नवरात्रि विशेष- नवमी पर होता है सिद्धिदात्री पूजन

जेसे की पहले भी लिखा गया की नवरात्रि पर्व माँ दुर्गा और शारदा माँ, महालक्ष्मी माता जी की श्रदा मे बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है|

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दुर्गा अष्टमी व्रत कथा और पूजन विधि

चैत्र नवरात्री मे अष्टमी का सर्वाधिक महत्व है| इसी दिन काली, महाकाली, भद्रकाली, दक्षिणकाली तथा बिजासन माता का पूजन किया जाता है| वास्तव मे इन्हे कुल की देवी माना जाता है|

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नवरात्रि व्रत, पूजन और इसका महत्व

नवरात्रि एक ख़ास हिन्दू पर्व है जिसे न केवल भारत वर्ष अपितु अन्य देशों मे भी बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है| नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है नौ रातें|

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श्री दुर्गा जी की आरती - Shri Durga Ji Ki Aarti

दुर्गा माता जी को आदि शक्ति के नाम से भी जाना जाता है| हिंदू धर्म में माता दुर्गा जी को सर्वोपरि माना गया है| ऐसा माना जाता है कि दुर्गा जी भौतिक संसार में सभी सुखों की दात्री हैं| उनकी भक्ति करने तथा आरती गाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं| माता दुर्गा की आरती का अत्यंत विशेष महत्व है|

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श्री लक्ष्मी जी की आरती (Shri Laxmi Ji Ki Aarti)

आज के वर्तमान युग में धन और वैभव के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा माना जाता है| यही कारण है कि कलयुग में माता लक्ष्मी जी को सबसे ज्यादा पूजा जाता है| इसी कारण इन्हें धन और समृद्धि की साक्षात् देवी माना जाता है| देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कुछ आसान मन्त्र इस से प्रकार हैं|

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श्री सत्यनारायण जी की आरती (Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti)

हिन्दू धर्म में श्री सत्यनारायण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि भक्तिपूर्वक सत्यनारायण जी की कथा और आरती करने वाले जातक के सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

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श्री हनुमान जी की आरती (Shri Hanuman Ji Ki Aarti)

हिंदू धर्म में हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। भगवान श्री राम के परम भक्त माने जाने वाले हनुमान जी का स्मरण करने से सभी डर दूर हो जाते हैं। हनुमान जी की पूजा-अर्चना में हनुमान चालीसा, मंत्र और आरती का पाठ किया जाता है।

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श्री रामचन्द्र जी की आरती (Shri Ramchander Ji Ki Aarti)

मर्यादा पुरुषोतम श्री राम जी के नाम को ही मन्त्र मन गया है| राम से बड़ा, राम का नाम| राम नाम का जाप करने मात्र से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं|  श्री राम चन्द्र जी को स्मरण करने के लिए आरती का भी पाठ किया जाता है|

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श्री कुंज बिहारी जी की आरती (shri Kunj Bihari Ji Ki Aarti)

कुंजबिहारी की आरती समस्त प्रसिद्ध आरतियों में से एक है. यह भगवान का पूजन करते समय यथा श्रीकृष्ण के जन्म जन्माष्टमी के अवसर पर कुंजबिहारी की आरती की स्तुति की जाती है. आरती अक्सर मंदिरों और घरों में गाई जाती है. कुंजबिहारी भगवान कृष्ण के हजारों नामों में से एक नाम है तथा कुंज का अभिप्राय वृन्दावन की हरियाली घासों से युक्त एक स्थल से है|

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श्री गणेश जी की आरती (Shri Ganesh Ji Ki Aarti)

गणेश जी को पार्वती जी का दुलारा कहा जाता है, गणेश जी को गजानंद के नाम से भी जाना जाता है यही कारण है कि समस्त भक्तजन इनकी दुःख हरता के नाम से आरती करते हैं| ऐसा माना जाता है कि गणेश जी की आरती गाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं| 

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रविवार (इतवार) व्रत की आरती (Ravivar Vart Ki Aarti)

यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।

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सोमवार व्रत की आरती (Somvar Vart Ki Aarti)

सत्यम शिवम और सुन्दरम जो सत्य है वह ब्रह्म है जो शिव है वह परम शुभ और पवित्र आतम तत्व है| शिव से ही धर्म अर्थ काम और मोक्ष है| सभी जगत शिव की ही शरण में हैं, जो शिव के प्रति शरणागत नहीं है वह प्राणी दुःख के गहरे गर्त में डूबता जाता है ऐसा पुराण कहते हैं| जाने-अनजाने शिव का अपमान करने वाले को प्रकृति कभी क्षमा नहीं करती है| शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है| शिवलिंग के विल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीम मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है|

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श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa)

हनुमान चालीसा तुलसीदास की एक काव्यात्मक कृति है बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु 'हनुमान चालीसा' का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसमें बजरंग बली‍ की भावपूर्ण वंदना तो है ही, श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया है।

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मंगलवार व्रत की आरती (Mangalvar Vart Ki Aarti)

हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं| थोड़ी सी प्रार्थना और पूजा से शीर्घ प्रसन्न हो जाते हैं| शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इन्हें ना जानता हो हनुमान जी भगवान राम के अनन्य भक्त थे| शनिवार और मंगलवार का दिन इनके पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है| अगर आप अपनी परेशानियों से निजात पाना चाहते हैं तो आप निम्न मंत्र और उपाय अजमाएं| शीघ्र ही आपके सारे कष्ट दूर होकर आपको सुख की अनुभति होगी|

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बुधवार व्रत की आरती (Budvar Vart Ki Aarti)

बुध ग्रह सूर्य के सबसे करीब ग्रह है| बुध देवता जी की आरती एंवं स्तुति का अपना ही एक महत्व है| ऐसा माना जाता है की बुध देवता अपने भगतों पर ज्ञान और धन की वर्षा करते हैं| बुधवार के दिन की गई एक प्रार्थना सभी बाधाओं से निजात दिलवाती है, जिससे कई गुना लाभ मिलता है| मुख्यतः रूप से संतान प्राप्ति तथा भूमि के लाभ मे इनकी खासकर पूजा की जाती है|

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ब्रहस्पतिवार व्रत की आरती (Bhraspativar Vart Ki Aarti)

गुरूवार या वीरवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है. बृहस्पति देवता को बुद्धि और शिक्षा का देवता माना जाता है. गुरूवार को बृहस्पति देव की पूजा करने से धन, विद्या, पुत्र तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. परिवार में सुख तथा शांति रहती है. गुरूवार का व्रत जल्दी विवाह करने के लिये भी किया जाता है|

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शुक्रवार व्रत की आरती (Shukarvar Vart Ki Aarti)

शुक्रवार के दिन मां संतोषी का व्रत-पूजन किया जाता है. संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, सुख, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं. माता संतोषी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतानादि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है. यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है. सुख, सौभाग्य की कामना से माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत रखे जाने के विधान है.

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श्री शिव चालीसा (Shri Shiv Chalisa)

सावन मास में शिव चालीसा पढ़ने का अलग ही महत्व है। शिव चालीसा के माध्यम से आप अपने सारे दुखों को भूला कर भगवान शिव की अपार कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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शनिवार व्रत की आरती (Shanivar Vart Ki Aarti)

शनि व्रत रखने का बहुत महत्व माना गया है| कुंडली में शनि की महादशा अथवा साढ़े साती या ढैय्या में शनि जी के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनि व्रत का महत्व माना गया है| शनि जी के इस मंत्र - 'ऊँ शं शनिश्चराय नम:" को कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए| शनि व्रत में शनि देव की आरती के साथ साथ दान भी जरूरी है| उड़द, तेल, तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कम्बल या कपड़ा, लोहा या इससे बनी वस्तुएं और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

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आरती क्या है और कैसे करनी चाहिए?

पूजा के अन्त में आरती की जाती है| पूजन में जो त्रुटि रह जाती है, आरती से उसकी पूर्ति होती है| पूजन मन्त्रहीन और क्रियाहीन होने पर भी आरती कर लेने से उसमें सारी पूर्णता आ जाती है| आरती करने का ही नहीं, आरती देखने का भी बड़ा पुण्य होता है| जो धूप और आरती को देखता है और दोनों हाथों से आरती लेता है, वह समस्त पीदियों का उद्धार करता है और भगवान् विष्णु के परमपत को प्राप्त होता है|

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