आध्यात्मिक शिक्षाप्रद कथाएँ (1119)

अमीरी का लालच

परमसुख अपने परिवार के साथ सुख से रहता था| उसकी तीन लड़कियाँ थी| एक दिन उसका अकास्मिक निधन हो गया|

मित्रों का महत्व

एक बड़ी झील के किनारे एक बाज़ रहता था| कुछ समय बाद एक मादा बाज़ भी दूसरे पेड़ पर आकर रहने लगी| बाज़ ने मादा बाज़ से शादी का निवेदन किया तो उसने कहा कि पहले कुछ मित्र तो बनाओ| क्योंकि जब कभी मुसीबत आती है तो मित्रों का बहुत…

लालची फेरीवाला

दो फेरीवाले एक नदी किनारे मिले|

लोभी मछुआरा

एक दिन जोगराम और उसका बेटा मछली पकड़ने नदी किनारे गए|

महारानी का हार

हस्तिनापुर की रानी व उसकी सखियाँ तालाब में नित्य स्नान किया करती थी| एक दासी जो प्रतिदिन उनके कपड़ों और आभूषणों की निगरानी करती थी, इस उबाऊ काम से काफ़ी परेशान थी|

सुनहरे हिरण

दो हिस्सों में बँटा हुआ एक जंगल था| दोनों भागों में दो सुनहरे हिरण रहते थे| एक का नाम था- वट हिरण और दूसरे का- शाखा हिरण| दोनों का अपना-अपना दल था|

सियार और सम्मोहन मंत्र

बात काफ़ी पुरानी है...गणेशपुर नरेश ब्रहमदत का राजपंडित एक बार वन में एकांत स्थान पर कोई गुप्त मंत्र जप रहा था| तभी वहीं पास लेटे एक सियार के कान खड़े हो गए, वह भी ध्यान से सुनने लगा| कुछ देर बाद राजपंडित खड़ा हुआ और बोला, ‘बस, मुझे मंत्र सिद्ध…

लालच बुरी बला

बहुत समय पहले की बात है| काशी नरेश के यहाँ राजू नामक माली काम करता था| एक हिरण रोज़ राजा के बाग में घास चरने आता था| कुछ दिनों में हिरण राजू को देखने का अभ्यस्त हो गया और उसने भागना छोड़ दिया| बहुत समय पहले की बात है| काशी…

धूर्त सियार

एक जंगल में कुछ बदमाशों की दावत चल रही थी| उनमें से एक न डींग हांकी कि इतनी रात गए भी मैं माँस ला सकता हूँ| फिर वह माँस विक्रेता की दुकान पर गया और बोला, ‘मुझे कुछ माँस चाहिए, मिलेगा?’

सियार और ऊदबिलाव

सियार की पत्नी को एक बार ताजा मछली खाने की इच्छा हुई| उससे मछली लाने का वादा करके सियार नदी की ओर बढ़ चला|

शिकारी को चकमा

एक जंगल में एक हिरण रहता था| एक दिन उसकी बहन अपने बेटे को लेकर उसके पास आई और कहने लगी, ‘भाई, अपने भांजे को अपनी जाति के गुण सिखा दो|’

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

एक बार पक्षियों का राजा अपने दल के साथ भोजन की खोज में जंगल में गया|

अनमोल खज़ाना

स्वर्णनगरी में एक भिश्ती (पानी भरनेवाला) रहता था| वह दिन-रात मेहनत करने के बाद भी मुश्किल से गुज़ारा चला पाता था|

काजल

गौरैया चिड़िया का एक जोड़ा पीपल के पेड़ में घोंसला बनाकर रहता था| नर गौरैया अपनी मादा से बहुत प्यार करता था|

जादुई डंडा

एक खरगोश बेहद आलसी और कामचोर था| एक बार वह पेड़ के नीचे बैठा था| वही एक डंडा भी पड़ा था| खरगोश ने वह डंडा उठा लिया और उसे ज़मीन पर मारने लगा| ज़मीन पर डंडा मारते हुए वह सोच रहा था कि काश मुझे ढेर सारी गाजरें मिल जाती|

झूठ के पैर नही होते

किसी गाँव में दीनू नाम का एक लोहार अपने परिवार के साथ रहता था| उसका एक पुत्र था, जिसका नाम शामू था| जैसे-जैसे शामू बड़ा होता जा रहा था, उसके दिल में अपने पुश्तैनी धंधे के प्रति नफ़रत बढ़ती जा रही थी| शामू के व्यक्तित्व की एक विशेषता यह थी…

दिखावे की कीमत

एक बहुत ही सुंदर हरा-भरा वन था और वन के एक किनारे पर सुरम्य सरोवर था| उस सरोवर में बहुत-से हंस रहते थे| उन हंसों के राजा का नाम हंसराज था| वन में भी बहुत से पक्षी रहते थे, उन्हीं में एक था कनकाक्ष नामक उल्लू| उस उल्लू और हंसराज…

खरगोश की चतुराई

एक वन में भासुरक नामक सिंह रहता था| वह अपनी शक्ति के मद में प्रतिदिन वन के अनेक पशुओं का वध कर दिया करता था| कुछ को खाकर वह अपनी भूख शांत करता और कुछ को अपनी शक्ति दर्शाने और वन में दहशत फैलाने के लिए यूँ ही मार डालता|

बुद्धिबल सबसे बड़ा बल

किसी वन में हाथियों के झुंड के साथ उनका मुखिया चतुर्दन्त रहता था| एक बार उस वन में कई वर्षों तक वर्ष नही हुई, जिसकी वजह से छोटे-बड़े और कच्चे-पक्के सरोवर सूखने लगे| इसके फलस्वरूप प्रतिदिन हाथी काल का ग्रास बनने लगे| ऐसी विकट स्थिति में हाथियों ने अपने मुखिया…

नीतिवान सन्यासी

नगर के बाहर बने शिव मंदिर में ताम्रचूड़ नामक एक सन्यासी रहता था, जो उस नगर में भिक्षा माँगकर बड़े सुख से अपना जीवन व्यतीत कर रहा था| वह अपने खाने-पीने से बचे अन्न-धान्य को एक भिक्षा पात्र में रख देता और फिर उस पात्र को रात्रि में खूंटी पर…

चालाक भेड़िया

किसी वन में वज्रदंष्ट्र नामक एक शेर रहता था| चतुरक और क्रव्यमुख नामक सियार और भेड़िया उसके बड़े ही आज्ञाकारी सेवक थे| एक दिन शेर ने ऊँटनी का शिकार किया|

लालची कौआ

कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था|

सच्ची मित्रता-2

एक जंगल में झील किनारे कछुआ, कठफोड़वा व हिरण मित्र भाव से रहते थे|

स्वामिभक्त सेनापति

प्राचीनकाल में कंचनपुर में राजा कौआ अपनी रानी के साथ एक घने पेड़ पर रहता था| वह उसे बहुत प्यार करता था|

श्रेष्ठ कौन?

कौशल नरेश मल्लिक न्यायप्रिय और शक्तिशाली राजा था| लेकिन उसे अपनी योग्यता पर बिल्कुल भी भरोसा नही था| वह सोचता, ‘लोग उसे अच्छा कहते है, क्या मैं सचमुच ही अच्छा हूँ?’

विषैले फलों का पेड़

कुछ बदमाश एक पेड़ पर टकटकी लगाए रहते थे, जिस पर ज़हरीले फल आते थे| आम जैसे उन फलों को खाकर जो व्यक्ति मर जाता था, उसका सामान ये बदमाश आपस में बाँट लेते थे|

होनहार पुत्र

एक सुबह रामदीन अपने वृद्ध पिता को बैलगाड़ी में बिठाकर कहीं ले जा रहा था कि उसका पुत्र बोला, ‘पिताजी, आप दादाजी को कहाँ ले जा रहे है?’

ह्रदय परिवर्तन

करनपुर का राजा विशाल सिहं अपने जिद्दी, घमंडी व निरंकुश पुत्र दलवीर सिंह की वजह से बहुत चिंतित था|

बुद्धिमान सरदार

एक बूढ़े व्यापारी की देखरेख में माल से लदी बैलगाडियों का काफ़िला रेगिस्तान में प्रवेश करनेवाला था| तभी एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से बोला, ‘इस रेगिस्तान को पार करने के नाम से ही मुझे तो कपकपी छूटने लगती है|’

सियार ओर सिंह

एक दिन एक भूखे सियार का एक सिहं से सामना हो गया| सिहं को देखकर सियार की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई| उसने किसी तरह डरते-डरते कहा, ‘हे जंगल के राजा| मुझे अपनी शरण में ले लो| मैं आपकी हर आज्ञा मानूँगा|’

यथार्थ की पहचान

काशी में पावन सलिला गंगा के तट पर एक मुनि का बहुत बड़ा आश्रम था| उसमें रहकर अनेक शिष्य वेद-वेदांग की शिक्षा ग्रहण करते थे| शिष्य में एक का नाम दुष्कर्मा था| वह सब शिष्यों में सबसे ज्यादा आज्ञाकारी, समझदार और दयालु प्रवृति का था|

साधु और जमींदार

कंचनपुर के निकट घने जंगल में एक धूर्त साधु वेशधारी रहता था| कंचनपुर का जागीदार रामप्रताप उसकी खूब सेवा किया करता था| साधु वेशधारी पर उसका अटूट विश्वास था|

खजाने का रहस्य

रामसुख और मनसुख दो जमींदार घनिष्ठ मित्र थे| जब मनसुख की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया तो रामसुख बोला...

नंदीश्वर

एक बार पंडित परमसुख को दानस्वरूप एक बछड़ा मिला| उसने बछड़े का नाम ‘नंदीश्वर’ रखा और प्यार से लालन-पोषण करके उसे तंदुरुस्त बैल बना दिया| बैल भी परमसुख का काफ़ी ख्याल रखता था क्योंकि उसने उसे पिता समान प्यार दिया था|

शाही गजराज

बसंतपुर में बढ़इयों का एक मुहल्ला था| बढ़ई रोज नावों से नदी पार करके जंगल में जाते और अपने काम के लिए लकड़ी काटकर लाते थे| उसी गाँव में दो मित्र मोहन और रामू रहा करते थे| गाँव से जंगल और जंगल से गाँव आना-जाना उनका नियम था| काम की…

बहादुर बेटर

दुर्गापुर के निकट जंगल में कुछ बटेरें रहती थी| उसी जंगल में हाथियों का समूह भी चरने आया करता था| एक बुद्धिमान और न्यायप्रिय हाथी उस समूह का मुखिया था|

श्वेत गजशावक

एक दिन हिमालय की तराई में गज दंपति आपस में बातें कर रहे थे...

सिर्फ़ एक चने के लिए

बहुत समय पहले की बात है- एक राजा ने अपनी सेना सहित किसी नगर के बाहर पड़ाव डाला| वहाँ पेड़ पर बैठा एक बंदर गौर से उनकी तमाम गतिविधियाँ देख रहा था|

मूर्ख वृक्ष

प्राचीनकाल में एक जंगल में दो वृक्ष मिलजुल कर रहते थे|

पहले जानो फिर मानो

एक खरगोश बिल्व (बेल) वृक्ष के नीचे विश्राम की मुद्रा में अधलेटा सोच रहा था, ‘यदि धरती के टूटकर दो टुकड़े हो जाएँ तो क्या होगा?’

मूर्ख सन्यासी और मेढ़ा

काशीपुर में बड़ी संख्या में लोग मेढ़ों की लड़ाई देखने जमा हुए| तभी एक सन्यासी भी वहाँ आ पहुँचा| उसने एक आदमी से पूछा, क्यों भाई, यहाँ क्या हो रहा है?’

ढोलवाले की मूर्खता

एक बार ढोलकवादक रमैया और उसका पुत्र कानू कांचिपुरि एक विवाह समारोह में गए| समारोह समाप्त होने पर दोनों को खूब धन आभूषण पुरस्कार स्वरुप मिले| वे खुशी-खुशी अपने घर की ओर लौट चले|

जानलेवा मंत्र

बात बहुत पुरानी है| एक पंडितजी अपने शिष्य के साथ जंगल से होकर जा रहे थे| तभी एकाएक उनकी नज़र डाकुओं पर पड़ी|

मरे चूहे से व्यापार

बहुत पुरानी बात है...पाटलीनगर में एक युवक काम की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था| संयोगवश राज्य का कोषाध्यक्ष भी अपने एक मित्र के साथ उधर से गुज़र रहा था|

सियार और बकरी

हिमालय की तराई में बकरियों का एक समूह चरने आया करता था| एक दिन भोजन के लिए यहाँ-वहाँ भटकते हुए एक सियार और सियारिन ने बकरे-बकरियों के समूह को घास चरते हुए देखा|

हिरण का विवेक

रंगपुरी के निकटवर्ती जंगल में एक हिरण रहता था| उसे एक वृक्ष के फल बहुत अच्छे लगते थे| पास ही गाँव में एक शिकारी भी रहता था| वह यह बात जानता था|

सुनहरा हिरण

द्रव्यपुर के एक धनी व्यापारी का पुत्र था धनकू| पिता के लाड़-प्यार में वह इतना बिगड़ा कि ढंग से पढ़-लिख भी नही पाया|

सद्गुणी शिष्य

प्रयाग में एक ऋषि का आश्रम था| उनके एक अतिसुन्दर कन्या थी| कन्या को विवाह योग्य जानकर उन्होंने अपने ही शिष्यों में से सद्गुणी शिष्य के साथ उसका विवाह करने का निर्णय किया|

सियार और चूहे

भोजन की तलाश में सारा जंगल छानते हुए एक दिन एक सियार की नज़र चूहों के एक समूह पर पड़ी| उस समूह का मुखिया एक हट्टा-कट्टा चूहा था|

घासीराम खजांची

धनपुर नगर में घासीराम नाम का एक महाकंजूस रहता था| वह राजा के दरबार का खजांची था| एक दिन वह घर लौट रहा था कि रास्ते में उसने एक आदमी को पूड़े खाते हुए देखा तो उसका मन मचल गया, ‘कितने दिन हो गए, मुझे पूड़े खाएँ| आज मैं भी…
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नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...
 
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व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...
 
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धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 
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समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

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