🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏

धीरज

धीरज

प्राचीन समय की बात है| अनेक वर्षों तक गुरु चाणक्य ने चंद्रगुप्त को अनेक विधाएँ सिखाने के बाद सैन्य संचालन और युद्ध-विद्या की शिक्षा दी| उन्होंने जब देखा कि चंद्रगुप्त सैन्य-संचालन में योग्य हो गया है, तब उन्होंने संचित धन से सेना एकत्र की|

“धीरज” सुनने के लिए Play Button क्लिक करें | Listen Audio

इस सेना के सेनापति चंद्रगुप्त बने| उन्होंने गाँवों और नगरों को जीतकर उन्हें अपने अधीन करना शुरु कर दिया| पर इन क्षेत्रों की जनता उनके विरुद्ध खड़ी हो गई, फलतः चंद्रगुप्त को भागकर जंगल की शरण लेनी पड़ी| चंद्रगुप्त ने चाणक्य के साथ जनता के विचार पता लगाने चाहे| वे वेश-भूषा बदलकर घूमने लगे| कभी किसी गाँव में जाते तो कभी किसी शहर में| एक दिन एक गाँव में एक स्त्री पुए बनाकर गर्म-गर्म अपने लड़के को खाने के लिए दे रही थी| लड़का पुए का किनारा छोड़कर बीच का हिस्सा खाता, तो उसका मुँह जल उठता| लड़के की सिसकारी सुनकर उसकी माँ बोली- “बेटा, तेरा व्यवहार चंद्रगुप्त- जैसा है, जो सीधा राज्य की राजधानी की ओर बढ़कर मात खा जाता है|”

लड़का बोला- “मैं क्या अनुचित कर रहा हूँ और चंद्रगुप्त क्या कर रहा है?” माता ने जवाब दिया- “मेरे बेटे, तुम चारों किनारे छोड़कर बीच का गर्म भाग खाने की कोशिश कर रहे हो| पहले ठंडे किनारे खाओ, फिर बीच का हिस्सा खाओगे तो मुँह नहीं जलेगा| चंद्रगुप्त राजा बनना चाहता है| जब तक सीमावर्ती क्षेत्र उसके अधीन नहीं होंगे, तब तक बीच खेला करो और गाँव में सीधे पहुँचने से जनता उसके खिलाफ अवश्य खड़ी होगी चंद्रगुप्त की नीति मूर्खतापूर्ण है चंद्रगुप्त और चाणक्य दोनों ने उस बुद्धिमता माँ की बात सुने बे दोनों नहीं हिम्मत और नई योजन से बाहर चलेँ उन्होंने दुबारा से न एकत्र की उन्होंने इस बार सबसे पहले आरक्षित प्रदेश जीते उसके साथ वहाँ से समीप स्थित शेत्र पर नियंत्रण सुदृण किया इस तरह निरंतर शक्ति बढ़ाकर सब जगहसीमा भर्ती शेत्र उस के अधीन नहीं होंगे तब तक बीच के नगरों और गाँवों में सीधे पहुँचने से जनता उसके खिलाफ अवश्य खड़ी होगी, चंद्रगुप्त की नीति मूर्खतापूर्ण है|”

चंद्रगुप्त और चाणक्य दोनों ने उस बुद्धिमता माँ की बात सुनी| वे दोनों नई हिम्मत और नई योजना से बढ़ चले| उन्होंने दुबारा सेना एकत्र की| उन्होंने इस बार सबसे पहले आरक्षित प्रदेश जीते| उसके साथ वहाँ से समीपस्थ क्षेत्रों पर नियंत्रण सुदृढ़ किया| इस तरह निरंतर शक्ति बढ़ाकर सब जगह स्थिति मजबूत कर केंद्र की ओर बढ़े| उनकी व्यवस्थित सेनाओं के सामने धननन्द की सेना टिक नहीं सकी| पाटलिपुत्र पर चंद्रगुप्त की सेना का अधिकार हो गया| इस लिए हर इंसान को धीरज से काम लेना चाहिए|

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

नम्र निवेदन: वेबसाइट को और बेहतर बनाने हेतु अपने कीमती सुझाव कॉमेंट बॉक्स में लिखें, यह आपको अच्छा लगा हो तो अपनें मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 ♻ प्रयास करें कि जब हम आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं। सागर में हर एक बूँद मायने रखती है। ♻ 🙏