरु जी से प्रार्थना की यहां पानी की बहुत कमी है|

सिकन्दर लोधी को उपदेश

दिल्ली का बादशाह सिकंदर लोधी बहुत अत्याचारी था| उसने भक्त कबीर, सधना व नामदेव आदि भक्तों को कष्ट दिए व अनेक ही फकीरों को करामात दिखाने के लिए कैद किया हुआ था|

मुल्ला के पास पढ़ाई करनी

पांधे गोपाल से पढ़ाई करके बाबा कालू ने आपको फारसी पढ़ने के लिए मुल्ला घुतवदीन के पास भेज दिया| मिष्ठान व कुछ नकदी समान भेंटा के रूप में आप साथ ले गए|

कुरुक्षेत्र में पंडित नानू को भ्रम से निकालना

सज्जन ठग को सच्चा ठग बनाकर गुरु जी पाकपटन शेख ब्रह्म के साथ ज्ञान चर्चा करके कुरुक्षेत्र पहुंच गए| उस समय लोग सूर्यग्रहण के मेले के लिए दूर-दूर से आए थे|

पंडों को भ्रम से निकालना

गुरु जी गया पहुंचे| यह शहर गयासुर दैंत्य का बसाया हुआ है, जिसके नाम पर ही इसका नाम गया प्रसिद्ध है| हिन्दुओं के विश्वास अनुसार यहां प्राणियों के पिंड बनाने से उनकी गति हो जाती है|

मथुरा-वृंदावन में उपदेश

गुरु जी जब मथुरा और वृंदावन पहुंचे तो आपने देखा कि लोग राजे रानियों और कृष्ण गोपियों के सांग बनाकर रास लीला करते, नाचते व कूदते है| उनकी यह दशा देखकर गुरु जी ने शब्द का उच्चारण किया|

कोहड़ी का कोहड़ दूर करना

श्री गुरु नानक देव जी दीपालपुर शहर से बाहर एक कुटिया देखकर उस के पास जा बैठे| उस कुटिया में एक कोहड़ी रहता था| उसका यह हाल सम्बन्धियों ने किया था| उस कोहड़ी ने गुरु जी से कहा कि आप मेरे से दूर ही रहो, मुझे कुष्ट रोग है, गुरु…

भृर्थरी जोगी से कजलीवन में चर्चा

श्री गुरु नानक देव जी बीजापुर के घने जंगल कजलीबन में योगियों के आश्रम पहुंचे| वहां योगियों के मुखी भृर्थरी ने आपसे योग धारण करने की बात की|

मोदीखाने का तीसरी बार हिसाब होना

गुरु जी को खुल्ले हाथों से मोदी खाने की नौकरी करते देख चुगलखोरो ने नवाब को जाकर फिर शिकायत कर दी कि अब तो गुरु जी पहले से भी दुगना - चौगुना मोदीखाना लुटाए जा रहे हैं|

सज्जन ठग को तारना

श्री गुरु नानक देव जी माता-पिता व राए बुलार आदि को मिलकर कुछ दिनों पश्चात् बोले-मरदाने को साथ लेकर मुलतान की ओर चल दिए|

सच्चे वैरागी बनने का उपदेश

श्री गुरु नानक देव जी ने उत्तर दिशा की यात्रा समाप्त कर दी| कुछ समय करतारपुर की संगतों का कल्याण करते रहें|

जनेयु की रस्म करनी

महिता कालू जी ने वंश की रीति अनुसार 11 साल के होते ही आपको जनेयु पहनाने के लिए दिन निश्चित करके पुरोहित हरदियाल के पास भेज दिया|

खेती का नष्ट होना व गुरु जी का वैराग्य धारण करना

श्री गुरु नानक देव जी खेत की रखवाली करने खेत में जाते| परन्तु उनकी सारी खेती पशुओं ने चर ली| क्योंकि गुरु जी पशुओं को बाहर न निकालते|

गोरखमते में योगियों से चर्चा

श्री गुरु नानक देव जी योगियों के प्रसिद्ध स्थान गोरखमते पहुंचे| वहां उन्होंने उनके डेरे से कुछ दूर बैठकर कीर्तन आरम्भ कर दिया|

सांई बुढण शाह के पास मिलने जाना

श्री गुरु नानक देव जी सतलुज नदी को पार करके सांई बुढण शाह के पास पहाड़ी स्थान पर पहुंच गए| इस वृद्ध फकीर के पास शेर और बूढ़ी बकरियां थी| उसने अपना एकांत में रहकर भक्ति का कारण बताया कि संसार में भ्रमण करके भक्ति नहीं हो सकती|

दुनी चंद को उपदेश

श्री गुरु नानक देव जी ऐमनाबाद से लाहौर आ गए| उस समय श्राद्धों के दिन थे| शाहूकार दूनी चन्द बहुत से ब्राह्मणों व सन्तों को भोजन करा रहा था| गुरु जी को भी महान सन्त समझकर भोजन खिलाने अपने घर ले गया|

पीर बहावलदीन के साथ चर्चा

श्री गुरु नानक देव जी समुन्द्र के पश्चिमी तट के साथ-साथ मालाबार, गुजरात, बंबई आदि इलाकों में सत्यनाम का प्रचार करते हुए सिन्ध में उच्च पीरों के पास बहावलपुर आ गए|

सालस राए को निहाल करना

गुरु जी मरदाने को साथ लिए चल रहे थे तो मरदाने ने कहा, गुरु जी मुझे बहुत भूख लगी है|

राजा शिवनाथ को उपदेश

श्री गुरु नानक देव जी अनन्त जीवों का सुधार व उद्धार करते हुए नागापटम से समुद्र के किनारे रामेश्वरम पहुंचे|

वैद्य को उपदेश

श्री गुरु नानक देव जी को एकांत में लेटे देखकर माता तृप्ता कहने लगी - पुत्र! तुम बीमारो की तरह चुपचाप क्यों लेटे रहते हो? घर का कोई काम-काज दिल लगा कर किया करो|
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