श्री राम जी (43)

रघुपति राघव राजा राम

रघुपति राघव राजा रामपतित पावन सीता राम

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान |जनम जनम रति राम पद, यह वरदान न आन ||रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे रामसिमरूँ निश दिन हरि नाम, यही वर दो मेरे राम ।रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥मेरे राम,…

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत ।जैसी जाकी चाकरी वैसा वाको देत ॥राम करे सो होय रे मनवा राम करे सो होये ॥

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना....तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आनासीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके,चले आना प्रभुजी चले आना...

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ॥किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय ।धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां ॥

सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नमः

सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नमः ..बोलो राम बोलो राम बोलो राम राम राम .

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो

जानकी नाथ सहाय करें जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..

आराध्य श्रीराम त्रिकुटी में

आराध्य श्रीराम त्रिकुटी में .प्रियतम सीताराम हृदय में ..

जय राम रमारमनं शमनं . भव ताप भयाकुल पाहि जनं

जय राम रमारमनं शमनं . भव ताप भयाकुल पाहि जनं ..अवधेस सुरेस रमेस विभो . शरनागत मांगत पाहि प्रभो ..

मेरे मन में हैं राम मेरे तन में है राम

मेरे मन में हैं राम मेरे तन में है राममेरे मन में हैं राम मेरे तन में है राम ।मेरे नैनों की नगरिया में राम ही राम ॥

राम रस मीठा रे, कोइ पीवै साधु सुजाण

राम रस मीठा रे, कोइ पीवै साधु सुजाण ।सदा रस पीवै प्रेमसूँ सो अबिनासी प्राण ॥टेक॥

दूलह राम, सीय दुलही री

दूलह राम, सीय दुलही री ।

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम

मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम,तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम..............जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.........२

पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे राम

पढ़ो पोथी में राम लिखो तख्ती पे राम ।देखो खम्बे में राम हरे राम राम राम ॥

भज मन राम चरण सुखदाई

भज मन राम चरण सुखदाई .. जिहि चरननसे निकसी सुरसरि संकर जटा समाई ।जटासंकरी नाम परयो है, त्रिभुवन तारन आई ॥

हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम

हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम ।तू क्यों सोचे बंदे सब की सोचे राम ॥

घूँघट का पट खोल रे

घूँघट का पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे।

अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो

अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो।इस भव बंधन के भय से हमें उबारौ।

पाई न केहिं गति पतित पावन राम भजि सुनु सठ मना

पाई न केहिं गति पतित पावन राम भजि सुनु सठ मना।गनिका अजामिल ब्याध गीध गजादि खल तारे घना।।

कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे

कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावेसुनयना रानी अपनी लली को दुलरावे

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो .. वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो . जनम जनम की पूंजी पाई जग में सभी खोवायो . खरचै न खूटै चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो . सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो . मीरा के प्रभु…

न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँ

न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँतेरे चरणों की धूल मिल जायेतो मैं तर जाऊँ, हाँ मैं तर जाऊँहे राम तर जाऊँ...मोह मन मोहे, लोभ ललचायेकैसे कैसे ये नाग लहरायेइससे पहले कि मन उधर जायेमैं तो मर जाऊँ, हाँ मैं मर जाऊँहे राम मर जाऊँ

जग मे सुंदर हैं दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम

जग मे सुंदर हैं दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम (३)बोलो राम राम राम, बोलो शाम शाम श्याम (३)

राम दो निज चरणों में स्थान

राम दो निज चरणों में स्थानशरणागत अपना जन जानअधमाधम मैं पतित पुरातन ।साधन हीन निराश दुखी मन।अंधकार में भटक रहा हूँ ।राह दिखाओ अंगुली थाम।राम दो ...

राम हि राम बस राम हि राम

राम हि राम बस राम हि राम ।और नाहि काहू से काम।राम हि राम बस ...

रोम रोम में रमा हुआ है

रोम रोम में रमा हुआ है,मेरा राम रमैया तू,सकल सृष्टि का सिरजनहारा,राम मेरा रखवैया तू,तू ही तू, तू ही तू, ...

सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये

सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिये .जाहि विधि राखे, राम ताहि विधि रहिये ..

बोले बोले रे राम चिरैया रे

बोले बोले रे राम चिरैया रे ।बोले रे राम चिरैया ॥

रघुकुल प्रगटे हैं रघुबीर

रघुकुल प्रगटे हैं रघुबीर ।देस देस से टीको आयो रतन कनक मनि हीर ।

पावन तेरा नाम है पावन तेरा धाम

पावन तेरा नाम है पावन तेरा धाम . अतिशय पावन रूप तू पावन तेरा काम ..

मेरे मन भैया राम कहौ रे

मेरे मन भैया राम कहौ रे ॥टेक॥रामनाम मोहि सहजि सुनावै ।

मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे

मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे।ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥

राम राम राम राम राम राम रट रे

राम राम राम राम राम राम रट रे ॥भव के फंद करम बंध पल में जाये कट रे ॥

किसी का राम किसी का श्याम किसी का गोपाला

किसी का राम किसी का श्याम किसी का गोपाला – 2जाकि जैसी भक्ति बाबा – 2 वैसा ही रंग डालारंग डाला सांई ने रंग डाला – 2किसी का राम किसी का श्याम किसी का गोपालाजाकि जैसी भक्ति बाबा – 2 वैसा ही रंग डालारंग डाला सांई ने रंग डाला –…

राम से बड़ा राम का नाम

अंत में निकला ये परिणाम, ये परिणाम,राम से बड़ा राम का नाम ..

ऐसा राम हमारे आवै

ऐसा राम हमारे आवै ।बार पार कोइ अंत पावै ॥टेक॥

राम बिराजो हृदय भवन में

राम बिराजो हृदय भवन मेंतुम बिन और न हो कुछ मन में

दाता राम दिये ही जाता

दाता राम दिये ही जाता ।भिक्षुक मन पर नहीं अघाता।

राम राम काहे ना बोले

राम राम काहे ना बोले ।व्याकुल मन जब इत उत डोले।

रघुबर तुमको मेरी लाज

रघुबर तुमको मेरी लाजसदा सदा मैं शरण तिहारीतुम हो ग़रीब नेवाजरघुबर तुम हो ग़रीब नेवाजरघुबर तुमको मेरी लाज

रघुपति राघव

रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीता राम

बिरहणिकौं सिंगार न भावै

बिरहणिकौं सिंगार न भावै ।है कोइ ऐसा राम मिलावै ॥टेक॥

भज मन मेरे राम नाम तू

भज मन मेरे राम नाम तूगुरु आज्ञा सिर धार रे।नाम सुनौका बैठ मुसाफि़रजा भवसागर पार रे।
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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