श्री साईं बाबा जी की लीलाएं (83)

ऊदी के चमत्कार से पुत्र-प्राप्ति - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी के पास के गांव में लक्ष्मीबाई नाम की एक स्त्री रहा करती थी| नि:संतान होने के कारण वह रात-दिन दु:खी रहा करती थी| जब…
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काका, नाथ भागवत पढ़ो, यही एक दिन तुम्हारे काम आयेगा - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी आने वाले लोगों में कई लोग किसी धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते थे| या तो मस्जिद में बैठकर बाबा के सामने पढ़ते या अपने…
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लाओ, अब बाकी के तीन रुपये दे दो - श्री साईं कथा व लीला

मुम्बई के एक सज्जन थे जिनका नाम थे हरिश्चंद्र पिल्ले| उनके एकमात्र पुत्र को कई वर्ष से मिरगी के दौरे पड़ा करते थे| सभी तरह…
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ऊदी का चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा जब दामोदर तथा कुछ अन्य शिष्यों को साथ लेकर तात्या के घर पहुंचे, तो तात्या बेहोशी में न जाने क्या-क्या बड़बड़ा रहा था|…
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बाबा का विचित्र शयन - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थे| उन्हें दुनियादारी से कोई सरोकार न था| बाबा अपनी समाधि में सदैव लीन रहते थे| सब प्राणियों से समान भाव…
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जब सिद्दीकी को अक्ल आयी - श्री साईं कथा व लीला

इसी प्रकार एक मुसलमान सिद्दीकी की बड़ी इच्छा थी कि किसी तरह वह मुसलमानों के पवित्र तीर्थ मक्का-मदीना कीई यात्रा पर जाए| पर, उसकी आर्थिक…
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माँ! मेरे गुरु ने तो मुझे केवल प्यार करना ही सिखाया है - श्री साईं कथा व लीला

जिस समय साईं बाबा काका साहब को साठे के बारे में 'गुरुचरित्र' का पारायण करने के बारे में बता रहे थे| उस समय मस्जिद में…
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बूटी का रोग छूमंतर - श्री साईं कथा व लीला

एक बार बापू साहब बूटी को अम्लपित्त का रोग हो गया| उन्होंने बहुत इलाज करवाया परन्तु कोई लाभ नहीं हुआ| रोग की वजह से वह…
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संकटहरण श्री साईं - श्री साईं कथा व लीला

शाम का समय था| उस समय रावजी के दरवाजे पर धूमधाम थी| सारा घर तोरन और बंदनवारों से खूब अच्छी तरह से सजा हुआ था|…
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विठ्ठल का दर्शन देना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा भगवद् भजन व ईश्वर चिंतन में विशेष रूप से रुचि रखते थे| बाबा सदैव अपने आत्मस्वरूप में मग्न रहा करते थे| बाबा के…
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मस्जिद का पुनर्निर्माण और बाबा का गुस्सा - श्री साईं कथा व लीला

गोपालराव गुंड की एक इच्छा तो पूर्ण हो गई थी| उसी तरह उनकी एक और इच्छा भी थी कि मस्जिद का पुनर्निर्माण का कार्य भी…
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शिरडी के दिन रामनवमी का मेला - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा के एक भक्त केपर गांव में रहते थे, उनका नाम गोपालराव गुंड था| उन्होंने संतान न होने के कारण तीन-तीन विवाह किये, फिर…
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डॉक्टर को बाबा में श्रीराम के दर्शन - श्री साईं कथा व लीला

एक बार एक तहसीलदार साईं बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी आये थे| उनके साथ एक डॉक्टर जो उनके मित्र थे, वे भी आये…
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तात्या को बाबा का आशीर्वाद - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी में सबसे पहले साईं बाबा ने वाइजाबाई के घर से ही भिक्षा ली थी| वाइजाबाई एक धर्मपरायण स्त्री थी| उनकी एक ही संतान तात्या…
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सर्प विष-निवारक था - श्री साईं कथा व लीला

शामा साईं बाबा के परमभक्त थे| साईं बाबा अक्सर कहा करते थे कि शामा अैर मेरा जन्मों-जन्म का नाता है| एक बार की बात है…
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प्यार की रोटी से मन तृप्त हुआ - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी में रहते हुए एक बार बाबा साहब की पत्नी श्रीमती तर्खड दोपहर के समय खाना खाने बैठी थीं| उसी समस दरवाजे पर एक भूखा…
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दासगणु की वेशभूषा - श्री साईं कथा व लीला

एक समय दासगणु महाराज हरिकथा कीर्तन के लिए शिरडी आये थे| उनका कीर्तन होना भक्तों को बहुत आनंद देता था| सफेद धोती, कमीज, ऊपरी जरी…
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ऊदी का एक और चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

दादू की आँखों के आगे अपनी माँ, बहन और बीमार पत्नी के मुरझाये चेहरे घूम रहे थे|
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बाबा के श्रीचरणों में प्रयाग - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा बैठे हुए थे कि अचानक एक व्यक्ति ने उनके सामने आकर हाथ जोड़ते हुए कहा - "अब कुछ दिनों के लिए मुझे आपसे…
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तात्या और म्हालसापति को बाबा का सान्निध्य - श्री साईं कथा व लीला

तात्या कोते पाटिल और खडोबा मंदिर के पुजारी म्हालसापति दोनों ही साईं बाबा के परम भक्त थे और साईं बाबा भी दोनों से बहुत स्नेह…
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गुरु-गुरु में अंतर न करें - श्री साईं कथा व लीला

किसी अन्य गुरु के शिष्य पंत नाम के एक सज्जन कहीं जाने के लिए रेलगाड़ी में बैठे थे| वे शिरडी नहीं आना चाहते थे, पर…
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रोहिला के प्रति प्रेम - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा का प्रेम सभी लोगों के प्रति एकसमान था| बाबा सभी वर्णों के लोगों से समान रूप से प्रेम करते थे| बाबा की दृष्टि…
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कुश्ती के बाद बाबा में बदलाव - श्री साईं कथा व लीला

अपने शुरूआती जीवन में साईं बाबा भी पहलवान की तरह रहते थे| शिरडी में मोहिद्दीन तंबोली नाम का एक पहलवान रहा करता था| बाबा से…
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हैजे की क्या औकात, जब साईं बाबा है साथ - श्री साईं कथा व लीला

एक बार शिरडी में हैजे का प्रकोप हो गया| जिससे शिरडीवासियों में भय फैल गया| अन्य गांवों से उनका सम्पर्क समाप्त-सा हो गया| तब गांव…
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ऊदी और आशीर्वाद का चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

हरदा गांव निवासी दत्तोपंत चौदह साल से पेटदर्द की पीड़ा से परेशान थे| उन्होंने हर तरह का इलाज करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ|
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लोग दक्षिणा भी देते हैं और गालियां भी - श्री साईं कथा व लीला

किसी के बारे में कोई भला-बुरा कहे या बुराई करे, यह बाबा को बिल्कुल पसंद नहीं था| बाबा सब जान जाते और अवसर पाकर बातों…
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माँ की पप्पी करने में क्या दोष है? - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा के एक भक्त थे दामोदर घनश्याम बावरे| लोग उन्हें 'अण्णा चिंचणीकर' के नाम से जानते थे| साईं बाबा पर उनकी इतनी आस्था था…
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बाबा का संकट के प्रति सचेत करना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा रहते तो शिरडी में ही थे, पर उनकी नजरें सदैव अपने भक्तों पर लगी रहती थीं| बाबा अपने भक्तों पर आने वाले संकटों…
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मौलीबुवा की कथा - श्री साईं कथा व लीला

95 वर्षीय वृद्ध मौलीबुवा विठोवा के परमभक्त थे| वे पंढरी के बारकरी में थे| मौलीबुवा पूरे वर्षभर में 8 महीने वे पंढरपुर रहते थे और…
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कुछ दिन रुको, आराम से चले जाना - श्री साईं कथा व लीला

नासिक निवासी भाऊ साहब धुमाल पेशे से एक जाने-माने वकील थे| एक कानूनी मुकदमे के सिलसिले में उन्हें निफाड़ जाना था| चूंकि शिरडी रास्ते में…
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दामोलकर के मन की बात - श्री साईं कथा व लीला

बाबा केवल यही चाहते थे कि सबका भला हो| बाबा अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सत्य-मार्ग पर चलने के लिए कहते| अच्छाई करने…
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बापू साहब बूटी को अभय दान - श्री साईं कथा व लीला

एक बार बापू साहब बूटी शिरडी आये हुए थे| तब एक दिन उनसे बाबा साहब डेंगले जो ज्योतिष विद्या के जानकर भी थे, ने बापू…
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कर्म भोग न छूटे भाई - श्री साईं कथा व लीला

पूना के रहनेवाले गोपाल नारायण अंबेडकर बाबा के अनन्य भक्त थे| वे सरकारी कर्मचारी थे| शुरू में वे जिला ठाणे में नौकरी पर थे, बाद…
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बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति - श्री साईं कथा व लीला

अमरासवती जिले के रहनेवाले दादा साहब खापर्डे की पत्नी श्रीमती खापर्डे अपने छोटे पुत्र के साथ शिरडी में साईं बाबा के दर्शन करने आयी थीं|
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लालच बुरी बला - श्री साईं कथा व लीला

अहमदनगर के रहनेवाले दामू अण्णा जो बाबा के भक्त थे| इनका वर्णन रामनवमी के उत्सव के प्रसंग में आ चुका है| उनके साथ घटी एक…
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सब के प्रति प्रेम-भाव रखो - श्री साईं कथा व लीला

ठीक उसी समय मस्जिद में घंटी बजने लगी| बाबा के भक्त रोजाना दोपहर को बाबा की पूजा और आरती करते थे| यह घंटी दोपहर की…
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किसी से बुरा मत बोलो - श्री साईं कथा व लीला

एक बार की बात है - बाबा के एक भक्त ने बाबा की अनुपस्थिति में अन्य लोगों के सामने एक दोस्त की बात निकलते ही…
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घोड़े की लीद का रहस्य - श्री साईं कथा व लीला

अनंतराव पाटणकर पूना के रहनेवाले थे| उन्होंने वेद और उपनिषदों का अध्ययन कर लिया था| उनका तत्वज्ञान भी समझ लिया था| लेकिन इतना सब करने…
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बाबा को खुशालचंद की चिंता - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी से कुछ दूरी पर रहाता गांव था| वहां खुशालचंद नाम का एक साहूकार रहता था| बाबा इससे भी तात्या जितना प्रेम किया करते थे|…
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बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा अपने जीवन के पूर्वाध्र्द में शिरडीवासियों की चिकित्सा भी किया करते थे| उनके द्वारा दी जाने वाली औषधि से रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त…
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भक्तों के मन की बात जाननेवाला बाबा - श्री साईं कथा व लीला

नाना साहब निमोणकर और उनकी पत्नी दोनों की साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा थी| वे काफी समय से शिरडी में ठहरे हुए थे| बाबा की…
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सबका रखवाला साईं

साईं बाबा लोगों को उपदेश भी देते और उनसे विभिन्न धर्मग्रंथों का अध्ययन भी करवाते| साईं बाबा के कहने पर काका साहब दीक्षित दिन में…
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साईं बाबा द्वारा भिक्षा मांगना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा ईशावतार थे| सिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थीं| पर बाबा को इन बातों से कोई मतलब नहीं था| बाबा सदैव अपनी…
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पानी से दीप जले - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा जब से शिरडी में आये थे| वे रोजाना शाम होते ही एक छोटा-सा बर्तन लेकर किसी भी तेल बेचने वाले दुकानदार की दुकान…
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जो मस्जिद में आया, सुखी हो गया - श्री साईं कथा व लीला

भीमा जी पाटिल पूना जिले के गांव जुन्नर के रहनेवाले थे| वह धनवान होने के साथ उदार और दरियादिल भी थे| सन् 1909 में उन्हें…
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महामारी से अनूठा बचाव - श्री साईं कथा व लीला

एक समय साईं बाबा ने लगभग दो सप्ताह से खाना-पीना छोड़ दिया था| लोग उनसे कारण पूछते तो वह केवल अपनी दायें हाथ की तर्जनी…
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दासगणु को ईशोपनिषद् का रहस्य नौकरानी द्वारा सिखाना - श्री साईं कथा व लीला

एक बार दासगणु जी महाराज ने ईशोपनिषद् पर 'ईश्वास्य-भावार्थ-बोधिनी टीका' लिखनी शुरू की| इस ग्रंथ पर टीका लिखना वास्तव में बहुत ही कठिन कार्य है|…
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बांद्रा गया, भूखा ही रहा - श्री साईं कथा व लीला

बाबा के एक भक्त रामचन्द्र आत्माराम तर्खड जिन्हें लोग बाबा साहब के नाम से भी जानते थे, बांद्रा में रहते थे| वैसे वो प्रार्थना समाजी…
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मेरा पेड़ा मुझे दो - श्री साईं कथा व लीला

यह घटना दिसम्बर, 1915 की है| गोविन्द बालाराम मानकर जो बांद्रा में रहते थे| साईं बाबा की भक्ति के दीवाने थे| अपने पिता की मृत्यु…
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सब कुछ गुरु को अर्पण करता चल - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा कभी-कभी अपने भक्तों के साथ हँसी-मजाक भी किया करते थे, परन्तु उनकी इस बात से न केवल भक्तों का मनोरंजन ही होता था,…
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