Top videos

  • सिक्ख गुरु साहिबान
अपने शुरूआती जीवन में साईं बाबा भी पहलवान की तरह रहते थे| शिरडी में मोहिद्दीन तंबोली नाम का एक ...
भोग लगाओ साईं बाबा रे मेरा प्रेम भरा प्रीति के पकवान बनाए और भाव भरे भोजन मैंने अपने हाथ से कहो तो ...
शिरडी से कुछ दूरी पर रहाता गांव था| वहां खुशालचंद नाम का एक साहूकार रहता था| बाबा इससे भी तात्या ...
एक बार शिरडी में हैजे का प्रकोप हो गया| जिससे शिरडीवासियों में भय फैल गया| अन्य गांवों से उनका ...
शिरडी में जिस तरह रामजन्म उत्सव मनाया जाता, वैसे ही कृष्ण जन्मोत्सव भी मनाया जाता था| पालना बांधकर ...
उस समय तक शिरडी गांव की गिनती पिछड़े हुए गांवों में हुआ करती थी| उस समय शिरडी और उसके आस-पास के ...
साईं बाबा ईशावतार थे| सिद्धियां उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ी रहती थीं| पर बाबा को इन बातों से कोई मतलब ...
साईं बाबा पूर्ण सिद्ध थे| उन्हें दुनियादारी से कोई सरोकार न था| बाबा अपनी समाधि में सदैव लीन रहते ...
एक समय की बात है कि साईं बाबा मस्जिद में बैठे हुए अपने भक्तों से वार्तालाप कर रहे थे| उसी समय एक ...
अनंतराव पाटणकर पूना के रहनेवाले थे| उन्होंने वेद और उपनिषदों का अध्ययन कर लिया था| उनका तत्वज्ञान ...
दादू की आँखों के आगे अपनी माँ, बहन और बीमार पत्नी के मुरझाये चेहरे घूम रहे थे|दादू ने जैसे ही घर के ...
|| चौपाई ||पहले साई के चरणों में, अपना शीश नमाऊं मैं।कैसे शिरडी साई आए, सारा हाल सुनाऊं मैं॥
नासिक के रहनेवाले मुले शास्त्री विद्वान थे| साथ में ज्योतिष, वेद, आध्यात्म के भी अच्छे जानकर थे| एक ...
बांद्रा में रहनेवाला अम्मीर शक्कर साईं बाबा का भक्त था| वह वहां पर दलाली किया करता था| एक बार उसे ...
साईं कृपा से व्रत कथा लिखवाई, भक्तों के हाथों में पहुंची|साईं गुरुवार व्रत करे जो कोई, उसका कल्याण ...
नाना साहब निमोणकर और उनकी पत्नी दोनों की साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा थी| वे काफी समय से शिरडी में ...
साठे मुम्बई के प्रसिद्ध व्यापरी थे| एक बार उन्हें अपने व्यापार में बहुत हानि उठानी पड़ी, जिससे वे ...
श्री साईं बाबा व्रत के फलस्वरूप निम्नलिखित लाभ व फल प्राप्त हो सकते है: 
शामा साईं बाबा के परमभक्त थे| साईं बाबा अक्सर कहा करते थे कि शामा अैर मेरा जन्मों-जन्म का नाता है| ...
साईं बाबा की अद्भुत चिकित्सा की चारों ओर प्रसिद्धि फैल चुकी थी| लोग बहुत दूर-दूर से उनसे अपना इलाज ...
साईं बाबा के एक भक्त थे दामोदर घनश्याम बावरे| लोग उन्हें 'अण्णा चिंचणीकर' के नाम से जानते थे| साईं ...
तात्या साहब नूलकर अपने डॉक्टर मित्र के साथ साईं बाबा के दर्शन करने के लिए शिरडी आये थे| मस्जिद में ...
1. ॐ श्री साईंनाथाय नमः--- ॐ श्री साईंनाथ को नमस्कार 2. ॐ श्री साईं लक्ष्मी नारायणाय नमः--- ॐ जो ...
नांदेड में रहनेवाले रतनजी शापुरजी वाडिया एक फारसी सज्जन थे| उनका बहुत बड़ा व्यवसाय था| किसी भी चीज ...
जिस समय साईं बाबा काका साहब को साठे के बारे में 'गुरुचरित्र' का पारायण करने के बारे में बता रहे थे| ...
साईं रहम नजर करना, बच्चों का पालन करना||जाना तुमने जगत्पसरा, सब ही झूठ जमाना|| साईं...मैं अंधा हूँ ...
साईं बाबा रहते तो शिरडी में ही थे, पर उनकी नजरें सदैव अपने भक्तों पर लगी रहती थीं| बाबा अपने भक्तों ...
हरदा गांव निवासी दत्तोपंत चौदह साल से पेटदर्द की पीड़ा से परेशान थे| उन्होंने हर तरह का इलाज करवाया ...
बाबा के एक भक्त रामचन्द्र आत्माराम तर्खड जिन्हें लोग बाबा साहब के नाम से भी जानते थे, बांद्रा में ...
शिरडी में रहते हुए एक बार बाबा साहब की पत्नी श्रीमती तर्खड दोपहर के समय खाना खाने बैठी थीं| उसी समस ...
अमरासवती जिले के रहनेवाले दादा साहब खापर्डे की पत्नी श्रीमती खापर्डे अपने छोटे पुत्र के साथ शिरडी ...
सुबह-सुबह इंस्पेक्टर गोपालराव अपने दरवाजे पर खड़े थे कि गांव का एक मेहतर अपनी पत्नी के साथ उनके घर ...
एक बार बापू साहब बूटी शिरडी आये हुए थे| तब एक दिन उनसे बाबा साहब डेंगले जो ज्योतिष विद्या के जानकर ...
साईं बाबा भगवद् भजन व ईश्वर चिंतन में विशेष रूप से रुचि रखते थे| बाबा सदैव अपने आत्मस्वरूप में मग्न ...
साईं बाबा कभी-कभी अपने भक्तों के साथ हँसी-मजाक भी किया करते थे, परन्तु उनकी इस बात से न केवल भक्तों ...

साखियाँ

Galleries

  • व्रत, विधि व कथा
  • आरती संग्रह
  • मंत्र संग्रह
  • चालीसा संग्रह
सर्व सुख, रक्त विकार, राज्य सम्मान तथा पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का वर्त उतम है|
यह व्रत पोश माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है|
इस व्रत को करने वाला कथा कहते व सुनते समय हाथ मे गुड व भुने चने रखें|
यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को किया जाता है|इस दिन गौ की पूजा करने का विधान है| साथ में ...
सोमवार का व्रत साधारणतय दिन के तीसरे पहर तक होता है|
आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जीवित पुत्रिका के रूप में मनाते हैं| इस व्रत को करने से पुत्र ...
cache/resized/73fce6491ec13398fdd743a0cf6547dd.jpg
cache/resized/94914f186294029e0fede3a72b1e534a.jpg
cache/resized/6d025775ab12b6472149c5a09e2d6921.jpg
cache/resized/55044b072690c9d428db53112f86e9c5.jpg
cache/resized/c9e5f3c8dbc76ced9b440f8bf44aa8ea.jpg
cache/resized/66e77c37f49f5b915fa6cd6947b2cb93.jpg
जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा |ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्दाडी धारा || टेक
करो आरती गीता जी की || जग की तारन हार त्रिवेणी,स्वर्गधाम की सुगम नसेनी |
मैं तेरा कंगाल पुजारी सौ-सौ दीप कहाँ से लाऊं |मेरे पास भक्ति है माता मैं उसी का दीप जलाऊँ |मैं एक ...
अम्बे तू है जगम्बे काली जय दुर्गे खप्पर वाली |तेरे ही गुण गायें भारती |ओ मैया हम सब उतारें तेरी ...
आरति कीजै हनुमान लला की |दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ||
ॐ जय ब्रह्स्पति देवा, जय ब्रह्स्पति देवा |छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा ||
cache/resized/68bc44ce36d278688a2502e711bfab23.jpg
cache/resized/04ed53414ae87742f03424cec001dd0f.jpg
cache/resized/9025fb1b8483c014ac626e8996ab3a82.jpg
cache/resized/ac58a38a14feb95204623b901621b22e.jpg
cache/resized/2016700777e9a20d2796a67b44ba120d.jpg
cache/resized/7248e0b01a60dd3289be7e3976bfae0c.jpg
ॐ गं गणपतये नमः |ॐ श्री विघ्नेश्वराय  नमः ||
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर ।।
ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः ||
हृषिकेश गोविन्द हरे मुरारी ! हे ! हृषिकेश गोविन्द हरे मुरारी !!
केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम ।पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु ।।
हे चक्रधर !हे चक्रपाणि !!हे चक्रायुधधारी !!!
cache/resized/6e59f777a1eab28bea456f05647d837a.jpg
cache/resized/13987862dd571c8c9022ff890922f18c.jpg
cache/resized/b58b1ca2253f65dd6a45454295cf06a6.jpg
cache/resized/082174d192ab78881b049910d4e2df1d.jpg
cache/resized/7a5d79ed4fedb750dd280f581f17579b.jpg
cache/resized/e799ce716446419d7f249fe08e8b58ee.jpg
|| दोहा ||    वन्‍दो वीरभद्र शरणों शीश नवाओ भ्रात ।ऊठकर ब्रह्ममुहुर्त शुभ कर लो प्रभात ॥
|| दोहा || जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
|| चौपाई || अज अनादि अविगत अलख, अकल अतुल अविकार।बंदौं शिव-पद-युग-कमल अमल अतीव उदार॥ आर्तिहरण ...
|| चौपाई || जय श्रीसकल बुद्घि बलरासी । जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥ जय जय जय वीणाकर धारी । करती ...
|| दोहा || श्री गुरु चरन सरोज राज, निज मनु मुकुरु सुधारि |बरनऊँरघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ...
|| दोहा ||   सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश ।। ...
cache/resized/6fe50d6d2063a2ec900dabf54b3f5880.jpg
cache/resized/0217e19a92f018b54338fa3ce43074a6.jpg
cache/resized/d3b11dac90b15a7a53df6b72719932b6.jpg
cache/resized/c5e92b02b513e55697fb98fd2e1a7c05.jpg
cache/resized/fec7ed6ed799671797cbf4a2bcfcf4f0.jpg
cache/resized/d10351e968f3eb828c8e95caedda2529.jpg
 
Videos

नम्रता का पाठ

एक बार अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन नगर की स्थिति का जायजा लेने के लिए निकले। रास्ते में एक जगह भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। वह कुछ देर के लिए वहीं रुक गए और वहां चल रहे कार्य को गौर से देखने लगे। कुछ देर में उन्होंने देखा कि कई मजदूर एक बड़ा-सा पत्थर उठा कर इमारत पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। किंतु पत्थर बहुत ही भारी था, इसलिए वह more...
 
Gallery

व्यर्थ की लड़ाई

एक आदमी के पास बहुत जायदाद थी| उसके कारण रोज कोई-न-कोई झगड़ा होता रहता था| बेचारा वकीलों और अदालत के चक्कर के मारे परेशान था| उसकी स्त्री अक्सर बीमार रहती थी| वह दवाइयां खा-खाकर जीती थी और डॉक्टरों के मारे उसकी नाक में दम था| एक दिन पति-पत्नी में झगड़ा हो गया| पति ने कहा - "मैं लड़के को वकील बनाऊंगा, जिससे वह मुझे सहारा दे सके|" more...
 
Sitemap

धर्म और दुकानदारी

एक दिन एक पण्डितजी कथा सुना रहे थे| बड़ी भीड़ इकट्ठी थी| मर्द, औरतें, बच्चे सब ध्यान से पण्डितजी की बातें सुन रहे थे| पण्डितजी ने कहा - "इस दुनिया में जितने प्राणी हैं, सबमें आत्मा है, सारे जीव एक-समान हैं| भीड़ में एक लड़का और उसका बाप बैठा था| पण्डितजी की बात लड़के को बहुत पसंद आई और उसने उसे गांठ बांध ली| अगले दिन लड़का दुकान पर गया| थोड़ी देर में एक more...
 
E-Mail

समझदारी की बात

एक सेठ था| उसने एक नौकर रखा| रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ| उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही| अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया| सफाई करते समय नौकर ने देखा| उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया| दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है| उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ| more...

आध्यात्मिक जगत - The school of spirituality (आध्यात्मिकता की पाठशाला)

नोट: इस वेबसाइट का उद्देश्य जन साधारण तक अपना संदेश पहुँचाना है| ताकि एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म के बारे में जानकारी ले सके| इस वेबसाइट को बनाने के लिए विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों व अखबारों से सामग्री एकत्रित की गई है| इसमें किसी भी प्रकार की आलोचना व कटु शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया|
Special Thanks to Dr. Rajni Hans, Ms. Karuna Miglani, Ms. Anisha Arora, Mr. Ashish Hans, Ms. Mini Chhabra & Ms. Ginny Chhabra for their contribution in development of this spiritual website. Privacy Policy