श्री गौरी अम्बे माँ (17)

मन उपवन के फूल माँ तुमको चढ़ाऊँ कैसे

मन उपवन के फूल माँ तुमको चढ़ाऊँ कैसेमन उपवन के फूल माँ तुमको चढ़ाऊँ कैसेहमतो पहाड़ों की गुफ़ाओं में तुमको ही ढूँढा करते हैंहो माँ तुमको ही ढूँढा करते हैं

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे,निर्धन के घर भी आ जाना ।जो रुखा सूखा दिया हमें,कभी इसका भोग लगा जाना ।

हे माँ मुझको ऐसा घर दो जिसमें तुम्हारा मन्दिर हो

हे माँ मुझको ऐसा घर दो जिसमें तुम्हारा मन्दिर हो,ज्योति जले दिन रैन तुम्हारी, तुम मन्दिर के अन्दर हो ।हे माँ मुझको ऐसा घर दो जिसमें तुम्हारा मन्दिर हो,ज्योति जले दिन रैन तुम्हारी, तुम मन्दिर के अन्दर हो ।

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँदुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँजय बोलो जय माता दी जय होजो भी दर पे आए जय हो वो खाली न जाए जय होसबके काम है करती जय हो सबके दुखरे हरती जय होमैया मेरी शेरोवाली भरदे झोली खाली जय होमैया…

माँ है ममता तेरी माँ है ममता तेरी

माँ है ममता तेरी माँ है ममता तेरीजो कुछ है सबकुछ तेरा ही दिया हैमाँ है ममता तेरी.........

बोलो श्री श्री आनन्दमयी माँ की जय

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता |नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

जय अम्बे जय जय दुर्गे

जय अम्बे जय जय दुर्गे दयामयी कल्याण करो .. आ जाओ माँ आ जाओ आ कर दरस दिखा जाओ . जय अम्बे

मैया तेरा बना रहे दरबार

मैया तेरा बना रहे दरबारबना रहे दरबार मैया तेरातेरे पावन दर पे आके मैयाहो सबका उद्धार मैयाबना रहे दरबार

जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!

जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..

तुम्ही हो माता पिता

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो ..

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरीतुम को निस दिन ध्यावतमैयाजी को निस दिन ध्यावतहरि ब्रह्मा शिवजी .बोलो जय अम्बे गौरी ..

नमामि अम्बे दीन वत्सले

नमामि अम्बे दीन वत्सले तुम्हे बिठाऊँ हृदय सिंहासन . तुम्हे पहनाऊँ भक्ति पादुका नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

तौलगि जिनि मारै तूँ मोहिं

तौलगि जिनि मारै तूँ मोहिं ।जौलगि मैं देखौं नहिं तोहिं ॥टेक॥

मत्थे रोलियां, गला दे विच अट्टे

मत्थे रोलियां, गला दे विच अट्टेमारे मेहर दे जिनां नूं माई छिट्टेओ बचड़े निहाल हो गए

दाती दे दरबार कंजकां खेडदियां

दाती दे दरबार कंजकां खेडदियांमैय्या दे दरबार कंजकां खेडदियांमेरी रानी दे दरबार कंजकां खेडदियांमहारानी दे दरबार कंजकां खेडदियां..

संग न छाँडौं मेरा पावन पीव

संग न छाँडौं मेरा पावन पीव ।मैं बलि तेरे जीवन जीव ॥टेक॥

पूजां कंजकां मैं लौंकड़ा मनावां

पूजां कंजकां मैं लौंकड़ा मनावांमाई मैंनूं लाल बख्स देमां मैं वी किसे दी कहावांओ माई मैंनूं लाल बख्स देलाल बख्स दे, माई बाल बख्स दे.....
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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