भजन (333)

जैसे सूरज की गर्मी

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर कि छाया ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है मैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे राम

अल्लाह तेरो नाम

अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान सबको सन्मति दे भगवान अल्लाह तेरो नाम ...

तोरा मन दर्पण कहलाये

तोरा मन दर्पण कहलाये - २ भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये तोरा मन दर्पण कहलाये - २ मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये तोरा मन…

सुख-वरण प्रभु, नारायण, हे, दु:ख-हरण प्रभु, नारायण, हे

सुख-वरण प्रभु, नारायण, हे, दु:ख-हरण प्रभु, नारायण, हे,तिरलोकपति, दाता, सुखधाम, स्वीकारो मेरे परनाम,प्रभु, स्वीकारो मेरे परनाम...

सुख-वरण प्रभु, नारायण, हे, दु:ख-हरण प्रभु, नारायण, हे

सुख-वरण प्रभु, नारायण, हे, दु:ख-हरण प्रभु, नारायण, हे,तिरलोकपति, दाता, सुखधाम, स्वीकारो मेरे परनाम,प्रभु, स्वीकारो मेरे परनाम...मन वाणी में वो शक्ति कहाँ, जो महिमा तुम्हरी गान करें,अगम अगोचर अविकारी, निर्लेप हो, हर शक्ति से परे,हम और तो कुछ भी जाने ना, केवल गाते हैं पावन नाम ,स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु, स्वीकारो…

हे प्रभु आनंद दाता

हे प्रभु आनंद दाताहे प्रभु आनंद दाता, ज्ञान हमको दीजियेशीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिये

न मैं धन चाहूँ

न मैं धन चाहूँ, न रतन चाहूँ तेरे चरणों की धूल मिल जाये तो मैं तर जाऊँ, हाँ मैं तर जाऊँ हे राम तर जाऊँ...

अल्लाह तेरो नाम

अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान सबको सन्मति दे भगवान अल्लाह तेरो नाम ...

इतनी शक्ति हमें देना दाता

इतनी शक्ति हमें देना दातामन का विश्वास कमज़ोर हो नहम चलें नेक रस्ते पे हमसेभूल कर भी कोई भूल हो न..

हमको मनकी शक्ति देना

हमको मनकी शक्ति देना, मन विजय करें.दूसरों की जय से पहले, खुदकी जय करें.हमको मनकी शक्ति देना..

ओ पालनहारे निरगुन और न्यारे

ओ पालनहारे निरगुन और न्यारेतुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं..हमरी उलझन सुलझाओ भगवनतुम्हई हमका हो संभाले..तुम्हई हमरे रखवालेतुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं..

नाम जपन क्यों छोड़ दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दियाक्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ासत्य बचन क्यों छोड दियाझूठे जग में दिल ललचा करअसल वतन क्यों छोड दिया

ओ पालनहारे निरगुन और न्यारे

ओ पालनहारे निरगुन और न्यारेतुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं..हमरी उलझन सुलझाओ भगवनतुम्हई हमका हो संभाले..तुम्हई हमरे रखवालेतुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं..

छोड़ झमेला झूठे जग का

छोड़ झमेला झूठे जग काछोड़ झमेला झूठे जग काकह गये दास कबीर |पार लगायेंगे एक पल मेंतुलसी के रघुवीर ||

वैष्णव जन तो

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे पर दुख्खे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे वैष्णव जन तो तेने कहिये जे ...

नाम जपन क्यों छोड़ दिया

नाम जपन क्यों छोड़ दियाक्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ासत्य बचन क्यों छोड दिया

ये गर्व भरा मस्तक मेरा

ये गर्व भरा मस्तक मेराप्रभु चरण धूल तक झुकने देअंहकार विकार भरे मन कोनिज नाम की माला जपने दे

ये गर्व भरा मस्तक मेरा

ये गर्व भरा मस्तक मेराप्रभु चरण धूल तक झुकने देअंहकार विकार भरे मन कोनिज नाम की माला जपने दे

हमको मनकी शक्ति देना

हमको मनकी शक्ति देना, मन विजय करें.दूसरों की जय से पहले, खुदकी जय करें.हमको मनकी शक्ति देना..

हरो जन की भीर

हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी चट बढ़ायो चीर॥

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना....तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आनासीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके,चले आना प्रभुजी चले आना...

रघुपति राघव राजा राम

रघुपति राघव राजा रामपतित पावन सीता राम

जानकी नाथ सहाय करें

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..सुरज मंगल सोम भृगु सुत बुध और गुरु वरदायक तेरो .राहु केतु की नाहिं गम्यता संग शनीचर होत हुचेरो ..

केहि समुझावौ सब जग अन्धा

केहि समुझावौ सब जग अन्धा॥इक दु होयॅं उन्हैं समुझावौं सबहि भुलाने पेटके धन्धा।पानी घोड पवन असवरवा ढरकि परै जस ओसक बुन्दा॥ १॥

इतनी शक्ति हमें देना दाता

इतनी शक्ति हमें देना दातामन का विश्वास कमज़ोर हो नहम चलें नेक रस्ते पे हमसेभूल कर भी कोई भूल हो न..

श्री राधा कृष्णाय नमः श्री राधा कृष्णाय नमः

श्री राधा कृष्णाय नमः ..श्री राधा कृष्णाय नमः ..ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्णश्री राधा कृष्णाय नमः ..

राधा ऐसी भयी श्याम की दीवानी

राधा ऐसी भयी श्याम की दीवानी, की बृज की कहानी हो गयी एक भोली भाली गौण की ग्वालीन , तो पंडितों की वानी हो गई

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान

अर्थ न धर्म न काम रुचि, पद न चहहुं निरवान |जनम जनम रति राम पद, यह वरदान न आन ||रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे रामसिमरूँ निश दिन हरि नाम, यही वर दो मेरे राम ।रहे जनम जनम तेरा ध्यान, यही वर दो मेरे राम ॥मेरे राम,…

जय जय गिरिबरराज किसोरी

जय जय गिरिबरराज किसोरी ।जय महेस मुख चंद चकोरी ॥जय गज बदन षडानन माता ।जगत जननि दामिनि दुति गाता ॥

मैया यशोदा ये तेरा कन्हैया

मैया यशोदा ये तेरा कन्हैयापनघट पे मेरी पकड़े है बैंयांतंग मुझे करता है संग मेरे लड़ता हायराम जी की कृपा से मैं बचीराम जी की कृपा से

माखन चोर , नन्द किशोर, मन मोहन, घनश्याम रे

माखन चोर , नन्द किशोर, मन मोहन, घनश्याम रेकितने तेरे रूप रे कितने तेरे नाम रे

मन की तरंग मार लो बस हो गय भजन

मन की तरंग मार लो बस हो गय भजन ।आदत बुरी सुधार लो बस हो गया भजन ॥

मेरो दरद न जाणै कोय

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय।

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत

राम झरोखे बैठ के सब का मुजरा लेत ।जैसी जाकी चाकरी वैसा वाको देत ॥राम करे सो होय रे मनवा राम करे सो होये ॥

ऐसी सुबह न आए न आए ऐसी श्याम

ऐसी सुबह न आए न आए ऐसी श्यामजिस दिन जुबान पे मेरी आए न साई का नाम

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना

कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना प्रभुजी चले आना....तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आनासीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके,चले आना प्रभुजी चले आना...

तुम सागर ठहरे हम गागर ठहरे,हाये प्राण तुम्हीं को ध्याएँ

तुम सागर ठहरे हम गागर ठहरे,हाये प्राण तुम्हीं को ध्याएँमोहे झलक दिखादो साँई मोहे झलक दिखादो साँईयाद बड़ी तड़पाए रेतुम सागर ठहरे………………

भजो राधे गोविंदा भजो राधे गोविंदा

भजो राधे गोविंदाभजो राधे गोविंदागोपाला तेरा प्यारा नाम हैगोपाला तेरा प्यारा नाम हैनंदलाला तेरा प्यारा नाम है

जानकी नाथ सहाय करें

जानकी नाथ सहाय करें जब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..सुरज मंगल सोम भृगु सुत बुध और गुरु वरदायक तेरो .राहु केतु की नाहिं गम्यता संग शनीचर होत हुचेरो ..

श्री गणपति ध्यान तथा आवाहन

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,लम्बोदराय सकलाय जगत्‌ हिताय ।नागाननाय श्रुतियज्ञभूषिताय,गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥

रे दिल गाफिल गफलत मत कर

रे दिल गाफिल गफलत मत कर एक दिना जम आवेगा॥सौदा करने या जग आया पूजी लाया मूल गॅंवायाप्रेमनगर का अन्त न पाया ज्यों आया त्यों जावेगा॥ १॥

अजब हैरान हूं भगवन, तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं

अजब हैरान हूं भगवन, तुम्हें कैसे रिझाऊं मैं...कोई वस्तु नहीं ऐसी, जिसे सेवा में लाऊं मैं...

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ॥किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय ।धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां ॥

राखौ कृपानिधान

अब मैं सरण तिहारी जी मोहि राखौ कृपा निधान।अजामील अपराधी तारे तारे नीच सदान।

बहुरि नहिं आवना या देस

बहुरि नहिं आवना या देस॥जो जो ग बहुरि नहि आ पठवत नाहिं सॅंस॥ १॥सुर नर मुनि अरु पीर औलिया देवी देव गनेस॥ २॥धरि धरि जनम सबै भरमे हैं ब्रह्मा विष्णु महेस॥ ३॥

तुम बिन मेरी कौन खबर ले

तुम बिन मेरी कौन खबर ले,गोवर्धन गिरधारी ।

प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर प्रभु को नियम बदलते देख

प्रबल प्रेम के पाले प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर प्रभु को नियम बदलते देखा . अपना मान भले टल जाये भक्त मान नहीं टलते देखा ..

तू मारे या तारे - 2 साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे

तू मारे या तारे - 2 साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे जब से अपनी आँख खुली हैदिन उजला हर शब उजली हैजागे भाग हमारे,जागे भाग हमारेओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे

पायो जी म्हे तो राम रतन धन पायो

पायो जी म्हे तो राम रतन धन पायो॥ टेक॥वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु किरपा कर अपनायो॥

सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नमः

सर्व शक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नमः ..बोलो राम बोलो राम बोलो राम राम राम .
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नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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