17. महाप्रस्थानिकपर्व (3)

Chapter 1

1 [ज] एवं वृष्ण्यन्धककुले शरुत्वा मौसलम आहवम पाण्डवाः किम अकुर्वन्त तथा कृष्णे दिवं गते 2 [वै] शरुत्वैव कौरवॊ राजा वृष्णीनां कदनं महत परस्थाने मतिम आधाय वाक्यम अर्जुनम अब्रवीत 3 कालः पचति भूतानि सर्वाण्य एव महामते कर्म नयासम अहं मन्ये तवम अपि दरष्टुम अर्हसि 4 इत्य उक्तः स तु कौन्तेयः कालः…

Chapter 3

1 [वै] ततः संनादयञ शक्रॊ दिवं भूमिं च सर्वशः रथेनॊपययौ पार्थम आरॊहेत्य अब्रवीच च तम 2 स भरातॄन पतितान दृष्ट्वा धर्मराजॊ युधिष्ठिरः अब्रवीच छॊकसंतप्तः सहस्राक्षम इदं वचः 3 भरातरः पतिता मे ऽतर आगच्छेयुर मया सह न विना भरातृभिः सवर्गम इच्छे गन्तुं सुरेश्वर 4 सुकुमारी सुखार्हा च राजपुत्री पुरंदर सास्माभिः सह…

Chapter 2

1 [वै] ततस ते नियतात्मान उदीचीं दिशम आस्थिताः ददृशुर यॊगयुक्ताश च हिमवन्तं महागिरिम 2 तं चाप्य अतिक्रमन्तस ते ददृशुर वालुकार्णवम अवैक्षन्त महाशैलं मेरुं शिखरिणां वरम 3 तेषां तु गच्छतां शीघ्रं सर्वेषां यॊगधर्मिणाम याज्ञसेनी भरष्टयॊगा निपपात महीतले 4 तां तु परपतितां दृष्ट्वा भीमसेनॊ महाबलः उवाच धर्मराजानं याज्ञसेनीम अवेक्ष्य ह 5 नाधर्मश…
 

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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