🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏
Homeधार्मिक ग्रंथसम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता09. राजविद्याराजगुह्ययोगसंसार उत्पत्ति वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 7 से 10)

संसार उत्पत्ति वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 7 से 10)

संसार उत्पत्ति वर्णन (सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता – अध्याय 9 शलोक 7 से 10)

सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 9 शलोक 7

श्रीभगवानुवाच (THE LORD SAID):

सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम्।
कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम्॥9- 7॥

Hहे कौन्तेय, सभी जीव कल्प का अन्त हो जाने पर (1000 युगों के अन्त पर) मेरी ही प्रकृति में समा जाते हैं और फिर कल्प के आरम्भ पर मैं उनकी दोबारा रचना करता हूँ।

EAll beings, O son of Kunti, attain to my nature and merge into it at the end of a cycle (kalp) and I recreate them at the beginning of another cycle.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 9 शलोक 8
प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः।
भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात्॥9- 8॥

Hइस प्रकार प्रकृति को अपने वश में कर, पुनः पुनः इस संपूर्ण जीव समूह की मैं रचना करता हूँ जो इस प्रकृति के वश में होने के कारण वशहीन हैं।

EI repeatedly shape all these beings, who are helplessly dependent on their innate properties, according to their action.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 9 शलोक 9
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनंजय।
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु॥9- 9॥

Hयह कर्म मुझे बांधते नहीं हैं, हे धनंजय, क्योंकि मैं इन कर्मैं को करते हुये भी इनसे उदासीन (जिसे कोई खास मतलब न हो) और संग रहित रहता हूँ।

EUnattached and disinterested in these acts, O Dhananjay, I am not bound by action.
सम्पूर्ण श्रीमद्‍भगवद्‍गीता - अध्याय 9 शलोक 10
मयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम्।
हेतुनानेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते॥9- 10॥

Hमेरी अध्यक्षता के नीचे यह प्रकृति इन चर और अचर (चलने वाले और न चलने वाले) जीवों को जन्म देती है। इसी से, हे कौन्तेय, इस जगत का परिवर्तन चक्र चलता है।

EIn association with me, O son of Kunti, my maya shapes this world of the animate and the inanimate , and the world revolves like a wheel of recurrence for the aforesaid reason.

Spiritual & Religious Store – Buy Online

View 100,000+ Products
Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

Munish Ahuja Founder SpiritualWorld.co.in

नम्र निवेदन: वेबसाइट को और बेहतर बनाने हेतु अपने कीमती सुझाव कॉमेंट बॉक्स में लिखें, यह आपको अच्छा लगा हो तो अपनें मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। धन्यवाद।
NO COMMENTS

LEAVE A COMMENT

🙏 सतनाम वाहे गुरु, गुरु पर्व की असीमित शुभकामनाएं... आप सभी पर वाहे गुरु की मेहर हो! 23 Nov 2018 🙏