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  • सिक्ख गुरु साहिबान



प्रदोष का अर्थ है रात्रि का शुभ आरम्भ|इस व्रत के पूजन का विधान इसी समय होता है| इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं| यह व्रत शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को किया जाता हैं| इसका उदेशय संतान की कामना है|इस व्रत को स्त्री पुरुष दोनों ही कर सकते हैं| इस व्रत के उपास्य देव भगवान शंकर हैं|


विधि:

सांयकाल को व्रत करने वाले को शिव शंकर की पूजा करके अल्प आहार करना चाहिए| कृष्ण पक्ष का शनि प्रदोष विशेष पुण्दायी होता है| शंकर जी का दिन सोमवार है|इस दिन पड़ने वाला प्रदोष सोम प्रदोष कहलाता है| प्रदोष व्रत के लिए श्रावण के हर सोमवार का विशेष महत्व है|

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नम्रता का पाठ

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आध्यात्मिक जगत - The school of spirituality (आध्यात्मिकता की पाठशाला)

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