श्री साईं बाबा जी की लीलाएं (83)

ऊदी के चमत्कार से पुत्र-प्राप्ति - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी के पास के गांव में लक्ष्मीबाई नाम की एक स्त्री रहा करती थी| नि:संतान होने के कारण वह रात-दिन दु:खी रहा करती थी| जब उसको साईं बाबा के चमत्कारों के विषय में पता चला तो वह द्वारिकामाई मस्जिद में आकर वह साईं बाबा के चरणों पर गिरने ही वाली…

काका, नाथ भागवत पढ़ो, यही एक दिन तुम्हारे काम आयेगा - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी आने वाले लोगों में कई लोग किसी धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते थे| या तो मस्जिद में बैठकर बाबा के सामने पढ़ते या अपने ठहरने की जगह पर बैठकर| कई लोगों का ऐसा रिवाज भी था कि वह अपनी पसंद का ग्रंथ खरीदकर शामा के द्वारा साईं बाबा के…

बाबा का विचित्र शयन - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थे| उन्हें दुनियादारी से कोई सरोकार न था| बाबा अपनी समाधि में सदैव लीन रहते थे| सब प्राणियों से समान भाव से प्यार करते थे| बाबा का रहन-सहन भी बड़ा विचित्र था| बाबा सदैव फकीर के वेष में रहा करते थे| उनके सोने का ढंग भी…

जब सिद्दीकी को अक्ल आयी - श्री साईं कथा व लीला

इसी प्रकार एक मुसलमान सिद्दीकी की बड़ी इच्छा थी कि किसी तरह वह मुसलमानों के पवित्र तीर्थ मक्का-मदीना कीई यात्रा पर जाए| पर, उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी न थी कि वह हज के लिए पैसा इकट्ठा कर पाता| फिर भी वह इच्छा कर रहा था| वह प्रतिदिन द्वारिकामाई मस्जिद में…

लाओ, अब बाकी के तीन रुपये दे दो - श्री साईं कथा व लीला

मुम्बई के एक सज्जन थे जिनका नाम थे हरिश्चंद्र पिल्ले| उनके एकमात्र पुत्र को कई वर्ष से मिरगी के दौरे पड़ा करते थे| सभी तरह का इलाज करवाया, पर कोई लाभ न हुआ| आखिर में उन्होंने यह सोचा कि किसी महापुरुष के आशीर्वाद से शायद इसका रोग दूर हो जाये|

ऊदी का चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा जब दामोदर तथा कुछ अन्य शिष्यों को साथ लेकर तात्या के घर पहुंचे, तो तात्या बेहोशी में न जाने क्या-क्या बड़बड़ा रहा था| उसकी माँ वाइजाबाई उसके सिरहाने बैठी उसका माथा सहला रही थी| तात्या बहुत कमजोर दिखाई पड़ रहा था|

माँ! मेरे गुरु ने तो मुझे केवल प्यार करना ही सिखाया है - श्री साईं कथा व लीला

जिस समय साईं बाबा काका साहब को साठे के बारे में 'गुरुचरित्र' का पारायण करने के बारे में बता रहे थे| उस समय मस्जिद में बाबा के भक्त गोविन्द रघुनाथ दामोलकर (हेमाडपंत) तथा अष्ठा साहब बाबा की चरण सेवा कर रहे थे| यह सुनकर उनके मन में विचार आया कि…

बूटी का रोग छूमंतर - श्री साईं कथा व लीला

एक बार बापू साहब बूटी को अम्लपित्त का रोग हो गया| उन्होंने बहुत इलाज करवाया परन्तु कोई लाभ नहीं हुआ| रोग की वजह से वह इतने कमजोर हो गये कि अब वे मस्जिद जाकर बाबा के दर्शन कर पाने में खुद को असमर्थ पाने लगे| यह बात बाबा को भी…

संकटहरण श्री साईं - श्री साईं कथा व लीला

शाम का समय था| उस समय रावजी के दरवाजे पर धूमधाम थी| सारा घर तोरन और बंदनवारों से खूब अच्छी तरह से सजा हुआ था| बारात का स्वागत करने के लिए उनके दरवाजे पर सगे-संबंधी और गांव के सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित थे| आज रावजी की बेटी का विवाह था|…

विठ्ठल का दर्शन देना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा भगवद् भजन व ईश्वर चिंतन में विशेष रूप से रुचि रखते थे| बाबा सदैव अपने आत्मस्वरूप में मग्न रहा करते थे| बाबा के होठों पर 'अल्लाह मालिक' का उच्चारण सदैव रहता था| बाबा द्वारिकामाई मस्जिद में 'कीर्तन सप्ताह' का भी आयोजन किया करते थे| इसी 'कीर्तन सप्ताह' को…

शिरडी के दिन रामनवमी का मेला - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा के एक भक्त केपर गांव में रहते थे, उनका नाम गोपालराव गुंड था| उन्होंने संतान न होने के कारण तीन-तीन विवाह किये, फिर भी उन्हें संतान सुख प्राप्त न हुआ| अपनी साईं भक्ति के परिणामस्वरूप उन्हें साईं बाबा के आशीर्वाद से एक पुत्र संतान की प्राप्ति हुई| पुत्र…

मस्जिद का पुनर्निर्माण और बाबा का गुस्सा - श्री साईं कथा व लीला

गोपालराव गुंड की एक इच्छा तो पूर्ण हो गई थी| उसी तरह उनकी एक और इच्छा भी थी कि मस्जिद का पुनर्निर्माण का कार्य भी कराना चाहिए| अपने इस विचार को साकार रूप देने के लिए उन्होंने पत्थर इकट्टा करके उन्हें वर्गाकार बनवाया था, लेकिन इस कार्य का श्रेय उन्हें…

डॉक्टर को बाबा में श्रीराम के दर्शन - श्री साईं कथा व लीला

एक बार एक तहसीलदार साईं बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी आये थे| उनके साथ एक डॉक्टर जो उनके मित्र थे, वे भी आये थे| डॉक्टर रामभक्त और जाति से ब्राह्मण थे| वे राम के अतिरिक्त और किसी को न मानते और पूजते थे| वे अपने तहसीलदार दोस्त के…

तात्या को बाबा का आशीर्वाद - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी में सबसे पहले साईं बाबा ने वाइजाबाई के घर से ही भिक्षा ली थी| वाइजाबाई एक धर्मपरायण स्त्री थी| उनकी एक ही संतान तात्या था, जो पहले ही दिन से साईं बाबा का परमभक्त बन गया था|

सर्प विष-निवारक था - श्री साईं कथा व लीला

शामा साईं बाबा के परमभक्त थे| साईं बाबा अक्सर कहा करते थे कि शामा अैर मेरा जन्मों-जन्म का नाता है| एक बार की बात है कि शाम के समय शामा को हाथ की अंगुली में एक जहरीले सांप ने डस लिया| सांप का जहर धीरे-धीरे अपना असर दिखाने लगा, तो…

प्यार की रोटी से मन तृप्त हुआ - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी में रहते हुए एक बार बाबा साहब की पत्नी श्रीमती तर्खड दोपहर के समय खाना खाने बैठी थीं| उसी समस दरवाजे पर एक भूखा कुत्ता आकर भौंकने लगा| श्रीमती तर्खड ने अपनी थाली में से एक रोटी उठाकर उस कुत्ते को डाल दी| कुत्ता उस रोटी को बड़े प्रेम…

दासगणु की वेशभूषा - श्री साईं कथा व लीला

एक समय दासगणु महाराज हरिकथा कीर्तन के लिए शिरडी आये थे| उनका कीर्तन होना भक्तों को बहुत आनंद देता था| सफेद धोती, कमीज, ऊपरी जरी का गमछा और सिर पर शानदार पगड़ी पहने और ऊपर से मधुर आवाज दासगणु का यह अंदाज श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था| उनका कीर्तन…

ऊदी का एक और चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

दादू की आँखों के आगे अपनी माँ, बहन और बीमार पत्नी के मुरझाये चेहरे घूम रहे थे|

बाबा के श्रीचरणों में प्रयाग - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा बैठे हुए थे कि अचानक एक व्यक्ति ने उनके सामने आकर हाथ जोड़ते हुए कहा - "अब कुछ दिनों के लिए मुझे आपसे दूर रहना पड़ेगा|"

तात्या और म्हालसापति को बाबा का सान्निध्य - श्री साईं कथा व लीला

तात्या कोते पाटिल और खडोबा मंदिर के पुजारी म्हालसापति दोनों ही साईं बाबा के परम भक्त थे और साईं बाबा भी दोनों से बहुत स्नेह किया करते थे| ये दोनों रात को बाबा के साथ मस्जिद में ही सोया करते थे| इस लोगों का सोने का ढंग भी बड़ा अजीब…

रोहिला के प्रति प्रेम - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा का प्रेम सभी लोगों के प्रति एकसमान था| बाबा सभी वर्णों के लोगों से समान रूप से प्रेम करते थे| बाबा की दृष्टि में ऊंच-नीच, जाति-पाति, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं था|

कुश्ती के बाद बाबा में बदलाव - श्री साईं कथा व लीला

अपने शुरूआती जीवन में साईं बाबा भी पहलवान की तरह रहते थे| शिरडी में मोहिद्दीन तंबोली नाम का एक पहलवान रहा करता था| बाबा से एक बार किसी बात पर कहा-सुनी हो गई| जिसके फलस्वरूप उसने बाबा को कुश्ती लड़ने कि चुनौती दे डाली| बाबा अंतर्मुखी थे, फिर भी उन्होंने…

गुरु-गुरु में अंतर न करें - श्री साईं कथा व लीला

किसी अन्य गुरु के शिष्य पंत नाम के एक सज्जन कहीं जाने के लिए रेलगाड़ी में बैठे थे| वे शिरडी नहीं आना चाहते थे, पर विधाता के लिखे को कौन टाल सकता है ! जो मनुष्य सोचता है, वह पूरा कभी नहीं होता| होता वही है जो परमात्मा चाहता है|…

हैजे की क्या औकात, जब साईं बाबा है साथ - श्री साईं कथा व लीला

एक बार शिरडी में हैजे का प्रकोप हो गया| जिससे शिरडीवासियों में भय फैल गया| अन्य गांवों से उनका सम्पर्क समाप्त-सा हो गया| तब गांव के पंचों ने यह आदेश जारी किया कि गांव में कोई भी आदमी बकरे की बलि न देगा और दूसरा यह कि गांव में लकड़ी…

ऊदी और आशीर्वाद का चमत्कार - श्री साईं कथा व लीला

हरदा गांव निवासी दत्तोपंत चौदह साल से पेटदर्द की पीड़ा से परेशान थे| उन्होंने हर तरह का इलाज करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ|

लोग दक्षिणा भी देते हैं और गालियां भी - श्री साईं कथा व लीला

किसी के बारे में कोई भला-बुरा कहे या बुराई करे, यह बाबा को बिल्कुल पसंद नहीं था| बाबा सब जान जाते और अवसर पाकर बातों ही बातों में उसे उसके बारे में समझा भी देते| ऐसे ही एक घटना का यहां वर्णन किया जा रहा है -एक वार पंढरपुर के…

बाबा का संकट के प्रति सचेत करना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा रहते तो शिरडी में ही थे, पर उनकी नजरें सदैव अपने भक्तों पर लगी रहती थीं| बाबा अपने भक्तों पर आने वाले संकटों के प्रति उन्हें आगाह भी करते और संकटों से उनकी रक्षा भी किया करते थे| अहमदनगर गांव के रहने वाले काका साहब मिरीकर, जिन्हें उस…

मौलीबुवा की कथा - श्री साईं कथा व लीला

95 वर्षीय वृद्ध मौलीबुवा विठोवा के परमभक्त थे| वे पंढरी के बारकरी में थे| मौलीबुवा पूरे वर्षभर में 8 महीने वे पंढरपुर रहते थे और 4 महीने यानी आषाढ़ से कार्तिक मास तक गंगा के किनारे रहा करते थे|

माँ की पप्पी करने में क्या दोष है? - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा के एक भक्त थे दामोदर घनश्याम बावरे| लोग उन्हें 'अण्णा चिंचणीकर' के नाम से जानते थे| साईं बाबा पर उनकी इतनी आस्था था कि वे कई वर्ष तक शिरडी में आकर रहे| अण्णा स्वभाव से सीधे, निर्भीक और व्यवहार में रूखे थे| कोई भी बात उन्हें सहन न…

कुछ दिन रुको, आराम से चले जाना - श्री साईं कथा व लीला

नासिक निवासी भाऊ साहब धुमाल पेशे से एक जाने-माने वकील थे| एक कानूनी मुकदमे के सिलसिले में उन्हें निफाड़ जाना था| चूंकि शिरडी रास्ते में पड़ता था इसलिए बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी में ही उतर गए| मस्जिद में जाकर दर्शन करने के बाद जब उन्होंने बाबा से…

दामोलकर के मन की बात - श्री साईं कथा व लीला

बाबा केवल यही चाहते थे कि सबका भला हो| बाबा अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सत्य-मार्ग पर चलने के लिए कहते| अच्छाई करने के लिए सबको प्रेरित करते| जो भी व्यक्ति अच्छाई की राह पर चलता, बाबा उसका हौसला और बढ़ाते|

बापू साहब बूटी को अभय दान - श्री साईं कथा व लीला

एक बार बापू साहब बूटी शिरडी आये हुए थे| तब एक दिन उनसे बाबा साहब डेंगले जो ज्योतिष विद्या के जानकर भी थे, ने बापू साहब बूटी से कहा - "आज का दिन आपके लिए बहुत घातक है| आपके जीवन पर कोई संकट आ सकता है| सावधान रहिये|" इस बात…

बालक खापर्डे को प्लेग-मुक्ति - श्री साईं कथा व लीला

अमरासवती जिले के रहनेवाले दादा साहब खापर्डे की पत्नी श्रीमती खापर्डे अपने छोटे पुत्र के साथ शिरडी में साईं बाबा के दर्शन करने आयी थीं|

सब के प्रति प्रेम-भाव रखो - श्री साईं कथा व लीला

ठीक उसी समय मस्जिद में घंटी बजने लगी| बाबा के भक्त रोजाना दोपहर को बाबा की पूजा और आरती करते थे| यह घंटी दोपहर की पूजा-आरती की सूचक थी| शामा और हेमाडपंत तेजी से मस्जिद की ओर चल पड़े| बापू साहब जोग पूजन शुरू कर चुके थे| सभी आरती गा…

किसी से बुरा मत बोलो - श्री साईं कथा व लीला

एक बार की बात है - बाबा के एक भक्त ने बाबा की अनुपस्थिति में अन्य लोगों के सामने एक दोस्त की बात निकलते ही उसे भला-बुरा कहना शुरू कर दिया| उसके शब्द इतने बुरे थे कि उससे सभी को घृणा हुई| ऐसा देखने में आता है कि बिना वजह…

कर्म भोग न छूटे भाई - श्री साईं कथा व लीला

पूना के रहनेवाले गोपाल नारायण अंबेडकर बाबा के अनन्य भक्त थे| वे सरकारी कर्मचारी थे| शुरू में वे जिला ठाणे में नौकरी पर थे, बाद में तरक्की हो जाने पर उनका तबादला ज्वाहर गांव में हो गया| लगभग 10 वर्ष नौकरी करने के बाद उन्हें किसी कारणवश त्यागपत्र देना पड़ा|…

लालच बुरी बला - श्री साईं कथा व लीला

अहमदनगर के रहनेवाले दामू अण्णा जो बाबा के भक्त थे| इनका वर्णन रामनवमी के उत्सव के प्रसंग में आ चुका है| उनके साथ घटी एक और घटना का वर्णन किया जा रहा है, कि साईं बाबा ने उन पर जाने वाला संकट कैसे टाल दिया?

बाबा को खुशालचंद की चिंता - श्री साईं कथा व लीला

शिरडी से कुछ दूरी पर रहाता गांव था| वहां खुशालचंद नाम का एक साहूकार रहता था| बाबा इससे भी तात्या जितना प्रेम किया करते थे| वह जाति से मारवाड़ी था| उसके चाचा चंद्रभान पर भी बाबा का बड़ा प्रेम था| उनसे मिलने के लिए बाबा कई बार उनके गांव खुद…

घोड़े की लीद का रहस्य - श्री साईं कथा व लीला

अनंतराव पाटणकर पूना के रहनेवाले थे| उन्होंने वेद और उपनिषदों का अध्ययन कर लिया था| उनका तत्वज्ञान भी समझ लिया था| लेकिन इतना सब करने के बाद भी उनका मन शांत न था|

बाबा द्वारा अद्भुत नेत्र चिकित्सा - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा अपने जीवन के पूर्वाध्र्द में शिरडीवासियों की चिकित्सा भी किया करते थे| उनके द्वारा दी जाने वाली औषधि से रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त हो जाया करते थे| इसी वजह से साईं बाबा एक कुशल चिकित्सक के रूप में भी प्रसिद्ध हो गए| बाबा की चिकित्सा करने की पद्धति…

भक्तों के मन की बात जाननेवाला बाबा - श्री साईं कथा व लीला

नाना साहब निमोणकर और उनकी पत्नी दोनों की साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा थी| वे काफी समय से शिरडी में ठहरे हुए थे| बाबा की रोजना पूरे मनोयोग से सेवा करना उन्होंने अपना नियम बना रखा था और बाबा के उपदेशों को भी बड़े ही लगाकर सुना करते थे| इसके…

सबका रखवाला साईं

साईं बाबा लोगों को उपदेश भी देते और उनसे विभिन्न धर्मग्रंथों का अध्ययन भी करवाते| साईं बाबा के कहने पर काका साहब दीक्षित दिन में एकनामी भागवत और रात में भावार्थ रामायण पढ़ते थे| उसका यह नियम और समय कभी नहीं चूकता था|

साईं बाबा द्वारा भिक्षा मांगना - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा ईशावतार थे| सिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थीं| पर बाबा को इन बातों से कोई मतलब नहीं था| बाबा सदैव अपनी फकीरी में अलमस्त रहते थे| बाबा, जिनकी एक ही नजर में दरिद्र को बादशाहत देने की शक्ति थी, फिर भी वे भिक्षा मांगकर स्वयं का…

जो मस्जिद में आया, सुखी हो गया - श्री साईं कथा व लीला

भीमा जी पाटिल पूना जिले के गांव जुन्नर के रहनेवाले थे| वह धनवान होने के साथ उदार और दरियादिल भी थे| सन् 1909 में उन्हें बलगम के साथ क्षयरोग (टी.बी.) की बीमारी हो गयी| जिस कारण उन्हें बिस्तर पर ही रहना पड़ा| घरवालों ने इलाज कराने में किसी तरह की…

महामारी से अनूठा बचाव - श्री साईं कथा व लीला

एक समय साईं बाबा ने लगभग दो सप्ताह से खाना-पीना छोड़ दिया था| लोग उनसे कारण पूछते तो वह केवल अपनी दायें हाथ की तर्जनी अंगुली उठाकर अपनी बड़ी-बड़ी आँखें फैलाकर आकाश की ओर देखने लगते थे| लोग उनके इस संकेत का अर्थ समझने की कोशिश करते लेकिन इसका अर्थ…

पानी से दीप जले - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा जब से शिरडी में आये थे| वे रोजाना शाम होते ही एक छोटा-सा बर्तन लेकर किसी भी तेल बेचने वाले दुकानदार की दुकान पर चले जाते और रात को मस्जिद में चिराग जलाने के लिए थोडा-सा तेल मांग लाया करते थे|

दासगणु को ईशोपनिषद् का रहस्य नौकरानी द्वारा सिखाना - श्री साईं कथा व लीला

एक बार दासगणु जी महाराज ने ईशोपनिषद् पर 'ईश्वास्य-भावार्थ-बोधिनी टीका' लिखनी शुरू की| इस ग्रंथ पर टीका लिखना वास्तव में बहुत ही कठिन कार्य है| दासगणु ने ओवी छंदों में इसकी टीका तो की, पर सारतत्व उनकी समझ में नहीं आया| टीका लिखने के बाद भी उन्हें आत्मसंतुष्टि नहीं हुई|…

बांद्रा गया, भूखा ही रहा - श्री साईं कथा व लीला

बाबा के एक भक्त रामचन्द्र आत्माराम तर्खड जिन्हें लोग बाबा साहब के नाम से भी जानते थे, बांद्रा में रहते थे| वैसे वो प्रार्थना समाजी थे परन्तु साईं बाबा के अनन्य भक्त थे| उनकी पत्नी और पुत्र तो साईं बाबा के प्रति पूर्णतया समर्पित थे| उनका पुत्र तो साईं बाबा …

मेरा पेड़ा मुझे दो - श्री साईं कथा व लीला

यह घटना दिसम्बर, 1915 की है| गोविन्द बालाराम मानकर जो बांद्रा में रहते थे| साईं बाबा की भक्ति के दीवाने थे| अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् मानकर ने उनकी अंत्येष्टि क्रिया शिरडी में करने का अपने मन में विचार किया|

वाइजाबाई द्वारा साईं सेवा - श्री साईं कथा व लीला

साईं बाबा पूर्ण सिद्धपुरुष थे और उनका कार्य-व्यवहार भी बिल्कुल सिद्धों जैसा ही था| उनके इस व्यवहार को देखकर शुरू-शुरू में शिरडी को लोग उन्हें पागल समझते थे और पागल फकीर कहते थे| बाद में बाबा इसी पागल सम्बोधन से प्रसिद्ध भी हो गए| जबकि साईं बाबा बाह्य दृष्टि से…
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नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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