आध्यात्मिक शिक्षाप्रद कथाएँ (765)

अपंग कौन

बहुत समय पहले की बात है| किसी नगर में एक सेठ रहते थे| उनके पास अपार संपत्ति थी, लंबी-चौड़ी हवेली थी, नौकर-चाकरों की सेना थी, भरापूरा परिवार था| सब तरह के सुख थे, पर एक दुख था| सेठ को रात को नींद नहीं आती थी, कभी आंख लग भी जाती…

कार्य और कारण

एक बार की बात है कि वर्षाकाल आरम्भ होने पर अपना चातुर्मास्य करने के उद्देश्यय से मैंने किसी ग्राम के एक ब्राह्मण से स्थान देने का आग्रह किया था| उसने मेरी प्रार्थना को स्वीकार किया और मैं उस स्थान पर रहता हुआ अपनी व्रतोपसाना करता रहा| एक दिन प्रात: उठने…

सन्यासी और चूहा

सन्यासी के किसी राज्य में महिलारोप्य नाम का एक नगर था| उस नगर से थोड़ी दूर पर भगवान शंकर का एक मंदिर बना हुआ था| उस मठ में तामचूड़ का एक सन्यासी निवास करता था| नगर में भिक्षादन कर वह अपनी जीविका चलाया करता था| भोजन से बचे हुए अन्न…

मित्र की खोज

दक्षिण के किसी जनपद में महिलारोप्य नाम का एक नगर था| उस नर से कुछ दूरी पर एक बहुत बड़ा वटवृक्ष था, जिसके फल खाकर सभी पक्षी अपना पेट भरते थे और जिसके कोटरों में अनेक प्रकार के कीट निवास किया करते थे, जिसकी शीतल छाया में दूर-दूर से आने…

चोर ब्राह्मण का कृत्य

किसी नगर में एक महा विद्वान ब्राह्मण रहता था| विद्वान होने पर भी वह अपने पूर्वजन्म के कर्मों के फलस्वरूप चोरी किया करता था| एक बार उसने अपने नगर में ही बाहर से आए हुए चार ब्राह्मणों को देखा| वे व्यापार कर रहे थे| चोर ब्राह्मण ने सोचा कि वह…

जैसे को तैसा

किसी नगर में जीर्णधन नाम का एक वैश्य रहता था| कुछ ऐसा हुआ कि उसका सारा धन नष्ट हो गया और वह सर्वथा निर्धन हो गया| इससे जहां उसको कष्ट होता था वहां उसको ग्लानि भी होने लगी थी| कभी वह धन धन्य से जब सम्पन्न था तो सिर उठाकर…

बगुले का अधूरा उपाय

किसी वन में एक बहुत बड़ा वृक्ष था| उसमें बगुलों के अनेक परिवार निवास करते थे| उसी वृक्ष के कोटर में एक काला सर्प भी रहता था| अवसर मिलने पर वह बगुलों के उन बच्चों को मारकर खा जाया करता था जिनके पंख भी नहीं नहीं उगे होते थे| इस…

धर्मबुद्धि और पापबुद्धि

किसी नगर में धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नाम के दो मित्र रहते थे| एक बार पापबुद्धि ने विचार किया कि वह तो मुर्ख भी है ओर दरिद्र भी| क्यों न किसी दिन धर्मबुद्धि को साथ लेकर विदेश जाया जाए| इसके प्रभाव से धान कमाकर फिर किसी दिन इसको भी ठगकर सारा…

दुर्बुद्धि वानर

एक वन के किसी भाग में एक वृक्ष था| उसकी एक लम्बी शाखा पर घोंसला बनाकर चटक दम्पत्ति निवास करती थी| उनका जीवन बड़ा सुखमय बीत रहा था| एक बार हेमन्त ऋतु की बात है कि एक दिन सहसा मन्द-मन्द वर्षा होने लगी| कहीं से ठण्ड में ठिठुरता हुआ एक…

कुपात्र को उपदेश

किसी पर्वतीय प्रदेश में वानरों का एक समूह निवास करता था| एक वर्ष हेमन्त ऋतु में भयंकर वायु चलने लगी| उसके साथ ही वर्षा आरम्भ हुई और हिमपात भी होने लगा| ठंड से व्यथित होने के कारण वानर समूह शरण पाने के लिए इधर-उधर भटकता रहा किन्तु उनको कहीं भी…

मुर्ख सिंह और चतुर सियार

किसी वन प्रदेश में वजदंष्ट्र नाम का एक सिंह निवास करता था| चतुरक नाम का श्रृंगाल और कव्यमुख नाम का भेड़िया उसके ये दो सेवक थे| एक दिन की बात है कि वन में घूमते हुए सिंह ने ऐसी ऊंटनी को देखा जो प्रसव-पीड़ा के कारण अपने झुंड से बिछुड़कर…

चिड़िया और हाथी का युद्ध

किसी वन में तमाल के वृक्ष पर घोंसला बनाकर चिड़ा और चिड़िया रहा करते थे| समय पाकर चिड़िया ने अण्डे दिए और जब एक दिन चिड़िया अण्डे से रही थी तथा चिड़ा उसके समीप ही बैठा था तो एक मदोन्मत हाथी उधर से आ निकला| धूप से व्याकुल होने के…

जो होगा देखा जाएगा

किसी सरोवर में अनागत विधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य नामक तीन मत्स्य रहते थे| एक दिन की बात है कि उस तालाब की ओर से कुछ मछुआरे निकले और उसमें देखकर कहने लगे| अरे! सरोवर तो मछलियों से भरा पड़ा है| आज तक हमारी दृष्टि इस पर गई ही नहीं| चलो…

मुर्ख कछुआ

किसी जलाशय में कम्बुग्रीव नाम का एक कछुआ रहता था| उस सरोवर के तट पर निवास करने वाले संकट और विकट नाम के दो हंसों का उसके प्रति बड़ा स्नेह था| नित्यप्रेम उस सरोवर के तट पर बैठकर ये तीनों अनेक देवी-देवता तथा ऋषि मुनियों की कथाएं कह-सुनकर अपना समय…

छोटी-सी टिटिहरी ओर विशाल समुद्र

समुद्र के तट पर एक स्थान पर एक टिटिहरी का जोड़ा रहता था| कुछ दिनों बाद टिटिहरी ने गर्भ धारण किया और जब उसके प्रसव का समय आया तो उसने अपने पति से कहा, 'कान्त! अब मेरा प्रसव-काल निकट आ रहा है, इसलिए आप किसी ऐसे सुरक्षित स्थान की खोज…

चतुर कौआ

किसी वन में मदोत्कट नाम का सिंह निवास करता था| व्याघ्र, कौआ और सियार ये तीन उसके नौकर थे| एक दिन उन्होंने एक ऐसे ऊंट को देखा जो अपने निरोह से भटककर उनकी ओर आ गया था| उसको देखकर सिंह कहने लगा, 'अरे वाह, वह तो विचित्र जीव है| जाकर…

मुर्ख सियार

किसी वन में चण्डरव नामक एक सियार रहता था| एक दिन वह भूख से व्याकुल भटकता हुआ लोभ के कारण समीप के नगर में पहुंच गया| उसको देखते ही नगरवासी कुत्ते उसके पीछे पड़ गए| अपने प्राण बचाने के लिए सियार जब भागा तो वह धोबी के घर में घुस…

पापी मित्र

किसी कुएं में गंगादत्त नाम का मेंढ़क रहता था| एक बार वह अपने दामादों से बड़ा परेशान था| यहां तक कि एक दिन इसके कारण उसे पने घर से बेघर होना पड़ा पर घर छोड़ने के पश्चात् उसने सोचा कि अब मैं इससे कैसे बदला लूं|इतने में उसने बिल में…

बेवक्त के गीत

एक बेचारा गधा भूखा प्यासा इधर-उधर घूमा करता था| एक दिन उसकी मित्रता एक गीदड़ के साथ हो गई| गीदड़ के साथ रहकर वह गधा खूब मौज मस्ती मारता| इस प्रकार वह दिन रात मोटा होने लगा|एक रात वह गीदड़ के साथ खरबूजे के खेतों में खूब माल खा रहा…

अहंकार बुरा

एक तालाब में दो मगरमच्छ रहते थे| एक मेंढक से उनकी दोस्ती हो गई| इस प्रकार वे तीनों तालाब में रहने लगे ओर अपना दुख-सुख कहकर मन बहलाते रहते| मेंढ़क को यह पता नहीं था कि इन दोनों मगरमच्छों में से एक मन्दबुद्धि और दूसरा अहंकारी है|एक दिन वे तीनों…

भाग्य की शक्ति

एक राजा के घर में तीन स्तनों वाली कन्या पैदा हुई तो राजा ने उसे मुसीबत समझकर अपने नौकरों से कहा कि इसे जंगल में फेंक आओ|मंत्री ने राजा से कहा-महाराजा यह तो ठीक है कि तीन स्तनों वाली कन्या भारी होती है| लेकिन इसे फेंकने से पहले पंडितों से…

बुझदिल राक्षस

कश्मीर के राजा रामनाथ की लड़की के महल में एक राक्षस रोजाना ही आकर उसे तंग किया करता था| लड़की उस राक्षस से बहुत दु:खी थी किन्तु उस राक्षस से पीछा छुड़ाने का कोई रास्ता उसकी समझ में नहीं आ रहा था|एक बार एक और राक्षस उस लड़की के कमरे…

चालाक गीदड़

एक जंगल में गीदड़ रहता था| उसे एक बार कही से मरा हुआ| हाथी नजर आ गया| वह उसके चारों ओर घूमता रहा| किन्तु उसकी सख्त खाल को फाड़ न पाया, उसी समय उधर से कहीं एक घूमता हुआ शेर आ गया| उस गीदड़ ने शेर के आगे सिर झुकाकर…

धोखेबाज का अन्त

एक नगर में एक पंडित रहता था| उसे अपनी पत्नी से बहुत प्यार हो गया था| एक बार इन दोनों पति-पत्नी के परिवार वालों के साथ लड़ाई हो गई| जिसके कारण इन्हें अपना घर छोड़कर दूसरे शहर में जाना पड़ा|रास्ते में जाते-जाते उसकी पत्नी ने कहा-पतिदेव, मुझे पानी की प्यास…

बुद्धिमान बलवान

किसी जंगल में एक शेर रहता था| वह नित्य ही हिरण, मोर, खरगोश इत्यादि जानवरों को मारकर खा जाता था| बेचारे जानवर शेर के आतंक से तंग आकर एक दिन जंगल के जानवरों मोर, हिरण, भैंस, खरगोश आदि ने मिलकर यह निर्णय लिया की वे सब शेर के पास जाएंगे…

चालाक बुगला

एक जंगल में अनेक प्रकार के जल जन्तुओं से भरा तालाब था| वहां पर रहने वाला एक बगुला बूढ़ा होने के कारण मछलियों को मारने में भी असमर्थ हो गया| वह बेचारा तालाब के किनारे बैठा रो रहा था| उसे इस प्रकार रोता देखकर एक केकड़े को बहुत दुख हुआ|…

लोभी सदा मरता है

एक गांव में देवशंकर नाम का एक पण्डित रहता था| उसके यहां एक बार पुत्र ने जन्म लिया| ठीक उसी औरत के साथ ही नेवले ने भी एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन वह नेवली बेचारी बच्चे को जन्म देते ही मर गई| इस प्रकार वह नेवले का बच्चा भी…

धोखा एक बार

किसी जंगल में चंडल नाम का श्रृंगाल रहता था| एक बार भूख के कारण एक नगर में घुस गया| बस फिर क्या था नगर के कुत्ते उसे देखते ही भौंकने लगे| उसके पीछे-पीछे थे वह बेचारा आगे-आगे भाग रहा था|भागते-भागते वह एक धोबी के घर में घुस गया| धोबी के…

बुझदिल मत बनो

एक बार एक गीदड़ उस जंगल में चला गया जहां दो सेनाएं युद्ध कर रही थी| दोनों सेनाओं के मध्य क्षेत्र में एक नगाड़ा रखा था| गीदड़ बेचारा कई दिनों से भूखा था नगाड़े को ऊँचे स्थान पर रखा देखकर वह कुछ देर के लिये रूका|देखते ही देखते हवा के…

पागल नौकर

किसी शहर में एक सेठ रहता था| किसी कारणवश उस बेचारे को अपने कारोबार में घाटा पड़ गया| गरीब होने के कारण उसे बहुत दुःख था| इस दुःख से तंग आकर उसने सोचा कि इस जीवन का उसे क्या लाभ? इससे तो मर जाना अच्छा है|यह सोचकर एक रात को…

धोखेबाज

सागर के किनारे से थोड़ी दूर पर एक बड़ा वृक्ष था, जिस पर एक बन्दर रहता था| उस सागर में रहने वाला एक बड़ा मगरमच्छ एक दिन उस वृक्ष के नीचे ठंडी-ठंडी हवा का आनन्द ले रहा था| बन्दर ने अपने घर आये मेहमान को देखा तो मित्रता कर ली|…

महानता के गुण

अपने साधना-काल में एक दिन महावीर एक ऐसे निर्जन स्थान पर ठहरे, जहां एक यक्ष का वास था| वहां वे कोयोत्सर्ग मुद्रा में ध्यान-मग्न हो गए| रात को यक्ष आया तो वह अपने स्थान पर एक अपरिचित व्यक्ति को देखकर आग-बबूला हो गया| वह बड़े जोर से दहाड़ा| उसकी दहाड़…

प्रभु की सीख

एक भिखारी था| वह न ठीक से खाता था, न पीता था, जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था| उसकी एक-एक हड्डी गिनी जा सकती थी| उसकी आंखों की ज्योति चली गई थी| उसे कोढ़ हो गया था| बेचारा रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए…

महान संत

महर्षि रमण को कौन नहीं जानता! वे बहुत महान संत थे| अपने पास कुछ भी नहीं रखते थे| उनके तन पर कोपीन को छोड़कर कोई अन्य कपड़ा नहीं रहता था|एक बार उनकी कोपीन फट गई| वे किसी से कुछ भी नहीं मांगते थे| जब तक बिना मांगे कोई न दे…

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था|उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था|एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया|…

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही|अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर…

संत की ऊंचाई

अबु उस्मान हैरी बड़े ऊंचे दर्जे के संत थे| उनका स्वभाव बहुत ही शांत था| वे सबके साथ प्रेम का व्यवहार करते थे, कभी कोई कड़वी बात कह देता था तो वे बुरा नहीं मानते थे| क्रोध तो उन्हें आता ही नहीं था|एक दिन वे अपने कुछ शिष्यों के साथ…

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे|पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं|भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की…

समपर्ण

संत राबिया एक दिन बहुत बीमार हो गईं| एक साधक उनसे मिलने आया| राबिया की हालत देखकर उसे बड़ा दुख हुआ, पर कहे तो क्या कहे|राबिया उसके मन की बात ताड़ गईं| उन्होंने कहा - "तुम कुछ कहना चाहते हो, कहो|"उस साधक ने कहा - "आप इतनी बीमार हो| ईश्वर…

संतों की महिमा

एक बहुत बड़ी संत थीं| उनका नाम था राबिया| वे सादगी से रहती थीं और हर घड़ी अल्लाह का नाम लेती रहती थीं| उनकी कुटिया में साधु-संतों की भीड़ लगी रहती थी| दूसरे लोग भी आते रहते थे| एक दिन एक संत आया और रात को राबिया की कुटिया में…

नशे का तमाशा

एक आदमी बड़ा शराबी था| शाम होते ही वह शराब घर में पहुंच जाता और खूब शराब पीता| एक दिन उसने इतनी शराब पी कि चलते समय उसे पूरा होश न रहा| वह साथ में लालटेन लाया था| उसे उठाकर घर की ओर चल दिया| रास्ते में गहरा अंधेरा था|…

सहनशीलता

महाराष्ट्र में एक बहुत बड़े संत हुए हैं| उनका नाम था एकनाथ| वह सबसे प्रेम करते थे| कभी गुस्सा नहीं होते थे| एक दिन वह पूजा कर रहे थे कि एक आदमी उनकी गोद में आ बैठा| एकनाथ से प्रसन्न होकर कहा - "वाह! तुम्हारे प्रेम से मुझे बहुत ही…

सेवा का आदर्श

एक बार युधिष्ठिर ने राजसूर्य यज्ञ करवाया| बहुत-से लोगों को आमंत्रित किया| भगवान श्रीकृष्ण भी आए| उन्होंने युधिष्ठिर से कहा - "सब लोग काम कर रहे हैं| मुझे भी कोई काम दे दीजिए|"युधिष्ठिर ने उनकी ओर देखकर कहा - "आपके लिए हमारे पास कोई काम नहीं है|"श्रीकृष्ण बोले - "लेकिन…

सच्ची वीरता

बहुत पुरानी बात है| किसी पहाड़ी प्रदेश में एक राजा राज किया करता था| एक बार उसके राज्य पर दूसरे राजा ने चढ़ाई कर दी| उसे भगाने के लिए राजा ने एक सेना तैयार की| उसमें जो लोग भर्ती हुए, उन सबको उसने एक-एक तलवार दी| फिर राजा ने आदेश…

दिखावे का दान

हजरत उमर के जमाने की बात है| एक बार उनके शहर में आग लग गई| आग इतने जोरों की लगी थी कि उसने शहर का बहुत बड़ा हिस्सा जला डाला| पानी से भी वह नहीं बुझी|अंत में परेशान होकर प्रजा के कुछ लोग बादशाह के पास आए और उनसे कहा…

शुद्ध हृदय की प्रार्थना

समर्थ रामदास ऊंचे दर्जे के संत हुए हैं| वे भिक्षा मांगकर अपना पेट भर लेते थे और भगवान की भक्ति में लीन रहते थे|एक दिन वे भिक्षा मांगते हुए एक घर पर पहुंचे| वहां उन्होंने जैसे ही आवाज लगाई कि घर की स्त्री का पारा चढ़ गया| वह चौका लीप…

पहले अपने को पहचानो

एक दिन दस लड़के यात्रा पर रवाना हुए| उन्होंने तय कर लिया कि अमुक स्थान पर उन्हें पहुंचना है| सब अपने-अपने हिसाब से चलने लगे| कोई तेज चलता तो कोई धीरे| सब अलग-अलग हो गए|शाम को सबों के मंजिल पर पहुंचने पर उन्होंने आपस में सलाह की कि पूरी टोली…

लुकमान की ऊंचाई

हजरत लुकमान बड़े ऊंचे दर्जे के आदमी थे| उनके दिल में न किसी के लिए ईर्ष्या थी, न किसी प्रकार का मोह| उनका मालिक उन्हें बहुत चाहता था| जब भी कोई बढ़िया चीज आती वह लुकमान के लिए भेज देता| लुकमान ने अपने प्रेम से उसे एकदम वश में कर…

अंतरात्मा की आवाज

एक सेठ थे| उनके पास लाखों रुपए की संपत्ति थी| बड़े हवेली थी, देश-विदेश में फैला कारोबार था, तिजोरियां में बंद पैसा था| एक दिन एक महानुभाव उनसे मिलने आए| बातचीत में उन्होंने कहा - "सेठजी, अब तो महंगाई बेहिसाब बढ़ गई है| चीजों के दाम दुगने हो गए हैं|…

अभिमान अच्छा नहीं

एक व्याकरण का पण्डित नाव में बैठा था| उसने मल्लाह से व्याकरण की बड़ी प्रशंसा की और फिर उससे पूछा - "क्यों भाई, क्या तुमने व्याकरण पढ़ा है?"बेचारा मल्लाह व्याकरण क्या जाने! उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर था| उसने कहा - "पण्डितजी हम नहीं जानते कि व्याकरण क्या…

कोशिश का नतीजा

एक राजा था| उस पर उसके दुश्मन ने हमला किया| राजा हार गया और अपने राज्य से भागकर एक गुफा में जा छिपा| अपना राज्य पाने की उसे कोई आशा न रही| गुफा में बैठा वह बीते दिनों की याद करता और बेचैन होता|एक दिन अचानक उसने देखा कि सामने…

आखिरी दरवाजा

एक फकीर था| वह भीख मांगकर अपनी गुजर-बसर किया करता था| भीख मांगते-मांगते वह बूढ़ा हो गया| उसकी आंखों से कम दिखने लगा| एक दिन भीख मांगते हुए वह एक जगह पहुंचा और आवाज लगाई| किसी ने कहा - "आगे बढ़ो! यह ऐसे आदमी का घर नहीं है, जो तुम्हें…

कछुआ गुरु

किसी नगर में गंगा के किनारे एक बूढ़ा आदमी रहता था| उसने अपनी छोटी-सी झोंपड़ी बना ली थी और एक कछुआ पाल रखा था| वह दोपहर को रोटी मांगने जाता तो कुछ चने भी ले आता और उन्हें भिगोकर कछुए को खिला देता|एक दिन एक आदमी उसके पास आया| कछुए…

हम सब चोर हैं

पुराने जमाने की बात है| एक आदमी चोरी के अपराध में पकड़ा गया| उसे राजा के सामने पेश किया गया| उन दिनों चोरों को फांसी की सजा दी जाती थी| अपराध सिद्ध हो जाने पर इस आदमी को भी फांसी की सजा मिली|राजा ने कहा - "फांसी पर चढ़ने से…

खाना कैसा चाहिए

दो मित्र थे, एक का नाम था अशोक और दूसरे का नाम पुनीत| एक दिन अशोक ने पुनीत को अपने घर खाना खाने बुलाया| उसने तरह-तरह की बढिया चीजें बनवाईं| पूड़ी-कचौड़ी, खीर आदि-आदि| जब दोनों खाना खा चुके तो अशोक ने पूछा - "पुनीत, खाना कैसा लगा?"पुनीत चुप रहा तो…

आत्म निर्भरता

पुराने जमाने की बात है| अरब के लोगों में हातिमताई अपनी उदारता के लिए दूर-दूर तक मशहूर था| वह सबको खुले हाथों दान देता था| सब उसकी तारीफ करते थे|एक दिन उसने बहुत बड़ी दावत दी| जो चाहे, वह उसमें शामिल हो सकता था| हातिमताई कुछ सरदारों को लेकर दूर…

सच्चा दोस्ती

दो मित्र थे| वे बड़े ही बहादुर थे| उनमें से एक ने अपने बादशाह के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई| बादशाह बड़ा ही कठोर और बेरहम था| उसको जब मालूम हुआ तो उसने उस नौजवान को फांसी के तख्ते पर लटका देने की आज्ञा दी|नौजवान ने बादशाह से कहा -…

धीरज और शांति का महत्त्व

एक दिन भगवान बुद्ध कहीं जा रहे थे| उनका शिष्य आनंद भी साथ था| वे पैदल चलते-चलते बहुत दूर निकल गए| ज्यादा चलने के कारण वे थक गए थे| रास्ते में आराम करने के लिए वे एक पेड़ के नीचे रुक गए| भगवान बुद्ध को बहुत जोर की प्यास लगी|…

जहां चाह है वहां सुख नहीं

एक बार भगवान बुद्ध अपना चातुर्मास पाटलिपुत्र में कर रहे थे| उनका उपदेश सुनने के लिए बहुत-से लोग आते थे|एक दिन की बात है कि प्रवचन के समय उनके शिष्य आनंद ने पूछा - "भंते, आपके सामने हजारों लोग बैठे हैं| बताइए इनमें सबसे सुखी कौन है?"बुद्ध ने कहा -…

दादा-दादी की छोटी चुनिंदा कहानी

एक दिन एक चोर किसी महिला के कमरे में घुस गया| महिला अकेली थी, चोर ने छुरा दिखाकर कहा - "अगर तू शोर मचाएगी तो मैं तुझे मार डालूंगा|"महिला बड़ी भली थी वह बोली - "मैं शोर क्यों मचाऊंगी! तुमको मुझसे ज्यादा चीजों की जरूरत है| आओ, मैं तुम्हारी मदद…

असली मर्द

अरब देश की बात है| एक राजा था| उसके बड़े-ठाठ-बाट थे| उसके पास किसी चीज की कमी न थी|एक दिन वह राजा लड़ाई पर गया| उसके पास खाने-पीने का सामन इतना था कि उसे लादने के लिए तीन सौ ऊंटों की जरूरत पड़ी|दुर्भाग्य से वह दुश्मन से हार गया और…

अंतर ज्योति

किसी नगर में एक सेठ रहता था| उसके पास अपार धन-संपत्ति थी, विशाल हवेली थी, नौकर-चाकर थे, सब तरह का आराम था, फिर भी उसका मन अशांत रहता था| हर घड़ी उसे कोई-न-कोई चिंता घेरे रहती थी| सेठ उदास रहता| जब उसकी हालत बहुत खराब होने लगी तो एक दिन…

करनी का फल

किसी गांव में एक ब्राह्मण रहता था| उसके पास खेती-बाड़ी के लिए जमीन थी, लेकिन उस जमीन पर फसल अच्छी नहीं होती थी| बेचारा परेशान था|एक दिन वह गर्मी के मौसम में अपने खेत पर पेड़ की छाया में बैठा था कि देखता क्या है कि एक बिल में से…

क्रोध को जीतने का सहज उपाय

भूदान- यज्ञ के दिनों की बात है| विनोबाजी की पद-यात्रा उत्तर प्रदेश में चल रही थी| उनके साथ बहुत थोड़े लोग थे| मीराबहन के आश्रम 'पशुलोक' से हम हरिद्वार आ रहे थे| विनोबाजी की कमर और पैर में चोट लगी थी, उन्हें कुर्सी पर ले जाया जाता था, पर बीच-बीच…

समपर्ण का फल

मुस्लिम संतों में एक बहुत बड़ी संत हुई हैं राबिया| उनमें ईश्वर-भक्ति कूट-कूटकर भरी थी, वे हर घड़ी प्रभु के चरणों में लौ लगाए रहती थीं| सबको उसी का बंदा मानकर उन्हें प्यार करती थीं और जी-जान से उनकी सेवा करती थीं|एक रात को जब वे सो रही थीं, उनके…

गांधीजी का दर्द

गांधीजी का जन्म-दिन सादगी के साथ मनाया जाता था| एक बार सेवाग्राम में जब उनका जन्म-दिन मनाया गया तो आश्रम के भाई-बहनों के अलावा इधर-उधर के भी काफी लोग जमा हो गए|गांधीजी समय पर प्रार्थना-सभा में आए तो देखते क्या हैं, उनके सामने घी का दीया जल रहा है| बात…

रोना क्यों

सूफी-संतों में राबिया का स्थान बहुत ऊंचा था| वे बड़ी सादगी का जीवन बितातीं थीं और सबको बेहद प्यार करती थीं| ईश्वर में उनकी अगाध श्रद्धा थी| उन्होंने अपना सब कुछ उन्हीं को सौंप रखा था|एक दिन एक व्यक्ति राबिया के पास आया|उसके सिर पर पट्टी बंधी थी| राबिया ने…

कठोरता में कोमलता

किसी जगह डाकुओं का एक दल था| उस दल का सरदार बड़ा खूंखार था| चारों ओर उसका इतना आतंक था कि लोग उसके नाम से थर-थर कांपते थे| एक दिन उसने अपने एक साथी को आदेश दिया कि वह अमुक दिन, अमुक जगह पर मिले| जिस दिन साथी को जाना…

अपना-पराया

किसी होटल के मालिक ने एक लड़का नौकर रखा| उसकी उम्र अधिक नहीं थी| वह लड़का बड़ा भला और भोला था, बहुत ही ईमानदार और मेहनती था| एक दिन वह लड़का शीशे के गिलास धो रहा था| संयोग से एक गिलास उसके हाथ से फिसल गया और फर्श से टकराकर…

रुपए की खेती

किसी गांव में एक किसान रहता था| वह बड़ा ही भला और मेहनती था| उसके दो लड़के थे| वह दोनों को अच्छी सीख देता था| कहता था - "जो बोओगे, वही काटोगे|"जब किसान बूढ़ा हुआ तो उसने अपने सारे रुपए और जमीन दोनों लड़कों में बांट दी| एक दिन किसान…

निर्धन का पैसा

किसी नगर में गंगा के किनारे बैठकर एक भिखारी भीख मांगा करता था| उसके हाथ में एक कटोरा रहता था, जिसे जो देना होता था, वह कटोरे में डाल देता था|वर्षों से भिखारी के जीवन का यही क्रम चलता आ रहा था| जाड़ा हो या गर्मी, वर्षा हो या वसंत,…

वृद्ध की सीख

एक राजा था| उसे हर घड़ी इस बात का डर लगा रहता था कि कहीं कोई दूसरा राजा उसके राज्य पर हमला करके उसे मार न डाले| वह सुरक्षा का उपाय सोचता, लेकिन उसकी समझ में कुछ भी न आता| आखिर एक दिन अचानक उसे एक रास्ता सूझा| उसने सोचा…

सत्य-निष्ठा

बचपन में गांधीजी को घर के लोग 'मोनिया' कहकर पुकारते थे| मोनिया बड़ा ही शरारती था| एक बार बच्चों ने मिलकर मंदिर के खेल के ठाकुरजी को झूला-झूलाने का तय किया| ऐसे खेलों में वे मिट्टी की मूर्ति बना लेते थे, लेकिन इस बार उन्होंने सोचा कि लक्ष्मी नारायण के…

मन की महिमा

एक बार भगवान बुद्ध के दो शिष्य उनसे मिलने जा रहे थे| पूरे दिन का सफर था| चलते-चलते रास्ते में एक नदी पड़ी| उन्होंने देखा कि उस नदी में एक स्त्री डूब रही है|बौद्ध भिक्षुओं के लिए स्त्री का स्पर्श वर्जित माना जाता है| ऐसी दशा में क्या हो?उन दोनों…

बाहर का दीया

एक आदमी था| वह रोज बड़े तड़के मंदिर में जाता था और एक दीपक जलाकर रख आता था| यह सिलसिला एक-दो महीने से नहीं, लंबे अर्से से चल रहा था| मंदिर के ठीक सामने घर की बैठक में बैठा एक नौजवान उसे बिना नागा आते देखकर चकित हो उठा|एक दिन…

नया वसंत

एक आदमी था| वह जीवन से बड़ा निराश हो गया था| हर घड़ी उदास रहता था, उसे लगता था कि वह दुनिया में अकेला है| उसे कोई प्यार नहीं करता|वसंत का मौसम आया|तरह-तरह के फूल खिल उठे| उनकी महक से चारों ओर आनंद छा गया, लेकिन वह आदमी अपने कमरे…

सच्ची संपदा

एक सेठ था| उसके पास बहुत संपत्ति थी| वह अपने करोबार से बहुत ही संतुष्ट था| अचानक एक दिन उसने हिसाब लगाया तो पता चला कि वह संपत्ति उसके और उसके बच्चों तक के लिए ही काफी होगी, लेकिन बच्चों के बच्चों का क्या होगा? इस विचार के आते ही…

तोड़ो नहीं, जोड़ो

अंगुलिमाल नाम का एक बहुत बड़ा डाकू था| वह लोगों को मारकर उनकी उंगलियां काट लेता था और उनकी माला बनाकर पहनता था| इसी कारण उसका यह नाम पड़ा था| मुसाफिरों को लूट लेना उनकी जान ले लेना, उसके बाएं हाथ का खेल था| लोग उससे बहुत डरते थे| उसका…

सुख और शांति

ढाई हजार साल पहले की घटना है| बुद्ध एक गांव में ठहरे थे| एक आदमी उनके पास आया और बोला - "भंते, आप तीस साल से लोगों को शांति, सत्य और मोक्ष की बात समझा रहे हैं, लेकिन कितने लोग हैं जिन्हें मोक्ष प्राप्त हो गया?"

बुराई की जड़ काटो!

किसी नगर में एक आदमी रहता था| उसके आंगन में एक पौधा उग आया| कुछ दिनों बाद वह पौधा बड़ा हो गया और उस पर फल लगे|

महात्मा का चमत्कार

किसी नगर में एक दुकानदार था| उसकी कपड़े की दुकान थी| वह बड़ा ही ईमानदार था और अपने ग्राहकों के साथ उसका व्यवहार बड़ा अच्छा रहता था| इसलिए उसकी दुकान खूब चलती थी|

संत का हृदय

किसी नगर में राबिया नाम की बड़ी ऊंची संत थीं| उनका जीवन अत्यंत सादा, सरल और सात्विक था| उनका हृदय हर घड़ी प्रेम से छलछलाता रहता था और उनका द्वार सबके लिए हमेशा खुला रहता था|

क्रोध चाण्डाल होता है

एक पण्डितजी महाराज क्रोध न करने पर उपदेश दे रहे थे| कह रहे थे - "क्रोध आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन है, उससे आदमी की बुद्धि नष्ट हो जाती है| जिस आदमी में बुद्धि नहीं रहती, वह पशु बन जाता है|"

बड़प्पन

कश्मीर की एक घटना है| हम लोग एक दिन शिकारे में बैठकर 'डल' झील में घूम रहे थे| हमारे शिकारे वाला बड़ा मौजी आदमी था| डांड चलाते-चलाते कोई तान छेड़ देता था, वह खूब जोर से गाता था| वह हमें तैरती खेती दिखाने ले गया| वह कमल के बड़े-बड़े पत्तों…

प्रेम का अमोघ अस्त्र

कौशल देश में एक बड़ा ही भयंकर डाकू रहता था| उसका नाम था अंगुलिमाल| उसने लोगों को मार-मारकर उनकी उंगलियों की माला अपने गले में डाल रखी थी, इसलिए उसका यह नाम पड़ा|

जीने का रास्ता

किसी गांव के पास एक सांप रहता था| वह बड़ा ही तेज था| जो भी उधर से निकलता, वह उस पर दौड़ पड़ता और उसकी जान ले लेता| सारे गांव के लोग उससे तंग आ गए| वे उसे रात-दिन कोसते| आखिरकार उन्होंने उस मार्ग से निकलना ही छोड़ दिया| गांव…

भागो मत!

स्वामी रामकृष्ण परमहंस के शरीर-त्याग के बाद उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद तीर्थयात्रा के लिए निकले|

सबसे बड़ा धनी

एक आदमी को बहुत ही दीन और हैरान देखकर दूसरे ने पूछा - "क्यों भाई क्या बात है?"

हाथों का प्रयोजन

एक साधु था| वह नदी के किनारे कुटिया बनाकर रहता था, सांसारिक बंधनों को तिलांजलि देकर वह एकाग्र भाव से ईश्वराधना में डूबा रहता था|

सच्चा साधु

एक दिन एक शिष्य भगवान बुद्ध के पास गया| प्रणाम-निवेदन करके बोला - "भंते, मैं देश में घूमना चाहता हूं| आपके आशीर्वाद का अभिलाषी हूं|"

त्याग और लोभ

किसी नगर में एक सेठ रहता था| उसके पास बहुत धन था| उसकी तिजोरियां हमेशा मोहरों से भरी रहती थीं, लेकिन उसका लोभ कम नहीं होता था| जैसे-जैसे धन बढ़ता जाता था, उसकी लालसा और भी बढ़ती जाती थी|

पसीने की कमाई

एक दिन गुरुनानक घूमते हुए उज्जयिनी पहुंचे| उनका नाम सुनकर एक सेठ उनके पास आया| उसके गले में रुद्राक्ष की माला पड़ी थी और माथे पर तिलक लगा था| वह गुरुनानक के लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन का थाल लाया था| गुरुनानक ने थाल की ओर देखा और खाना खाने…

अनुपम बलिदान

एक शिकारी था| वह बड़ा ही क्रूर और निर्दयी था| वह पक्षियों का हनन करके उन्हें खा जाता था| एक दिन की बात है कि उसके जाल में एक कबूतरी फंस गई| वह उसे लेकर चला तो बादल घिर आए| जोर की वर्षा होने लगी| पास ही पीपल का एक…

सांच को आंच नहीं

किसी नगर में एक जुलाहा रहता था| वह बहुत बढ़िया कम्बल तैयार करता था| कत्तिनों से अच्छी ऊन खरीदता और भक्ति के गीत गाते हुए आनंद से कम्बल बुनता| वह सच्चा था, इसलिए उसका धंधा भी सच्चा था, रत्तीभर भी कहीं खोट-कसर नहीं थी|

चरम लक्ष्य

वे सवेरे-सवेरे टहल कर लौटे तो कुटिया के बाहर एक दीन-हीन व्यक्ति को पड़ा पाया| उसके शरीर से मवाद बह रहा था| वह कुष्ठ रोग से पीड़ित था|

चरम लक्ष्य

वे सवेरे-सवेरे टहल कर लौटे तो कुटिया के बाहर एक दीन-हीन व्यक्ति को पड़ा पाया| उसके शरीर से मवाद बह रहा था| वह कुष्ठ रोग से पीड़ित था|

अंतर की ललकार

एक राक्षस था| उसने एक आदमी को अपनी चाकरी में रखा आदमी बड़ा भला था, राक्षस जो भी कहता वह फौरन कर देता, लेकिन राक्षस तो राक्षस ठहरा! उसे इतने से ही संतोष न होता| वह बात-बात पर आंखें फाड़कर कहता - "काम में जरा-भी ढील हुई तो मैं तुझे…

कषायों का बोझ

एक आदमी था| वह एक महात्मा के पास गया और बोला - "महाराज, मैं ईश्वर के दर्शन करना चाहता हूं, करा दीजिए|"

अधिक धन, कष्ट का कारण

किसी नगर में एक आदमी रहता था| वह पढ़ा-लिखा और चतुर था| एक बार उसमें धन कमाने की लालसा पैदा हुई| उसके लिए उसने प्रयत्न आरंभ किया| देखते-देखते उसके पास लाखों की संपदा हो गई, पर उसके पास ज्यों-ज्यों पैसा आता गया, उसका लोभ बढ़ता गया| साथ ही धन का…

अधिक धन, कष्ट का कारण

किसी नगर में एक आदमी रहता था| वह पढ़ा-लिखा और चतुर था| एक बार उसमें धन कमाने की लालसा पैदा हुई| उसके लिए उसने प्रयत्न आरंभ किया| देखते-देखते उसके पास लाखों की संपदा हो गई, पर उसके पास ज्यों-ज्यों पैसा आता गया, उसका लोभ बढ़ता गया| साथ ही धन का…

अधिक धन, कष्ट का कारण

किसी नगर में एक आदमी रहता था| वह पढ़ा-लिखा और चतुर था| एक बार उसमें धन कमाने की लालसा पैदा हुई| उसके लिए उसने प्रयत्न आरंभ किया| देखते-देखते उसके पास लाखों की संपदा हो गई, पर उसके पास ज्यों-ज्यों पैसा आता गया, उसका लोभ बढ़ता गया| साथ ही धन का…

आलस का नतीजा बुरा

किसी गांव में एक ब्राह्मण रहा करता था| वह बड़ा भला आदमी था, लेकिन साथ ही काम को टाला करता था| वह यह मानकर चलता था कि जो कुछ होता है, भाग्य से होता है, वह अपने हाथ-पैर नहीं हिलाता था| वह बहुत आलसी था| एक दिन एक साधु उसके…

उपकार

एक स्त्री थी| उसकी आंखें चली गईं| पहले एक गई, फिर दूसरी| वह बहुत परेशान रहने लगी| पति अपनी अंधी पत्नी का बोझ कब तक उठाता! वह उससे अलग रहने लगा| उसकी छोटी लड़की ने भी उससे मुंह मोड़ लिया|

सच्चा प्रेम

नौआखाली के दिनों की बात है| वहां गांधीजी की पद-यात्रा चल रही थी| एक दिन गांधीजी देवीपुर नामक ग्राम में पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया| ध्वज-तोरण, पताका आदि से सजावट की गई| गांधीजी ने वह सब देखा तो बड़े गंभीर हो गए, पर उस दिन मौनवार होने के…

अंतर की स्वच्छता

किसी कस्बे में दो आदमी रहते थे| एक का नाम था प्रेम दूसरे का नाम विनय| दोनों के घर आमने-सामने थे| एक दिन संयोग से किसी बात पर उनमें तनातनी हो गई| बात छोटी-सी थी, लेकिन धीरे-धीरे बढ़ गई| दोनों ही बेहद उत्तेजित हो उठे| प्रेम आपे से बाहर हो…

शांति का स्त्रोत

किसी नगर में एक सेठ रहता था, उसके पास लाखों की संपत्ति और भरा-पूरा परिवार था, उसे सब तरह की सुख सुविधाएं थीं| फिर भी उनका मन अशांत रहता था|

प्यार की शक्ति

जापान में एक बहुत बड़े आदमी हुए हैं| उनका नाम था कागावा| लोग उन्हें 'जापान का गांधी' कहा करते थे| वास्तव में वे थे भी गांधीजी की ही तरह| वह शिकावा की मामूली-सी बस्ती में बड़ी सादगी से रहते थे और सबको प्यार करते थे|

साधु का उपदेश

किसी नगर में एक सेठ रहता था| उसके पास अपार धन था, उसका व्यापार दूर-दूर तक फैला हुआ था| एक दिन एक साधु उसके दरवाजे पर भिक्षा मांगने के लिए आया| सेठ ने उसे भिक्षा दी| भिक्षा लेकर जब साधु जाने लगा तो सेठ ने उसे रोककर कहा - "महाराज,…

त्याग का आदर्श

किसी बियाबान जंगल में एक साधु रहता था| उसकी कुटिया छोटी-सी थी| कंद-मूल-फल खाकर वह अपना गुजारा करता था तथा दिन-रात ईश्वर के ध्यान में लीन रहता था|

पसीने की कमाई का आनंद

रैदास नाम के एक बड़े भगवद्भक्त थे| वे काशी में रहते थे| गंगा के घाट के पास ही उनकी झोंपड़ी थी, जिसमें वे अपनी पत्नी के साथ रहते थे और झोंपड़ी के बाहर बैठकर जूते गांठते रहते थे| अपनी मेहनत-मजदूरी से उन्हें जो मिल जाता वे उसी में संतोष करते…

बुद्ध की सिखावन

भगवान् बुद्ध की धर्म-सभा में एक व्यक्ति रोज जाया करता था और उनके प्रवचन सुना करता था| उसका यह क्रम एक महीने तक चला, लेकिन उसके जीवन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा| बुद्ध बार-बार समझाते थे - "लोभ, द्वेष और मोह, पाप के मूल हैं| इन्हें त्यागो|" पर वह…

मूल्यवान भेंट

किसी नगर में एक व्यापारी रहता था| व्यापारी ने अपने व्यापार से खूब कमाई की| जिससे उसकी तिजोरियां धन-दौलत से भर गईं| चारों ओर उसका नाम हो गया|

नया जन्म

एक डाकू था| वह जंगल में छिपा रहता था और उधर से जो भी निकलता था, उसको लूटकर अपनी गुजर-बसर करता था| एक दिन नारद उधर से निकले| डाकू उन पर हमला करने को आया| नारद ने उसे देखकर अपनी वीणा पर गाना आरंभ कर दिया| डाकू चकित होकर आगे…

चार चौकीदार

एक राजा था| उसके राज्य में कभी भी उपद्रव नहीं होते थे| प्रजा बहुत सुखी थी| उसके राज्य से सटा एक दुसरे राजा का छोटा-सा राज्य था, लेकिन उसमें आए दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते थे| लोग आपस में लड़ते रहते थे| उसकी प्रजा बहुत ही दुखी थी, जिसकी वजह से…

मोह नहीं, प्रेम

एक महात्मा हिमालय में रहते थे| वे हमेशा प्रभु का ध्यान करते रहते थे और दर्शननार्थियों को उपदेश दिया करते थे| एक दिन पढ़े-लिखे लोगों की एक टोली उनके पास पहुंची उन्होंने कहा - "महाराज, हम दुनिया को नहीं छोड़ना चाहते| उसी में रहकर आत्मिक उन्नति करना चाहते हैं| कोई…

सच्ची मेहनत की करामात

किसी गांव में एक किसान रहता था| उसकी थोड़ी-सी खेती-बाड़ी थी| उससे उसे जो कुछ मिल जाता, उसी से वह अपनी छोटी-सी गृहस्थी की गुजर-बसर कर लेता था| कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता था|

वह अविस्मरणीय घटना

बुंदेलखण्ड में ओरछा के निकट एक नदी बहती है, जिसे सातार नदी कहते हैं| उस नदी के किनारे पर एक छोटी-सी कुटिया थी, जिसमें एक आदमी रहता था| घर-बार तो उसका कुछ था नहीं| बदन पर भी वह बस एक लंगोटी बांधे रखता था| लोग उसे 'ब्रह्मचारी' कहकर पुकारते थे|…

सही रास्ता

किसी नगर में एक साधु रहता था| उसके चेहरे पर हर घड़ी प्रसन्नता छाई रहती थी, उसके जीवन में मस्ती का साम्राज्य था| लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर उसके पास आते थे और संतुष्ट होकर जाते थे|

सदा नहीं डरते

किसी नगर में एक सेठ रहा करता था| वह बड़ा ही उदार और परोपकारी था| उसके दरवाजे पर जो भी आता था, वह उसे खाली हाथ नहीं जाने देता था और दिल खोलकर उसकी मदद करता था|

पहला साक्षात्कार

पांडिचेरी के श्रीअरविंद आश्रम के एक कक्ष में बैठा जब मैं माताजी के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा था, तब मेरे मस्तिष्क में विचारों का तूफान उठ रहा था, जिनकी ज्योति के आश्रम का कण-कण आलोकित था| जिनकी दिव्य प्रेरणा देश की परिधि को लांघकर विश्व के अनेक देशों में…

साधु का बोध

किसी नगर में एक सेठ रहता था| उसके पास लाखों की संपत्ति थी, बहुत बड़ी हवेली थी, नौकर-चाकर थे| फिर भी सेठ को शांति नहीं थी|

शांति का मार्ग

एक व्यापारी था| उसने व्यापार में खूब कमाई की| बड़े-बड़े मकान बनाए, नौकर-चाकर रखे, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उसके दिन फिर गए| व्यापार में घाटा आया और वह एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गया| जब उसकी परेशानी सहन से बाहर हो गई, तब वह एक साधु के…

भूत कुछ नहीं

किसी बस्ती में एक बालक रहता था| वह बड़ा निडर था| घूमते-घूमते वह अक्सर बस्ती के बाहर नदी के किनारे चला जाता था और थोड़ी देर वहां रुककर लौट आता था| उसके बाबा उसे बहुत प्यार करते थे| उन्हें लगा कि किसी दिन वह नदी में गिर न जाए! इसलिए…

गुस्से की शर्तिया दवा

एक स्त्री थी| उसे बहुत गुस्सा आता था| जरा-सी कोई बात होती कि उसका पारा चढ़ जाता और वह कहनी-अनकहनी सब तरह की बातें कह डालती|

सत्य की जीत

किसी जमाने में एक राजा था| वह बड़ा नेक था| अपनी प्रजा की भलाई के लिए प्रयत्न करता रहता था| उसने अपने राज्य में घोषणा करा दी थी कि शाम तक बाजार में किसी की कोई चीज न बचे, अगर बचेगी तो वह स्वयं उसे खरीद लेगा, इसलिए शाम को…

मंत्री की दूरदर्शिता

एक राजा था, उसका नाम था श्रेणिक| उसकी चेतना नाम की एक रानी थी, एक बार वे दोनों भगवान महावीर के दर्शन करके लौट रहे थे तो रानी ने देखा, भंयकर शीत में एक मुनि तप में लीन हैं| उनकी कठोर साधना के लिए उसने मन-ही-मन उन्हें बारम्बार प्रणाम किया|

बेजोड़ हौसला

बात उस समय की है, जब भारत स्वतंत्र नहीं हुआ था| एक बालक था| उसके अंदर देश-भक्ति कूट-कूटकर भरी थी| वह उन लोगों की बराबर मदद करता था, जो आजादी के दीवाने थे और गुलामी की जंजीरें तोड़ने के लिए जी-जान से जुटे थे|

निर्मल बुद्धि

बचपन में गांधीजी को लोग 'मोनिया' कहकर पुकारते थे| प्यार से 'मोहन' की जगह यह नाम लेते थे| मोनिया का शरीर दुबला था| उसे पेड़ों पर चढ़ना बहुत अच्छा लगता था| मंदिर के आंगन में पपीते और अमरूद के पेड़ थे| मोनिया उन पर चढ़कर पके फल तोड़ लाता|

भ्रमजाल

मिथिला नगरी के राजा जनक थे|

लालच का नतीजा

किसी नगर में ब्राह्मणों के चार लड़के रहते थे| वे चारों ही बड़े गरीब थे| उनमें आपस में गहरी मित्रता थी| अपनी गरीबी दूर करने के लिए उन्होंने बहुत-से उपाय किए, लेकिन उनका कष्ट दूर नहीं हुआ| आखिर परेशान होकर उन चारों ने निश्चय किया कि और कहीं जाकर उन्हें…

बिना सेवा में विद्या नहीं

एक फकीर था | वह जंगल में घास-फूस की कुटिया बनाकर रहता था| उसे एक विद्या आती थी, वह पीतल को सोना बना देता था, लेकिन इस विद्या का प्रयोग वह तभी करता था, जब उसे उसकी बहुत जरूरत होती थी और वह भी गरीबों के फायदे के लिए|

चलता-फिरता फरिश्ता

यह उन दिनों की बात है, जब चंपारन में किसानों का सत्याग्रह चल रहा था| गांधीजी की उस सेना में सभी प्रकार के सैनिक थे| जिसमें आत्मिक बल था, वे उस लड़ाई में शामिल हो सकते थे| सत्याग्रहियों में कुष्ठ रोग से पीड़ित एक खेतिहर मजदूर भी था उसके शरीर…

नया मोड़

किसी देश में एक राजा राज करता था| वह बहुत ही अभिमानी था| वह अपने बराबर किसी को नहीं समझता था| कारण, उसका राज्य बड़ा विशाल था|

साधु का नुस्खा

किसी नगर में एक आदमी रहता था| उसने परदेश के साथ व्यापार किया| मेहनत फली, कमाई हुई और उसकी गिनती सेठों में होने लगी| महल जैसी हवेली बन गई| वैभव और बड़े परिवार के बीच उसकी जवानी बड़े आनंद से बीतने लगी|

होनी-अनहोनी

प्राचीन समय में भद्राचलम नाम का एक राज्य था| उस राज्य का स्वामी महेन्द्रादित्य नाम का एक राजा था| राजा महेन्द्रादित्य के दो बेटे थे| बड़े बेटे का नाम सुबल कुमार और छोटे बेटे का नाम निर्मल कुमार था|

अपने-अपने कर्म

प्राचीन काल में हिमालय की तलहटी में विलासपुर नाम का एक नगर बसा हुआ था| उस नगर का राजा था - विनयशील! विनयशील की आयु जब ढलने लगी तो उसकी जवान रानियों ने उसकी उपेक्षा करनी शुरू कर दी| इससे राजा बहुत चिंतित हुआ| वह अपना यौवन पुन: प्राप्त करने…

कौन अच्छा कौन बुरा

प्राचीन काल में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) नगर में राजा विक्रमसेन का शासन था| इस प्रतापी राजा के पास 'विदग्ध चूणामणि' नाम का एक ऐसा तोता था, जिसे अपने दिव्य ज्ञान से समस्त शास्त्रों का ज्ञान था| वह विलक्षण लक्षणों से युक्त तोता बड़े ही सहज रूप में मनुष्यों की भाषा…

प्रारब्ध और पुरुषार्थ

प्राचीन काल में मालव देश में एक ब्राह्मण रहता था, जो बहुत ही धर्मनिष्ठ एवं भद्र पुरुष था| उसका नाम था - यज्ञदत्त! यज्ञदत्त के दो बेटे भी थे, जिनके नाम कालेनेमी एवं विगतभय थे|

गृहसेन और देवस्मिता

ताम्रलिप्ति नगर में धनदत्त नामक एक धनवान वैश्य रहता था| अत्यंत धनी होने पर भी वह संतानहीन था| पुत्र प्राप्त करने के लिए उसने अनेक उपाय किए| अंत में अनेक विद्वान ब्राह्मणों को बुलाकर उसने इस विषय में कुछ करने के लिए उनसे आग्रह किया| ब्राह्मणों ने कहा कि ऐसा…

श्रृंगभुज और रूपशिखा

यह कथा उस समय की है, जब वर्धमान नगर में राजा वीरभुज का शासन था| राजा वीरभुज को संसार के सभी भौतिक सुख उपलब्ध थे, किंतु संतान न होने का दुख उसे विदग्ध किए रहता था| संतान की लालसा में उसने एक-एक करके सौ विवाह किए थे, किंतु उसकी कोई…

लाश की गवाही

पूर्व काल में हर्षपुर नाम का एक विशाल नगर था| इस समृद्ध नगर का स्वामी राजा हर्षदत्त था, जिसके सुप्रबंध के कारण नगर की प्रजा बड़े सुख से रहती थी|

जुआरी को मिला स्वर्ग में स्थान

बहुत समय पहले की बात है, तब दक्षिण देश के कम्बुक नाम के नगर में एक ब्राह्मण रहता था| उसका नाम था - हरिदत्त| हरिदत्त नगर का एक संभ्रांत एवं साधन-संपन्न व्यक्ति था| धन-दौलत की उसके पास कोई कमी नहीं थी| उसे बस एक ही दुख था| उसके यहां कोई…

अंत भले का भला

प्राचीन काल में तक्षशिला नगरी में चंद्रहास नाम का एक राजा राज्य करता था| उसके पुत्र सोमेश्वर और राज्य के प्रधानमंत्री के पुत्र सोमेश्वर और राज्य के प्रधानमंत्री के पुत्र इन्द्रदत्त में बहुत घनिष्टता थी| दोनों ने काशी में जाकर अनेक विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया था| राजकुमार सोमेश्वर 'परकाया…

किसका अपराध सजा किसको

प्राचीन काल की बात है, रुरु नामक एक मुनि-पुत्र था| वह सदा घूमता रहता था| एक बार वह घूमता हुआ स्थूलकेशा ऋषि के आश्रम में पहुंचा| वहां एक सुंदर युवती को देख वह उस पर आसक्त हो गया|

धूर्तता का परिणाम

किसी समय में गंगा तट पर माकंदिका नाम की एक नगरी थी| वहां एक साधु रहता था, जिसने मौनव्रत धारण किया था| भिक्षा मांगना ही उसकी आजीविका का साधन था| वह साधु अपने अनेक शिष्यों के साथ एक बौद्ध विहार में रहता था| एक बार वह भिक्षा के लिए एक…

बुद्धि-चातुर्य से मिला सम्मान

प्राचीन काल में रुद्र शर्मा नामक एक ब्राह्मण की दो पत्नियां थीं| दुर्भाग्य से बच्चे को जन्म देते समय बड़ी पत्नी की मृत्यु हो गई, किंतु उससे उत्पन्न पुत्र बच गया, जिसका पालन-पोषण रुद्र शर्मा की छोटी पत्नी करने लगी|

लौहजंघ की कथा

इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा नगरी है| वहां रूपणिका नाम की एक वेश्या रहती थी| उसकी मां मकरदंष्ट्रा बड़ी ही कुरूप और कुबड़ी थी| वह कुटनी का कार्य भी करती थी| रूपणिका के पास आने वाले युवक उसकी मां को देखकर बड़े दुखी होते थे|

तरकीब कामयाब हुई

पुराने समय में महासेन नाम का एक अत्यंत वीर राजा था| दुर्भाग्य से एक बार वह युद्ध में शत्रु से हार गया| उसके मंत्री बड़े स्वार्थी थे, जिसके कारण उसे शत्रु राजा से दंडित भी होना पड़ा|

कहानी पाटलिपुत्र की

बहुत समय पहले हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण रहता था| उसके तीन बेटे थे| युवा होने पर ब्राह्मण ने उन्हें विद्या प्राप्त करने के लिए राजगृह भेज दिया| जब वे तीनों अपनी शिक्षा पूरी करके घर लौटे तो कुछ ही दिन पश्चात उनके पिता का देहांत…

शाप वरदान बन गया

प्राचीन काल में गंगातट पर बसे एक गांव बहुसुवर्ण में गोविंद दत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था| वह प्रकांड विद्वान और शास्त्रों का ज्ञाता था| उसकी पत्नी अग्निदत्ता परम पतिव्रता स्त्री थी| उनके पांच पुत्र थे, जो स्वस्थ और सुंदर तो थे, किंतु अभिमानी और मूर्ख थे| एक बार…

हिंसा का उत्तर प्रतिहिंसा नहीं

प्राचीन काल में कान्यकुब्ज (वर्तमान कन्नौज) नगर में शूरदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था| वह सौ गांवों का स्वामी था| उस राज्य का राजा बाहुदत्त भी उसका बहुत सम्मान करता था| शूरदत्त को समस्त सुख उपलब्ध थे, किंतु संतान न होने का दुख उसे सालता रहता था| उसने अनेक…

चतुराई से मिली जीत

प्राचीन काल में पाटलिपुत्र में वररुचि नाम का एक विद्वान ब्राह्मण युवक रहता था| वह भगवान शिव का परम भक्त था और प्रतिदिन नियमपूर्वक भगवान शिव के मंदिर में जाकर उनकी आराधना किया करता था| वररुचि की मंगनी पाटलिपुत्र की परम सुंदरी उपकोशा के साथ निश्चित हो चुकी थी, लेकिन…

मन पसंद दूल्हा

यह कहानी उस समय की है, जब अयोध्या में राजा वीरकेतु का शासन था| राजा वीरकेतु बहुत योग्य प्रशासक थे| उनके राज्य में प्रजा स्वयं को सुखी एवं सुरक्षित महसूस करती थी|

खेती कर शुभ कर्मों की

प्राचीन समय में सिंहल द्वीप में सिंह विक्रम नाम का एक चोर रहता था| दूसरों का धन चुराना ही उसकी आजीविका थी| इस प्रकार लोगों के यहां चोरी करके उसके बहुत-सा धन इकट्ठा कर लिया था|

क्षमा बड़ेन को चाहिए

किसी समय केदार पर्वत पर शुभनय नाम के एक महामुनि रहते थे| वे सदैव मंदाकिनी के जल में स्नान करते थे| उन्होंने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया था और कठोर तपस्या करते रहने के कारण उनकी काया कृश (दुबली-पतली) हो गई थी|

बाप सेर तो बेटा सवा सेर

प्राचीन काल में उज्जयिनी नामक नगरी में मूलदेव नाम का एक ब्राह्मण रहता था| वह बहुत विद्वान एवं चतुर था| उसने शास्त्रार्थ में कई पंडितों एवं विद्वानों को परास्त कर रखा था| इसी कारण वह वेदों एवं शास्त्रों का प्रकांड पंडित माना जाने लगा था|

छोटी-से चीज

किसी देश में एक बहुत ही न्यायप्रिय राजा था | वह अपनी प्रजा के हितों की रक्षा करना भली-भांति जानता था | उसने अनेक गुप्तचरों को नियुक्त कर रखा था, जो देश के लोगों के हालात की सही जानकारी दे सकें |

अपना अन्दाजा

प्राचीनकाल में एक व्यापारी था | जिसका नाम था नजूमी | उसने अपने पिता का व्यापार कुछ समय पहले संभाला था |

चांगी-मांगी

एक बार एक गांव में दो भाई रहा करते थे | उनका नाम था चांगी और मांगी | कहने को तो वे दोनों सगे भाई थे परंतु उनकी आदत एक दूसरे के विपरीत थी |

वफादारी

बहुत पहले की बात है | अफ्रीका में मंडल नाम का एक व्यक्ति रहता था | उसके पास ढेरों गाएं थीं | इसके अतिरिक्त बकरियां, हिरन व घोड़े भी उसने पाल रखे थे |

सौदागर

एंडी और मैंडी बहुत पक्के मित्र थे | वे बचपन से ही स्कूल में साथ पढ़े थे | जब वे युवा हुए तो उन्होंने तय किया कि वे दोनों अपना व्यापार भी एक साथ करेंगे |

रुपाली और जादूगर

सूरजगढ़ देश में एक राजा था हुकुम सिंह | उसके राज्य में सब तरफ सुख-शांति थी | प्रजा बहुत मेहनती और सुखी थी | चारों ओर हरियाली और खुशहाली का साम्राज्य था |

किस्मत

चंदन नगर का राजा चंदन सिंह बहुत ही पराक्रमी एवं शक्तिशाली था | उसका राज्य भी धन-धान्य से पूर्ण था | राजा की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी |

राजकुमारी की बीमारी

मोहनपुर नामक गांव में एक राजा माधो सिंह राज्य करता था | उसकी एक ही बेटी थी | राजा अपनी बेटी मोहिनी को बहुत प्यार करता था |

मेहनत का फल

राजकुमारी रोजी की खूबसूरती की हर जगह चर्चा थी | सुनहरी आंखें, तीखे नयन-नक्श, दूध-सी गोरी काया, कमर तक लहराते बाल सभी सुंदरता में चार चांद लगाते थे |

कौन बड़ा मुर्ख

एक बूढ़ी औरत के दो बेटे थे | उनका नाम इवान और तात्या था | वह दोनों को बहुत प्यार करती थी | एक बार एक दुर्घटना में बुढ़िया का बेटा तात्या मारा गया |

ढोलक का राज

एक गांव में एक नाई रहता था | उसका काम था लोगों की इजामत बनाना | उसकी एक बुरी आदत थी कि उसके पेट में कोई बात पचती नहीं थी | अत: इधर की बातें उधर बताने का उसे शौक था |

मुसीबत का छूटकारा

एक गांव में दो दोस्त रहते थे | एक का नाम था मार्युश्का और दूसरे का इल्यानोव | दोनों एक दूसरे पर जान छिड़कते थे |

एक मशहूर ठग

एक औरत थी डल्ला |वह बहुत बड़ी ठग थी | अपनी चालाकी से लोगों को ठगना उसके लिए बाएं हाथ का खेल था | वह चुटकियों में लोगों को बेवकूफ बना देती थी |

पतंग का कमाल

चिंग किंग नाम का एक लड़का शिकोकू नामक कस्बे में रहता था | शिकोकू में चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी | ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा था शिकोकू कस्बा |

बदसूरत मेंढक

बलसोरा के बादशाह का राज्य धनधान्य से पूर्ण था | किसी भी प्रकार की कोई कमी न थी | उनकी एक प्यारी-सी बेटी थी जिनी | उसके काले घुंघराले बाल, घनी पलकें, तीखे नयन-नक्श, हर किसी को अपनी ओर आकृष्ट करते रहते थे |

बुद्धिमत्ता की परीक्षा

एक बार पोर्ट नदी के किनारे एक सुंदर राज्य बसा था | राज्य का नाम था लीगोलैंड | लीगोलैंड में इवानुश्का नाम का राजा राज्य करता था | राजा अपनी विद्वत्ता के लिए प्रसिद्ध था |

देश प्रेम

अफ्रीका में एक छोटे से देश का नाम इथियोपिया है | वहां के लोग अपने देश से बहुत प्रेम करते हैं | ऐसा कहा जाता है कि यह कहानी उस देश में बहुत लोकप्रिय है |

बांसुरी की धुन

एक बार एक गांव में एक लड़का रहता था | उसके मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे | इस दुनिया में उसका सगा कोई न था | उसके जन्म लेते ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी | सब लोग उसे कैनी कहकर पुकारते थे |

हृदय परिवर्तन

प्रतापगढ़ का राजा मंगलसेन शूरवीर और पराक्रमी था | उसका साम्राज्य दूर-दूर तक फैला था | वह प्रतिदिन शाम को एक अदालत लगाता था, जिसमें जनता की समस्याओं को सुनता था | उसका सदैव यही प्रयास रहता था कि उसके राज्य में सभी सुखी हों | वह उनकी परेशानियों को…

चितकबरे जूते

चांग ची बहुत रईस आदमी था | उसने अपने लिए अपार दौलत जमा कर रखी थी | उसकी पत्नी उसे लाख समझाती थी कि इतनी कंजूसी अच्छी बात नहीं, परंतु वह मानता ही नहीं था |

तीसमार खां

फन्टूश एक शैतान और नटखट लड़का था | उसका पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था | घर वाले उसे समझाते थे कि यदि तुम पढ़ोगे-लिखोगे नहीं तो तुम्हारा जीवन व्यर्थ हो जाएगा | वे कहते थे कि पुस्तकों में ज्ञान का भंडार है, ये तुम्हें ऐसी बातों का ज्ञान…

कंजूस-मक्खीचूस

एक नगर में शमशाद नाम का एक व्यापारी रहता था | उसका कारोबार दूर-दूर तक फैला था | वह बहुत अमीर था | लेकिन वह पहले दर्जे का कंजूस था | एक-एक पैसा वह देखभाल कर खर्च करता था |

कुत्ते की वफादारी

अनातो एक सीधा-सादा, भोला-भाला किसान था | वह अपनी पैतृक जमीन पर खेती करने में सारा दिन बिता देता था, शाम को घर आकर भोजन खाकर से जाता था |

समय का फेर

एक गांव में हैदर नाम का एक व्यापारी रहता था | गांव में उसकी परचून की दुकान थी | दुकान खूब अच्छी चलती थी क्योंकि परचून की गांव में वह एकमात्र दुकान थी |

मुफ्त की चाकरी

गोटिया बहुत ही नटखट लड़का था | उसका दिमाग हरदम शैतानियों में ही लगा रहता था | सब लोग गोटिया की शरारतों से तंग आ चुके थे | गोटिया के मामा चाहते थे कि वह उनके कामों में हाथ बंटाए, परंतु गोटिया का न तो काम में मन लगता था,…

बेचारा कुंवर

एक बार एक गांव में एक किसान रहता था, परिवार अत्यंत गरीब था और उनकी रोटी की गुजर-बसर मुश्किल से ही हो पाती थी | किसान के विवाह को आठ वर्ष हो चुके थे | परंतु उनके कोई संतान न थी | किसान और उसकी पत्नी को गरीबी का इतना…

जैसी करनी वैसी भरनी

एक गांव में रमीना अपने पति व चार बेटों के साथ रहती थी | वह अपने व अपने परिवार के साथ खूब खुशहाल थी | वह मध्यम आय वाला परिवार था | अत: रमीना परिवार की कमाई का अधिकांश भाग बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती थी | पिता भी…

नेकी का इनाम

बुलबुल बहुत ही भोली-भाली लड़की थी | छल-कपट उसे छू तक नहीं गया था | उसके स्वभाव के विपरीत उसकी एक बहन थी - नाम था रीना | रीना चालाक, मक्कार और आलसी थी |

अनोखी तरकीब

देवधर और मंगल की मित्रता ऐसी थी, जैसे दोनों एक ही शरीर के दो अंग हों | यदि एक को चोट लगती तो तकलीफ दूसरे को होती | वे दोनों बचपन से ही मित्र थे |

निन्यानवे का चक्कर

प्राचीनकाल की बात है | असम के ग्रामीण इलाके में तीरथ नाम का कुम्हार रहता था | वह जितना कमाता था, उससे उसका घर खर्च आसानी से चल जाता था | उसे अधिक धन की चाह नहीं थी | वह सोचता था कि उसे अधिक कमा कर क्या करना है…

अनन्त लालसा

बिरजू एक गरीब चरवाहा था | दिन भर दूसरों की गाएं चराकर शाम को थका-मांदा घर लौटता था | उसकी कमाई केवल इतनी थी कि मुश्किल से एक वक्त की रोटी जुटा पाता था |

पिता की सीख

सेठ जानसन के पास धन-दौलत और ऐशो-आराम की कोई कमी न थी | उसका गांव में बहुत बड़ा व्यापार था | लोग उसकी इज्जत करते थे |

कमाल का दिन

खजूरी इतनी बातूनी थी कि जहां कहीं उसे कोई बात करने वाले मिल जाए, वह उसे ढेर सारी बातें सुनाए बिना नहीं छोड़ती थी | गांव में उसकी ढेरों सहेलियां थीं | उसका जब कभी बातें करने का मन करता तो कभी किसी के घर चली जाती, तो कभी किसी…

बातों का फेर

गांव में किसान के बेटे की शादी का मौका था | घर में खूब रौनक हो रही थी | स्त्रियां घर में खुशी के गीत गा रही थीं | बाहर चबूतरे पर घर के तथा गांव के अनेक लोग जमा थे |

चम्मच का सूप

एक बार एक किसान किसी काम से शहर गया | जैसे ही शाम होने लगी, उसे लगा कि उसे तुरंत गांव लौट जाना चाहिए | अगर देर हो गई तो अंधेरे में घर पहुंचना मुश्किल हो जाएगा | वह अपना काम अधूरा छोड़कर गांव की ओर चल दिया |

जैसे को तैसा

सिमकी का गरीबी के मारे बुरा हाल था | उसके घर में कई-कई दिन तक भोजन नसीब नहीं होता था | उसकी पत्नी रोजिया उसे रोज समझाती कि समझ और मेहनत से काम किया करो, परंतु सिमकी बहुत सीधा, भोला-भाला, मासूम था | इसी कारण हर जगह धोखा खा जाता…

करामाती दाना

बहुत पहले की बात है | एक भिखारी सड़क के किनारे रहा करता था | उसका न तो कोई रहने का ठिकाना था और न ही कमाई का कोई निश्चित जरिया |

प्यार के बदले प्यार

एक गांव के किनारे बनी कुटिया में एक साधु रहता था | वह दिन भर ईश्वर का भजन-कीर्तन करके समय बिताता था | उसे न तो अपने भोजन की चिंता रहती थी और न ही धन कमाने की | गांव के लोग स्वयं ही उसे भोजन दे जाते थे |

बातूनी

किसी गांव में एक लड़का रहता था | उसका नाम था रेम्स | रेम्स अत्यंत बातूनी लड़का था | वह अपनी बातों से अक्सर लोगों को प्रभावित कर लेता था |

ईर्ष्या

बहुत पहले की बात है | एक गरीब किसान एक गांव में रहता था | उसके पास एक बहुत छोटा सा खेत था जिसमें कुछ सब्जियां उगा कर वह अपना व अपने परिवार का पेट पालता था |

बुद्धिमान

एक चरवाहे का बेटा चीमो हर रोज अपनी भेड़ें चराने के लिए मैदान में जाया करता था | वह रोज सुबह भेड़ों को लेकर हरे-भरे मैदानों की ओर चल पड़ता था | सूरज डूबने से पहले ही वह घर को वापस चल देता था |

मुक्ति

एक गांव में एक जार रहता था | उसके तीन बेटे थे | वह चाहता था कि उसके बेटों का विवाह बहुत सुंदर और सुशील लड़कियों से हो | परंतु अपनी इच्छानुसार लड़कियां मिलना आसान नहीं था |

मेहनती लड़की

इंग्लैंड के एक गांव में मार्शल नामक फलों का व्यापारी रहता था | उसका व्यापार बहुत अच्छा था | मार्शल का बेटा थामस पढ़-लिख कर अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने लगा था | वह खूब मेहनती और होशियार था | पिता को अपने पुत्र की काबिलियत पर गर्व…

मूर्खों की दुनिया

एक गांव में करैलची नाम का एक किसान रहता था | उसकी आमदनी इतनी अच्छी थी कि अपनी पत्नी और बेटी का पेट आसानी से पाल सके | करैलची ने अपनी बेटी किराली को बहुत लाड़-प्यार से पाला था | किराली अपने पिता को बहुत प्यार करती थी |

मखमली चप्पल

शहनाज बेगम अपने गरीब माता-पिता की आखिरी संतान थी | उसके छह भाई-बहन थे जो उससे बड़े थे | उसके माता-पिता ने उसके भाई-बहनों का विवाह कर दिया था |

तरकीब

सर्दियों के दिन थे | कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी | इस सर्दी में किसी को भी घर से बाहर निकलना अच्छा नहीं लगता था | एक दिन एक व्यापारी को किसी काम से शहर जाना पड़ा | वह अपने घोड़े पर सवार होकर चल दिया | सर्दी के…

शेखी का परिणाम

अनोवा और ग्रीट्स बहुत पक्के मित्र थे | वे एक दूसरे पर जाने छिड़कने को तैयार रहते थे | उन्हीं दिनों उनको मोरियो नामक एक व्यक्ति मिला | वह भी उन लोगों से मित्रता बढ़ाने लगा |

पत्तों का कमाल

प्राचीनकाल की बात है | तब वहां पेड़ों में पत्ते नहीं हुआ करते थे | पशु, पक्षी, मानव सभी को बिना पत्तों के पेड़ देखने की आदत थी | तब उन सभी की आदतें व मौसम सहने की शक्ति उसी के अनुसार होती थी | तब सर्दी के मौसम में…

अनन्त इच्छा

एक बार की बात है, एक राजा अपने देश के पड़ोस में सैर के लिए निकला | उसने देखा वहां की धरती बहुत उपजाऊ थी, चारों ओर फसलें लहलहा रही थीं | राजा मन में सोचने लगा कि कितना अच्छा होता यदि वह सुंदर और उपजाऊ क्षेत्र उसके राज्य में…

मुसीबत का सारा

आसिफ शेख कपड़े का बहुत बड़ा व्यापारी था | उसने ढेरों दौलत जमा कर रखी थी | उसका व्यापार आस-पास के देशों में भी फैल चुका था | वह कभी-कभी उन देशों की यात्रा भी किया करता था | जब उसका बेटा जवान हो गया तो वह पिता के व्यापार…

चोरी की सजा

एक गांव में एक बूढ़ा किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था | उसका एक छोटा-सा खेत था | उस खेत में ही कुछ सब्जियां बोकर और उन्हें बेचकर किसान अपना व अपनी पत्नी का गुजारा करता था |

रैवत

प्राचीन काल में अतवाक नाम के एक महर्षि थे| बहुत समय तक उनकी पत्नी के गर्भ से कोई भी पुत्र पैदा नहीं हुआ, इस कारण वे बड़े दुखी रहते थे, लेकिन फिर विधाता की इच्छा को ही अंतिम सत्य मानकर अपने भाग्य पर संतोष कर लेते थे|

नृग

एक बार द्वारिका निवासी यदुकुल के कुछ लड़के पानी ढूंढ़ते हुए एक पुराने कुएं के पास पहुंचे| वह कुआं घास और फैली हुई बेलों से पूरी तरह ढका हुआ था| लड़कों ने घास हटाकर देखा तो कुएं में उन्हें एक बड़ा गिरगिट दिखाई पड़ा| उस गिरगिट को उन्होंने बाहर निकालना…

जनमेजय और सरमा

एक बार जनमेजय अपने भाई श्रुतसेन, और भीमसेन के साथ यज्ञ कर रहे थे| उस बीच एक कुत्ता यज्ञशाला में घुस गया| कुत्ते को उस पवित्र यज्ञशाला में देखकर सभी बड़े क्रुद्ध हुए और जनमेजय के तीनों भाइयों ने उस कुत्ते को खूब मारा, जिससे कुत्ता रोता हुआ अपनी मां…

माया

माया क्या है? भ्रम| जो दिख रहा है, वह सत्य लगता है, यह भ्रम है| शरीर ही सबकुछ है, भ्रम है| नष्ट हो जाने वाली वस्तुएं शाश्वत हैं, भ्रम है| मकान-जायदाद, मेरी-तेरी, भ्रम है| रिश्ते-नाते सत्य हैं, भ्रम है... यही माया है| मैं, मेरा, तेरा, तुम्हारा| और जो व्यक्ति इससे…

जब हनुमान ने तीनों का घमण्ड चूर किया

संसार में किसी का कुछ नहीं| ख्वाहमख्वाह अपना समझना मूर्खता है, क्योंकि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना नहीं होता| इसलिए हैरानी होती है, घमण्ड क्यों? किसलिए? किसका? कुछ रुपये दान करने वाला यदि यह कहे कि उसने ऐसा किया है, तो उससे बड़ा मुर्ख और कोई नहीं और…

श्रीकृष्ण दौड़े चले आए

अर्जुन ने अपने-आपको श्रीकृष्ण को समर्पित कर दिया था| अर्जुन होता हुआ भी, नहीं था, इसलिए कि उसने जो कुछ किया, अर्जुन के रूप में नहीं, श्रीकृष्ण के सेवक के रूप में किया| सेवक की चिंता स्वामी की चिंता बन जाती है|

हनुमान जी और भीम

भीम को यह अभिमान हो गया था कि संसार में मुझसे अधिक बलवान कोई और नहीं है| सौ हाथियों का बल है उसमें, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता... और भगवान अपने सेवक में किसी भी प्रकार का अभिमान रहने नहीं देते| इसलिए श्रीकृष्ण ने भीम के कल्याण के लिए…

धर्मराज को श्राप

एक धर्मात्मा ब्राह्मण थे, उनका नाम मांडव्य था| वे बड़े सदाचारी और तपोनिष्ठ थे| संसार के सुखों और भोगों से दूर वन में आश्रम बनाकर रहते थे| अपने आश्रम के द्वार पर बैठकर दोनों भुजाओं को ऊपर उठाकर तप करते थे| वन के कंद-मूल-फल खाते और तपमय जीवन व्यतीत करते|…

प्रतिज्ञा

भगवान श्रीराम जब समुद्र पार कर लंका जाने के लिए समुद्र पर पुल बांधने में सलंग्न हुए, तब उन्होंने समस्त वानरों को संकेत दिया कि, 'वानरो ! तुम पर्वतों से पर्वत खण्ड लाओ जिससे पुल का कार्य पूर्ण हो जाए|' आज्ञा पाकर वानर दल भिन्न-भिन्न पर्वतों पर खण्ड लाने के…

दिगंबर की भक्तिनिष्ठा

संसृति मूल सूलप्रद नाना | सकल सोक दायक अभिमाना || तेहि ते करहिं कृपानिधि दूरी | सेवक पर ममता अति भूरी ||

पेट दर्द की विचित्र औषधि

प्राय: भगवान श्रीकृष्ण की पटरानियां ब्रजगोपियों के नाम से नाक-भौं सिकोड़ने लगतीं| इनके अहंकार को भंग करने के लिए प्रभु ने एक बार एक लीला रची| नित्य निरामय भगवान बीमारी का नाटक कर पड़ गए| नारद जी आए| वे भगवान के मनोभाव को समझ गए| उन्होंने बताया कि इस रोग…

धीरता की पराकाष्ठा

जिन दिनों महाराज युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ का उपक्रम चल रहा था, उन्हीं दिनों रत्नपुराधीश्वर महाराज मयूरध्वज का भी अश्वमेधीय अश्व छुटा था, पाण्डवीय अश्व की रक्षा में श्रीकृष्ण, अर्जुन थे, उधर ताम्रध्वज ! मणिपुर में दोनों की मुठभेड़ हो गई| युद्ध में भगवदेच्छा से ही अर्जुन को पराजित करके…

धर्मराज की धार्मिकता

महाराज युधिष्ठिर ने जब सुना कि श्रीकृष्ण ने अपनी लीला का संवरण कर लिया है और यादव परस्पर कलह से ही नष्ट हो चुके हैं, तब उन्होंने अर्जुन के पौत्र परीक्षित का राजतिलक कर दिया| स्वयं सब वस्त्र एवं आभूषण उतार दिए| मौन व्रत लेकर, केश खोले, संन्यास लेकर वे…

दूषित अन्न का प्रभाव

महाभारत युद्ध समाप्त हो गया था| धर्मराज युधिष्ठिर एकछत्र सम्राट हो गए थे| श्रीकृष्ण की सम्मति से रानी द्रौपदी तथा अपने भाइयों के साथ वे युद्धभूमि में शरशय्या पर पड़े प्राण त्याग के लिए सूर्यदेव के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते परम धर्मज्ञ भीष्म पितामह के समीप आए थे| युधिष्ठिर…

उत्तम दान की महत्ता

महाराज युधिष्ठिर कौरवों को युद्ध में पराजित करके समस्त भूमण्डल के एकछत्र सम्राट हो गए थे| उन्होंने लगातार तीन अश्वमेध यज्ञ किए| उन्होंने इतना दान किया कि उनकी दानशीलता की ख्याति देश-देशांतर में फैल गई| पाण्डवों के भी वन में यह भाव आ गया कि उनका दान सर्वश्रेष्ठ एवं अतुलनीय…

किरात से युद्ध

हिमालय की तराई में एक सघन वन था| वन में तरह-तरह के पशु-पक्षी रहते थे| वहीं जगह-जगह ऋषियों की झोंपड़ियां भी बनी हुई थीं| ऐसा लगता था मानो प्रकृति ने अपने हाथों से उस वन को संवारा हो| उन्हीं झोंपड़ियों के पास एक तेजस्वी युवक बहुत दिनों से अंगूठे के…

द्रुपद का पुत्रेष्टि यज्ञ

प्राचीन भारत में पुत्रेष्टि यज्ञ के द्वारा तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने की प्रथा थी| जब किसी बहुत बड़े नृपति को संतान का अभाव दुख देता था, तो वह ऋषियों और महात्माओं के द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराता था| यज्ञ के कुंड से हवि बाहर निकलती थी| उस हवि को खाने से…

गर्व-भंग

संध्या के पूर्व का समय था| एकचक्रा नगर के एक मकान के एक कमरे में सात मनुष्य बैठे हुए परस्पर वार्तालाप कर रहे थे| मकान उस ब्राह्मण का था, जिसके घर में पांडव अपनी मां कुंती के साथ टिके हुए थे| सात मनुष्यों में पांच तो स्वयं पांडव थे, एक…

कुंती का त्याग

पाण्डव अपनी मां कुंती के साथ इधर से उधर भ्रमण कर रहे थे| वे ब्राह्मणों का वेश धारण किए हुए थे| भिक्षा मांगकर खाते थे और रात में वृक्ष के नीचे सो जाया करते थे| भाग्य और समय की यह कैसी अद्भुत लीला है| जो पांडव हस्तिनापुर राज्य के भागीदार…

दुरभिमान का परिणाम

बर्बरीक भीमसेन का पोता और उनके पुत्र घटोत्कच का पुत्र था| इसकी माता मौवीं थीं, जिसे शस्त्र, शास्त्र तथा बुद्धि द्वारा पराजित कर घटोत्कच ने ब्याहा था| बर्बरीक बड़ा वीर था, इसने एक बार भीमसेन को अत्यंत साधारण युद्ध-कौशल से पराजित कर दिया था| जब पांडवों के वनवास का तेरहवां…

धैर्य से पुन: सुख की प्राप्ति

एक बार युधिष्ठिर ने पितामह भीष्म ने पूछा, "पितामह ! क्या आपने कोई ऐसा पुरुष देखा या सुना है, जो एक बार मरकर पुन: जी उठा हो?"

परस्त्री में आसक्ति मृत्यु का कारण होती है

द्रौपदी के साथ पाण्डव वनवास के अंतिम वर्ष अज्ञातवास के समय में वेश तथा नाम बदलकर राजा विराट के यहां रहते थे| उस समय द्रौपदी ने अपना नाम सैरंध्री रख लिया था और विराट नरेश की रानी सुदेष्णा की दासी बनकर वे किसी प्रकार समय व्यतीत कर रही थीं|

कपटी शकुनि

शकुनि गांधारराज सुबल का पुत्र था| गांधारी इसी की बहन थी| वह गांधारी के स्वभाव से विपरीत स्वभाव वाला था| जहां गांधारी के स्वभाव में उदारता, विनम्रता, स्थिरता और साधना की पवित्रता थी, वहीं शकुनि के स्वभाव में कुटिलता, दुष्टता, छल और दुराचार का अधिकार था| वह जीवन के उदात्त…

सत्कार से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं

शल्य ही बहन माद्री का विवाह पाण्डु से हुआ था| नकुल और सहदेव उनके सगे भांजे थे| पांडवों को पूरा विश्वास था कि शल्य उनके पक्ष में युद्ध में उपस्थित रहेंगे| महारथी शल्य की विशाल सेना दो-दो कोस पर पड़ाव डालती धीरे-धीरे चल रही थी| शल्य पांडव पक्ष की ओर…

धर्मोरक्षति रखित:

वनवास के समय पाण्डव द्वैत वन में थे| वन में घूमते समय एक दिन उन्हें प्यास लगी| धर्मराज युधिष्ठिर ने वृक्ष पर चढ़कर इधर-उधर देखा| एक स्थान पर हरियाली तथा जल होने के चिह्न देखकर उन्होंने नकुल को जल लाने भेजा| नकुल उस स्थान की ओर चल पड़े| वहां उन्हें…

ऐसे बचाई द्रौपदी की लाज

युधिष्ठिर जुए में अपना सर्वस्व हार गए थे| छलपूर्वक, शकुनि ने उनका समस्त वैभव जीत लिया था| अपने भाइयों को, अपने को और रानी द्रौपदी को भी बारी-बारी से युधिष्ठिर ने दांव पर रखा| जुआरी की दुराशा उसे बुरी तरह ठगती रहती है - 'कदाचित अबकी बार सफलता मिले|' किंतु…

मंगलकारी बन गया शाप

पांडव वनवास का जीवन व्यतीत कर रहे थे| भगवान व्यास की प्रेरणा से अर्जुन अपने भाइयों की आज्ञा लेकर तपस्या करने गए| तप करके उन्होंने भगवान शंकर को प्रसन्न किया, आशुतोष ने उन्हें अपना पाशुपतास्त्र प्रदान किया| इसके अनंतर देवराज इंद्र अपने रथ में बैठाकर अर्जुन को स्वर्गलोक ले गए|…

धन्य कौन

एक बार भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर से दुर्योधन के यज्ञ से निवृत्त होकर द्वारका लौटे थे| यदुकुल की लक्ष्मी उस समय ऐंद्री लक्ष्मी को भी मात कर रही थी| सागर के मध्य स्थित श्री द्वारकापुरी की छटा अमरावती की शोभा को और भी तिरस्कृत कर रही थी| इंद्र इससे मन ही…

विश्वास हो तो भगवान सदा समीप हैं

दुर्योधन के कपट-द्यूत में सर्वस्त्र हारकर पांडव द्रौपदी के साथ काम्यक वन में निवास कर रहे थे, परंतु दुर्योधन के चित्त को शांति नहीं थी| पांडवों को कैसे सर्वथा नष्ट कर दिया जाए, वह सदा इसी चिंता में रहता था| संयोगवश महर्षि दुर्वासा उसके यहां पधारे और कुछ समय तक…

सच्ची लगन क्या नहीं कर सकती

द्रोणाचार्य उन दिनों हस्तिनापुर में गुरुकुल के बालक पांडव एवं कौरवों को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दे रहे थे|

मायावी घटोत्कच

भीमसेन का विवाह हिडिंबा नाम की एक राक्षसी के साथ भी हुआ था| वह भीमसेन पर आसक्त हो गई थी और उसने स्वयं आकर माता कुंती से प्रार्थना की थी कि वे उसका विवाह भीमसेन के साथ करा दें| कुंती ने उस विवाह की अनुमति दे दी, लेकिन भीमसेन ने…

कृतवर्मा

कृतवर्मा हृदिक का पुत्र था| वह बड़ा शूरवीर था, लेकिन साथ में कुटिल और क्रूर प्रकृति का भी था| उसने कौरवों के पक्ष में खड़े होकर पाण्डवों के विरुद्ध युद्ध किया था| उसकी वीरता को देखकर पितामह भीष्म ने उसको अतिरथी और श्रीकृष्ण ने महारथी कहा था| महाभारत युद्ध में…

राजकुमार उत्तर

राजा विराट के पुत्र का नाम उत्तर था| वह स्वभाव से बड़ा दंभी, सदा अपने पराक्रम का बखान करने वाला था| पांडव अपने अज्ञातवास का समय विराट के यहां व्यतीत कर रहे थे, इसलिए कोई भी इस भय से कि कहीं उनके सही रूप का पता न चल जाए, उसकी…

गुरु की सेवा

कर्ण की उम्र सोलह-सत्रह वर्ष की हो चुकी थी| सारे हस्तिनापुर में वह प्रसिद्ध था| घर-घर में उसके संबंध में चर्चा होती थी - अधिरथ सारथि का पुत्र बड़ा विचित्र है| देखने में वह दूसरा सूर्य लगता है| उसके कानों में कुण्डल और छाती पर कवच है| कहते हैं, वह…

लाख का घर

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद जिले में एक तहसील है - हड़िया| हड़िया को मुंशीगंज भी कहते हैं| हड़िया से एक सड़क गंगा के तट की ओर एक बहुत बड़े गांव की ओर जाती है| उस गांव का नाम लाक्षागृह है| लाक्षागृह में बड़े-बड़े टीले भी मिलते हैं| लाक्षागृह का अर्थ…

शौर्य-परीक्षा

कौरव और पांडव राजकुमारों ने शस्त्र विद्या तो सीख ही ली थी, शास्त्रों का ज्ञान भी प्राप्त कर लिया था| वे सब वयस्क हो गए थे, जनता में अपना वर्चस्व स्थापित करने लगे थे| कौरव और पांडव दोनों हस्तिनापुर के विशाल साम्राज्य के दावेदार थे| दोनों का समान भाग था,…

अर्जुन-कृष्ण युद्ध

एक बार महर्षि गालव जब प्रात: सूर्यार्घ्य प्रदान कर रहे थे, उनकी अंजलि में आकाश मार्ग में जाते हुए चित्रसेन गंधर्व की थूकी हुई पीक गिर गई| मुनि को इससे बड़ा क्रोध आया| वे उए शाप देना ही चाहते थे कि उन्हें अपने तपोनाश का ध्यान आ गया और वे…

कर्ण की दानवीरता

महाभारत के युद्ध का सत्रहवां दिन समाप्त हो गया था| महारथी कर्ण रणभूमि में गिर चुके थे| पांडव-शिविर में आनंदोत्सव हो रहा था| ऐसे उल्लास के समय श्रीकृष्ण खिन्न थे| वे बार-बार कर्ण की प्रशंसा कर रहे थे, "आज पृथ्वी से सच्चा दानी उठ गया|"

दानवीर कर्ण

कर्ण कुंती का पुत्र था| पाण्डु के साथ कुंती का विवाह होने से पहले ही इसका जन्म हो चुका था| लोक-लज्जा के कारण उसने यह भेद किसी को नहीं बताया और चुपचाप एक पिटारी में रखकर उस शिशु को अश्व नाम की नदी में फेंक दिया था| इसके जन्म की…

सच्चा वीर युयुस्सु

धृतराष्ट्र के एक वैश्य वर्ण की पत्नी थी| उसी के गर्भ से युयुत्सु का जन्म हुआ था| युयुत्सु का स्वभाव गांधारी के सभी पुत्रों से बिलकुल अलग था| वह आपसी कलह और विद्वेष का विरोधी था और सदा धर्म और न्याय की बातें करता था, लकिन चूंकि सत्ता गांधारी के…

शौर्य का प्रतिरूप अभिमन्यु

अभिमन्यु अर्जुन का पुत्र था| श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा इनकी माता थी| यह बालक बड़ा होनहार था| अपने पिता के-से सारे गुण इसमें विद्यमान थे| स्वभाव का बड़ा क्रोधी था और डरना तो किसी से इसने जाना ही नहीं था| इसी निर्भयता और क्रोधी स्वभाव के कारण इसका नाम अभि…

परम भिक्षा

संध्या का समय था| सूर्य अस्त हो चुका था| ब्राह्मण कुमारों के वेश में पांडव द्रौपदी को साथ लिए हुए अपनी मां के पास गए| कुंती कुम्हार के घर में, कमरे का दरवाजा बंद करके भीतर बैठी हुई थी| युधिष्ठिर ने कमरे में द्वार पर खड़े होकर कहा, "मां, दरवाजा…

अपमान का बदला

द्रोणाचार्य का जीवन बड़े सुख से व्यतीत हो रहा था| उन्हें हस्तिनापुर राज्य की ओर से अच्छी वृत्ति तो मिलती ही थी, अच्छा आवास भी मिला हुआ था| राजकुटुंब के छोटे-बड़े सभी लोग उन्हें मस्तक झुकाया करते थे| स्वयं देवव्रत भी उनका बड़ा आदर किया करते थे| पर्व और त्योहारों…

महान योद्धा अश्वत्थामा

अश्वत्थामा द्रोणाचार्य का पुत्र था| कृपी उसकी माता थी| पैदा होते ही वह अश्व की भांति रोया था| इसलिए अश्व की भांति स्थाम (शब्द) करने के कारण उसका नाम अश्वत्थामा पड़ा था| वह बहुत ही क्रूर और दुष्ट बुद्धि वाला था| तभी पिता का उसके प्रति अधिक स्नेह नहीं था|धर्म…

कृपी

कृपी महर्षि शरद्वान की पुत्री थी| इनकी माता जानपदी नाम की एक देवकन्या थी| कृपी का जीवन सदा दुर्भाग्य और आपत्तियों से संघर्ष करते हुए ही बीता| बचपन में तो माता-पिता उसे निर्जन वन में रोता-बिलखता छोड़कर चले गए थे, तब महाराज शांतुन के सैनिक ने लाकर उसे अपने यहां…

द्रोण गुरु के पद पर

गुरु द्रोणाचार्य ब्राह्मण थे, धनुर्विद्या के महान आचार्य थे, पर बड़े गरीब थे| इतने गरीब थे कि जीवन का निर्वाह होना कठिन था| घर में कुल तीन प्राणी थे - द्रोणाचार्य स्वयं, उनकी पत्नी और उनका पुत्र अश्वत्थामा| पुत्र की अवस्था पांच-छ: वर्ष की थी|

कृपाचार्य

कृपाचार्य महर्षि शरद्वान के पुत्र थे| महर्षि शरद्वान महर्षि गौतम के पुत्र थे, इसी कारण इनको गौतम भी कहते थे| वे धनुर्विद्या में पूर्ण पारंगत थे| इंद्र भी इनकी असाधारण पटुता देखकर इनसे डरने लगा था| तभी तो इसने उनको भ्रष्ट करने के लिए जानपदी नाम की एक देवकन्या इनके…

धनुर्धर अर्जुन

अर्जुन कुंती का सबसे छोटा पुत्र था| इसके पिता का नाम पाण्डु था, लेकिन वास्तविक पिता तो इसका इंद्र था| पाण्डु रोगग्रस्त था और पुत्र पैदा करने की उसमें सामर्थ्य नहीं थी| इसी कारण उसने कुंती को अन्य पुरुषों के साथ रमण करने की आज्ञा दे दी थी, जिससे पुत्रों…

महाबली भीमसेन

भीमसेन कुंती का दूसरा पुत्र था| इसका जन्म पवन देवता के संयोग से हुआ था, इसी कारण इसमें पवन की-सी शक्ति थी| इसके उदर में वृक नामक तीक्ष्ण अग्नि थी, इसीलिए इसका नाम वृकोदर भी पड़ा| जिस समय इसका जन्म हुआ, उसी समय आकाशवाणी हुई थी कि भीमसेन वीरों में…

धर्मराज युधिष्ठिर

युधिष्ठिर पांडु का ज्येष्ठ पुत्र था| धर्मराज द्वारा कुंती के आह्वान पर बुलाए जाने पर उनके अंश से ही यह पैदा हुआ था, इसलिए धर्म और न्याय इसके चरित्र में कूट-कूटकर भरा था| इसी के कारण इसको धर्मराज युधिष्ठिर पुकारा जाता था| वह कभी असत्य नहीं बोलता था, तभी शत्रु…

गांधारी

 गांधार देश के राजा सुबल के बेटे का नाम शकुनि और बेटी का नाम गांधारी था| बेटा जैसा कुटिल, क्रूर और कपटी था, बेटी वैसी ही सती-शिरोमणि थी| गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र के साथ हुआ था| ये भारतीय पातिव्रत की सजीव मूर्ति हैं | जिस समय इन्हें मालूम हुआ कि…

माताएं दो हृदय एक

पाण्डु की दो पत्नियां थीं - माद्री और कुंती| दोनों रूपवती और गुणवती थीं| दोनों के हृदय में धर्म और कर्तव्य के प्रति अत्यधिक निष्ठा थी| दोनों पाण्डु को अपने जीवन का सर्वस्व समझती थीं| दोनों में परस्पर बड़ा प्रेम था| माद्री अवस्था में कुछ बड़ी थी| अत: कुंती उसे…

वरद् पुत्र

प्राचीन काल में मथुरा में एक प्रतापी नृपति राज्य करते थे| उनका नाम शूरसेन था| वे भगवान श्रीकृष्ण के पिता वसुदेव के पिता था| वे बड़े धर्मात्मा एवं प्रतिज्ञापालक थे| शूरसेन के एक अनन्य मित्र थे, जिनका नाम कुंतिभोज था| कुंतिभोज के पास सबकुछ तो था, किंतु संतान नहीं थी|…

सत्यपालन

कुरुवंश के देवापि बड़े और शांतनु छोटे थे| पिता के स्वर्गवास के बाद राज्याभिषेक का प्रश्न उठने पर देवापि चिंतित हो उठे| वे चर्मरोगी थे इसलिए वे शांतनु को राजा बनाना चाहते थे|

उषा और अनिरुद्ध

"मुझे छोड़कर मत जाइए प्राणेश्वर - मत जाइए - मैं आपके बिना जीवित नहीं रह सकती - मत जाइए - प्राणनाथ - मत जाइए," राजकुमारी उषा के कांपते हुए होठों से निकला और फिर वह एक झटके के साथ उठकर बिस्तर पर बैठ गई|

राधा-कृष्ण

सतयुग और त्रेता युग बीतने के बाद जब द्वापर युग आया तो पृथ्वी पर झूठ, अन्याय, असत्य, अनाचार और अत्याचार होने लगे और फिर प्रतिदिन उनकी अधिकता में वृद्धि होती चली गई| अधर्म के भार से पृथ्वी दुखित हो उठी| उसने ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास पहुंचकर प्रार्थना की…

कृष्ण और रुक्मिणी

विदर्भ देश के राजा भीष्मक के पांच पुत्र और एक पुत्री थी| पुत्री का नाम रुक्मिणी था जो समकालीन राजकुमारियों में सर्वाधिक सुंदर और सुशील थी| उससे विवाह करने के लिए अनेक राजा और राजकुमार आए दिन विदर्भ देश की राजधानी की यात्रा करते रहते थे|

अंबा

"बेटा देवव्रत, तुमने तो मेरे विवाह के समय ही जीवन भर अविवाहित रहने की प्रतिज्ञा कर ली थी| इसलिए तुम्हारे विवाह करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता जबकि बड़ा भाई होने के नाते पहले तुम्हारा विवाह होना चाहिए था|" राजमाता सत्यवती ने अपने ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत से कहा जिन्हें…

कुरु का जन्म

कुरु को कौन नहीं जानता? कुरुवंश के प्रथम पुरुष का नाम कुरु था| कुरु बड़े प्रतापी और बड़े तेजस्वी थे| उन्हीं के नाम पर कुरुवंश की शाखाएं निकलीं और विकसित हुईं| एक से एक प्रतापी और तेजस्वी वीर कुरुवंश में पैदा हो चुके हैं| पांडवों और कौरवों ने भी कुरुवंश…

वेदव्यास जी का जन्म

राजा उपरिचर एक महान प्रतापी राजा था| वह बड़ा धर्मात्मा और बड़ा सत्यव्रती था| उसने अपने तप से देवराज इंद्र को प्रसन्न करके एक विमान और न सूखने वाली सुंदर माला प्राप्त की थी| वह माला धारण करके, विमान पर बैठकर आकाश में परिभ्रमण किया करता था| उसे आखेट का…

भगवद्गान में विघ्न न डालें

प्राचीन काल में भुवनेश नाम का एक धार्मिक राजा हुआ था| उसने हजार अश्वमेघ और दस सहस्त्र वाजपेय यज्ञ किये थे तथा लाखों गायों का दान किया था| उसके सोने के दान की भी कोई सीमा न थी| इस तरह राजा के धर्मकार्य महान् थे, किन्तु मोहवश राजा से एक…

भक्ति के वश भगवान्

भगवती अन्नपूर्ण काशीपुरी में आ चुकी थीं| यहीं पर उन्होंने भगवान् शंकर से पूछा-'भगवन् आप अपने भक्तों को किस उपाय से दर्शन देते हैं और उनके वश में हो जाते हैं?' भगवान् ने बताया कि 'इसके लिये भक्ति से बढ़कर और कोई उपाय नहीं है| ब्रम्हा मेरे अनुपम भक्त हैं|…

ब्रम्हाजी का दर्पभंग

एक बार स्वर्ग अप्सरा मोहिनी ब्रम्हाजी पर अत्यन्त आसक्त हो गयी| वह एकान्त में उनके पास गयी और उनके अनुसार ही बैठकर उनसे प्रेमदान की प्रार्थना करने लगी| ब्रम्हाजी उस समय भगवान् की स्मृति हुई| भगवत्कृपा से उनका मन निर्विकार रहा| वे मोहिनी को ज्ञान की बातें समझाने लगे; पर…

सदाचार से कल्याण

दर्शाण देश में एक राजा रहता था वज्रबाहु| वज्रबाहू की पत्नी सुमति अपने नवजात शिशु के साथ किसी असाध्य रोग से ग्रस्त हो गयी| यह देख दृष्टिबुद्धि राजा ने उसे वन में त्याग दिया| अनेक प्रकार के कष्ट भोगती हुई वह आगे बढ़ी| बहुत दूर जाने पर उसे एक नगर…

जगन्नाथधाम

पुरुषोत्तम क्षेत्र (जगन्नाथधाम)-का महत्व वर्णनातीत है| यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण पुरुषोत्तम नाम से विख्यात है| अतः इस क्षेत्र को पुरुषोत्तम क्षेत्र भी कहते हैं| इस क्षेत्र का नाम लेने मात्र से मनुष्य मुक्त हो जाता है| बहुत पहले स्वयं भगवान् ने इस क्षेत्र में नीलमणि की प्रतिमा बनाकर स्थापित की थी|…

पाँच महातीर्थ

(1) पितृतीर्थ-नरोत्तम नाम का एक तपस्वी ब्राह्मण था| वह माता-पिता की सेवा छोड़कर तीर्थयात्रा के लिये निकल पड़ा| तीर्थ-सेवन की महिमा से उसके गीले कपड़े आकाश में सूखते थे| इस चमत्कार से उसके मन में अभिमान उत्पन्न हो गया| वह आकाश की ओर देखकर कहने लगा-'मेरे समान दूसरा तपस्वी कौन…

आदिशक्ति ललिताम्बा

जब विश्व पर घोर संकट आता है और उसके प्रतिकारक कोई उपाय नहीं रहता, जब आदिशक्ति का आविर्भाव होता है| इसी प्रकार एक बार भण्डासुर से सारा विश्व त्रस्त हो गया था, तब उन्होंने ललिता के के रूप में लोकोद्धार का कार्य किया|

चोरी की चोरी

कांचीपुर में वज्र नामक एक चोर था| उस चोर का यह नाम विशेष सार्थक था| किसी की सम्पत्ति चुराने पर उसके स्वामी को जो कष्ट होता है, उसे सहृदय व्यक्ति ही आँक सकता है| चोर का हृदय वस्तुतः वज्र का बना होता है| इसलिये वह चोरी कर पता है| यदि…

और्ध्वदेहिक दान का महत्व

मृतात्मा की सद्गति हेतु पिण्डदानादि श्रद्धा कर्म अत्यन्त आवश्यक हैं| पुन्नामक नरक से पिता को बचाने के कारण ही आत्मज पुत्र कहा जाता है| पुत्र का मुख देखकर पिता पैतृक ऋण से छूट जाता है और पौत्र के स्पर्शमात्र से यमलोक आदि का उल्लंघन कर जाता है| ब्रह्म-विवाह द्वारा परिणीता…

सोमपुत्री जाम्बवती

इस सृष्टि से पूर्वसृष्टि की बात है| जाम्बवती श्रीसोम की पुत्री थी| श्रीसोम श्री विष्णु की सेवा में लगे रहते थे| उनकी पुत्री जाम्बवती भी पिता का अनुशरण करती थी| वह नित्य पुराण सुनती, प्रतिक्षण भगवान् का स्मरण करती, उनके चरणों की वन्दना करती और उनकी सेवा में लगी रहती…

बिना दान दिये परलोक में भोजन नहीं मिलता

विदर्भ देश में श्वेत नामक राजा राज्य करते थे| वे सतर्क होकर राज्य का संचालन करते थे| उनके राज्य में प्रजा सुखी थी| कुछ दिनों के बाद राजा के मन में वैराग्य हो आया| तब वे अपने भाई को राज्य सौंपकर वन में तपस्या करने चले गये| उन्होंने जिस लगन…

अविमुक्त-क्षेत्र में शिवार्चन से यक्ष को गणेशत्व-प्राप्ति

प्राचीन काल में हरिकेश नाम से विख्यात एक सौन्दर्यशाली यक्ष हुआ था, जो पूर्णभद्र का पुत्र था| हरिकेश महाप्रतापी, ब्राह्मण भक्त एवं धर्मात्मा था| जन्म से ही उसकी शंकरजी में प्रगाढ़ भक्ति थी| वह तन्मय होकर उन्हीं को नमस्कार करने, उन्हीं की भक्ति करने और उन्हीं का ध्यान करने में…

जयध्वज की विष्णु भक्ति

माहिष्मती के राजा कार्तवीर्य के सौ पुत्र थे| उनमें शूर, शूरसेन, कृष्ण, धृष्ण और जयध्वज नाम के पाँच पुत्र महारथी और मनस्वी थे| इनमें प्रथम चार रूद्र के भक्त एवं पाँचवाँ जयध्वज नारायण का भक्त था| इसके अन्य भाइयों ने अपनी कुल-परम्परा के अनुसार शंकर की ही आराधना के लिये…

आसक्ति से विजेता भी पराजित

राजा दुर्जय सभी शास्त्रों में निष्णात हो चुके थे और शत्रुओं को भी जीत लिये थे, किंतु अपनी इन्द्रियों पर विजय नहीं प्राप्त कर सके थे| जो मन से हार जाय उस पराक्रमी को पराक्रमी कैसे कहा जा सकता है?

सुदर्शनचक्र-प्राप्ति की कथा

सुदर्शनचक्र, जो भगवान् विष्णु का अमोघ अस्त्र है और जिसने देवताओं की रक्षा तथा राक्षसों के संहार में अतुलनीय भूमिका का निर्वाह किया है और करता है, क्या है और कैसे भगवान् विष्णु को प्राप्त हुआ-इसकी कथा इस प्रकार है-

भक्ति बड़ी या शक्ति?

'मुनिप्रवर! आप तो पृथ्वी पर निवास करने वाले श्रेष्ठ ऋषि प्रतीत होते हैं|रसातल में आपके पधारने का क्या कोई विशेष प्रयोजन है?'-महातेजस्वी प्रह्वादने अमित तेजस्वी च्यवन ऋषि का यथायोग्य पूजनकर विनम्रतापूर्वक प्रश्न किया|

कीर्तन का फल

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी का चन्द्र अपनी ज्योत्स्ना से धरती को शीतलता प्रदान कर रहा था| वह विणा लेकर भक्ति गीत गाते हुए एकान्त अरण्य में स्थित मन्दिर की ओर चल पड़ा| चाण्डाल होते हुए भी उसका नित्य नियम था, मन्दिर में बैठकर रात्रि के स्तब्ध प्रहर…

कर्मरहस्य

अत्रिवंश में उत्पन्न एक मुनि थे, जो संयमन नाम से विख्यात थे| उनकी वेदाभ्यास में बड़ी रूचि थी| वे प्रातः, मध्यान्ह तथा सांय-त्रिकाल स्नान-संध्या करते हुए तपस्या करते थे| एक दिन वे धर्मारण्य क्षेत्र में परम पुण्यमयी गंगा नदी के तट पर स्नान करने के उद्देश्य से गये| वहाँ मुनि…

नारायण-मन्त्र की महिमा

पूर्वकल्प में आरुणि नाम से विख्यात एक महान् तपस्वी ब्राह्मण थे| वे किसी उद्देश्य से तप करने के लिये वन में गये और वहाँ उपवासपूर्वक तपस्या करने लगे| उन्होंने देविका नदी के सुन्दर तटपर अपना आश्रम बनाया था| एक दिन वे स्नान-पूजा करने के विचार से नदी के तट पर…

भक्त विष्णुदास और चक्रवर्ती सम्राट् चोल

पहले कांचीपुर में चोल नाम के चक्रवर्ती राजा हो गये हैं| राजा चोल के राज्य में कोई भी मनुष्य दरिद्र, दुःखी, पापी तथा रोगी नहीं था| एक समय की बात है-राजा चोल अनन्तशयन नामक तीर्थ में गये, वहाँ उन्होंने जगदीश्वर भगवान् विष्णु के दिव्य विग्रह की विधि पूर्वक पूजा की|…

शिवभक्त नन्दभद्र

प्राचीन कल की बात है, बहूदक नामक तीर्थ में नन्दभद्र नाम के एक वैश्य रहते थे| वे वर्णाश्रम-धर्म का पालन करने वाले सदाचारी पुरुष थे| उनकी धर्मपत्नी का नाम कनका था| वह भी पतिव्रता-धर्म का पालन करने वाली साध्वी स्त्री थी| उसमें अन्य अनेक सद्गुण भी विद्यमान थे, जिससे उनकी…

गधे का सौदा

एक बार की बात है| एक लड़का था| अक्ल के मामले में थोड़ा-सा कमजोर| एक दिन खेत से लौटते समय उसने एक आदमी को एक गधी लेकर जाते हुए देखा| लड़के को गधी बहुत अच्छी लगी| उसने मालिक से पूछा, "तुम इस गधी को कितने में बेचोगे? मै इसे खरीदना…

बुद्धिमान माँ

भारत के पूर्वी हिस्से में उड़ीसा नाम का राज्य है| महानदी के मुहाने पर आसपास की जमीन बहुत उपजाऊ है-धान के खेत, जंगल और ताजा हरी घास, जिसे वहां के मवेशी भरपेट खाते हैं|