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Home03. कर्मयोग

03. कर्मयोग (3)

कर्तव्य व कर्म का महत्व (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 1 से 8)

ज्ञानी व अज्ञानी के लक्षण (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 25 से 36)

यज्ञादि कर्म अनिवार्य (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 3 शलोक 9 से 24)

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