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  • सिक्ख गुरु साहिबान



तेरी शिर्डी में चले आए है साई बाबा

तेरी शिर्डी में चले आए है साई बाबा
अपने दरबार में थोडी सी जगह तो दे दे

तेरे होते हुए मैं क्योँ हूँ बेगानों की तरह
दर् बदर घूमा करूँ क्यूँ मैं दीवानों की तरह
सब का मालिक है तो मेरी भी अरज को सुन ले
तेरी शिर्डी में चले आए है साई बाबा
साई साई साई तेरे साई बाबा सबका मालिक एक है ...

मुझ पे क्या बीत रही साई बताने आया
कोई सुनता ही नही तुमको सुनाने आया
मेरे इस हाल पे बाबा तू नज़र कर दे
तेरी शिर्डी में चले आए है साई बाबा


तू दयावान भी है साई निगेवान भी है
मेरी मंजिल भी है तू मेरा तो ईमान भी है
मैं हूँ ठुकराया हुआ मुझ पे तरस तो कर ले
तेरी शिर्डी में चले आये है साई बाबा ...

साखियाँ

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  • व्रत, विधि व कथा
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इस दिन ब्रह्स्पतेश्वर महादेव जी की पूजा होती है|
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यह व्रत आश्विन मास के शुक्ल प्रतिपदा को किया जाता है| इस व्रत में अशोक वृक्ष की पूजा की जाती है| 
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ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता |जो नर तुमको ध्यावता, मनवंछित फल पाता |
जय जय तुलसी  माता,सबकी सुखदाता वर माता |
उठ जाग मुसाफिर भोर भई,अब रैन कहाँ जो सोवत है |
मैं तेरा कंगाल पुजारी सौ-सौ दीप कहाँ से लाऊं |मेरे पास भक्ति है माता मैं उसी का दीप जलाऊँ |मैं एक ...
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता |तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता || जय
जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता |अपने सेवक जन को सुख सम्पत्ति दाता ||
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जले रक्षतु वाराहः स्थले रक्षतु वामनः । अटव्यां नारसिंहश्च सर्वतः पातु केशवः ।।
विष्णुप्रिये नमस्तुभ्यं जगद्धिते |अर्तिहंत्रि नमस्तुभ्यं समृद्धि कुरु में सदा ||
सायं ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः । दीपो हरतु मे पापं सन्ध्यादीप नमोऽस्तु ते ।। 
नारायणं सर्वकालं क्षुत प्रस्खलनादिषु । ग्रह नक्षत्र पीडाषु देव बाधाषु सर्वतः ।।
ॐ ऐं हीं श्रीं श्नैश्चराय नमः ||
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत् पिता ।शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः ।।
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|| दोहा || जय जय माता शीतला तुमही धरे जो ध्यान। होय बिमल शीतल हृदय विकसे बुद्धी बल ज्ञान ॥
|| दोहा ||   सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश ।। ...
|| दोहा || बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।अरुण अधर जनु बिम्ब फल, नयन कमल अभिराम॥१
|| चौपाई || जय श्रीसकल बुद्घि बलरासी । जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥ जय जय जय वीणाकर धारी । करती ...
|| दोहा || ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड॥शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना ...
|| चौपाई || अज अनादि अविगत अलख, अकल अतुल अविकार।बंदौं शिव-पद-युग-कमल अमल अतीव उदार॥
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नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...
 
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व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...
 
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धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 
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समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - World of Spiritual & Divine Thoughts.

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